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आरटीआई में बीज वितरण की मांगी सूचना, 3 माह बाद आया हजारों पेजों से भरा कार्टन, 12 हजार रु. लिए, जो जानकारी मांगी वह थी ही नहीं

सरकारी घोटालों का खुलासा करने में मददगार साबित होने वाले सूचना के अधिकार का भी सरकारी अधिकारियों ने मजाक बनाकर रख...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 03:50 AM IST

सरकारी घोटालों का खुलासा करने में मददगार साबित होने वाले सूचना के अधिकार का भी सरकारी अधिकारियों ने मजाक बनाकर रख दिया है। ऐसा ही एक मामला भादरा के सहायक निदेशक कृषि कार्यालय में सामने आया है। यहां विभागीय अधिकारियों ने क्षेत्र के दो गांवों में अनुदान पर बीज वितरण की सूचना उपलब्ध करवाने के नाम पर दो युवकों से 12 हजार 224 रुपए जमा करवाकर दो कार्टन दस्तावेज डाक से भिजवा दिए। हैरानी की बात यह है कि इन हजारों पेजों में जो सूचना मांगी गई थी यानि बीज वितरण संबंधी सूचना का एक भी पेज भी नहीं था। मामला उच्चाधिकारियों के पास पहुंचने के बाद विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई है लेकिन युवकों को मांगी गई सूचना अभी तक नहीं मिल पाई है।

फिर अपील लगाई तो बीज वितरण की बजाय, मिनी किट वितरण दस्तावेज थमाए : इसके बाद दोनों युवकों ने हनुमानगढ़ स्थिति कृषि उपनिदेशक कार्यालय में अपील लगाई। अपील अधिकारी ने दोनों युवकों को चाही गई सूचना निशुल्क उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए। इसके बाद भी सहायक निदेशक कार्यालय की ओर से अनुदान पर बीज वितरण की बजाय मिनी किट वितरण के दस्तावेज थमा दिए गए। अब इन दोनों मामलों की शिकायत कलेक्टर, कृषि मंत्री और मुख्यमंत्री के पास पहुंचाई गई। इस सबके बीच भादरा में तैनात कृषि विभाग के सहायक निदेशक का श्रीगंगानगर जिले में ट्रांसफर भी हो गया लेकिन उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई है।

23 दिसंबर 2017 को किया था आवेदन, खचवाना और भरवाना गांव की मांगी थी सूचना

ग्रामीण क्षेत्र में अनुदान पर बीज वितरण में अनियमितता के आरोप अक्सर लगते रहते हैं। इसे देखते हुए भादरा क्षेत्र के गांव खचवाना निवासी मनोज कुमार जोशी और विनोद बेनीवाल ने कृषि विभाग के भादरा स्थित सहायक निदेशक कार्यालय से बीज वितरण की जानकारी आरटीआई के माध्यम से मांगी। मनोजकुमार जोशी ने खचवाना व विनोद बेनीवाल ने भरवाना गांव की सूचना मांगी थी। 23 दिसंबर 2017 को लगाई गई आरटीआई की एप्लीकेशन पर कोई सुनवाई नहीं हुई। बार-बार संपर्क करने पर विभाग की ओर से दस्तावेजों की खर्च राशि जमा करवाने के लिए कहा गया। मनोज कुमार जोशी से 4 हजार 616 व विनोद बेनीवाल से 7 हजार 608 रुपए जमा करवाए गए। इसके बाद 9 मार्च 2018 को दोनों युवकों को डाक से एक-एक कार्टन दस्तावेज मिले। इन्हें तीन-चार दिन तक खंगालने के बाद पता चला कि हजारों पन्नों में से एक पर भी बीज वितरण से संबंधित जानकारी नहीं हैं।

भास्कर पड़ताल

हर कार्यालय देरी से देता है सूचनाएं, सिर्फ 7 प्रतिशत का ही मिलता है जवाब

सूचना का अधिकार कानून अब सख्ती से लागू नहीं हो रहा है। इसे लेकर काम करने वाले एक्टिविस्ट्स के मुताबिक राज्य सरकार से संबंधित विभागों में लगाए गए आरटीई आवेदनों में सिर्फ सात प्रतिशत का ही जवाब मिलता है। इनमें से भी अधिकांश मामलों में मांगी गई सूचना उपलब्ध नहीं करवाई जाती है। मूल सूचना अधिकारी से सूचना नहीं मिलने पर कलेक्टर के पास अपील की जाती है। यहां मामलों की संख्या अधिक होने के कारण लंबा इंतजार करना पड़ता है। स्थिति यह है कि करीब 15 प्रतिशत मामले तो राज्य सूचना आयोग तक भी जाते हैं जबकि यहां आवेदन करने की प्रक्रिया कुछ जटिल है।

अनुदान पर बीज वितरण में गड़बड़ी की आशंका के चलते सूचना मांगी थी। दो अगल-अलग आरटीआई आवेदनों की सूचना उपलब्ध करवाने के लिए करीब 12000 रुपए लिए गए और ऐसे दस्तावेजों का कार्टन डाक से भिजवाया जिसमें बीज वितरण से संबंधित एक पेज भी नहीं था। अब उपनिदेशक कार्यालय में अपील के बाद भी चाही गई सूचना नहीं मिली है। मनोजकुमार जोशी, आरटीआई कार्यकर्ता

युवकों द्वारा जो सूचना चाही गई थी उसके सभी दस्तावेज उस समय उपलब्ध नहीं थे। इसके बावजूद उन्हें पूरी सूचनाएं देने का प्रयास किया गया। हमारी ओर से सही जानकारी दी गई थी। अब मेरा ट्रांसफर भी हो गया है। डॉ. रमेश बराला, तत्कालीन कृषि सहायक निदेशक, भादरा

आरटीआई के नाम पर निरर्थक सूचना दिए जाने के संबंध में दो युवकों ने शिकायत की थी। शिकायत सही पाई गई और संबंधित अधिकारी को सूचना निशुल्क उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए थे। इसके अलावा विभागीय कार्रवाई की भी अनुशंषा की गई है। जयनारायण बेनीवाल, कृषि उपनिदेशक

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