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170 गांवाें को सप्लाई करने वाली पाइप में 100 लीकेज, 25 लाख लीटर पानी बर्बाद, इसे बचाएं तो 20 गांवों की बुझेगी प्यास

भास्कर संवाददाता|पल्लू/हनुमानगढ़ सरकार जल बचत को लेकर कई योजनाएं बनाती है लेकिन हैरानी की बात है कि हनुमानगढ़ के 65...

Dainik Bhaskar

May 29, 2018, 03:55 AM IST
170 गांवाें को सप्लाई करने वाली पाइप में 100 लीकेज, 25 लाख लीटर पानी बर्बाद, इसे बचाएं तो 20 गांवों की बुझेगी प्यास
भास्कर संवाददाता|पल्लू/हनुमानगढ़

सरकार जल बचत को लेकर कई योजनाएं बनाती है लेकिन हैरानी की बात है कि हनुमानगढ़ के 65 और चूरू के 105 गांवों को पेयजल सप्लाई करने वाली धन्नासर में बनी आपणी योजना स्कीम की पाइपों में करीब 100 से अधिक लीकेज पिछले दो माह से ठीक नहीं किए जा रहे। नतीजा यह है कि इन लीकेज से रोज का करीब 20 से 25 लाख लीटर पानी व्यर्थ बह जाता है। इसका असर यह भी है कि इस भयंकर गर्मी में करीब 20 गांवों में तो पानी की बेहद किल्लत बनी हुई है वहीं अन्य गांवों की प्यास भी नहीं बुझ पाती। आश्चर्य यह भी है कि इतनी बड़ी योजना के अधिकारी लापरवाही बरत रहे हैं ग्रामीण हैरान और परेशान हैं। लीकेज के कारण लोगों के घरों में यह पानी पूरा पहुंचता ही नहीं। सुबह शाम जब सप्लाई आती है तो गांवों में पानी के तालाब बन जाते हैं। इन लीकेज से न केवल ग्रामीण परेशान है बल्कि मेगा हाईवे के पास आपणी योजना का प्लांट होने के कारण रिडकोर भी खासा परेशानी में है। जानकारों का मानना है कि इन लीकेज को ठीक करा दिया जाए ताो 20 गांवों की आराम से प्यास बुझ सकती है।

1. लीकेज इतने कि गांवों में होती है किल्लत, बिल भी पूरा चुकाते हैं ग्रामीण : ग्रामीणों के मुताबिक आपणी योजना की मुख्य पाइप लाइन सहित कई पाइपों में लीकेज का पानी निकल जाने से ग्रामीणों को इस गर्मी के मौसम में पूरा पानी नहीं मिल पाता। जबकि ग्रामीणों का आरोप है कि बिल पूरा वसूल किया जाता है। बिल वसूल करने के लिए गांव में आपणी योजना की तरफ से कमेटी का गठन किया हुआ है जो प्रति के यूनिट की बजाय घर में जितने सदस्य या पशुधन होता है उस हिसाब से बिल की वसूली करता है।

आपणी योजना की मुख्य लाइन सहित अन्य लाइनों में लीकेज के कारण तो पानी अंतिम छोर के गांवों तक नहीं पहुंच पाता, साथ ही इसमें बड़ा कारण यह भी है कि इन पाइप लाइनों में अवैध कनेक्शनों की भरमार है। इससे पानी निकलता तो पूरा है, लेकिन घरों तक पहुंचते-पहुंचते प्रेशर धीमा हो जाता है। इसकी शिकायत भी कई बार बैठकों में उठती है लेकिन अधिकारी गौर ही नहीं करते।

रिडकोर-नोटिस तक का जवाब नहीं देते, अब एफआईआर दर्ज करवाएंगे

रिडकोर ने आपणी योजना को मेगा हाईवे किनारे बड़े लीकेज को सही करने के लिए नोटिस दिए हैं परंतु कोई जवाब नहीं दिया रहा है। रिडकोर के प्रोजेक्ट मैनेजर ओमवीर सिंह चौधरी ने बताया कि लीकेज के कारण हमारी मेगा हाईवे क्षतिग्रस्त हो रही है। पिछले दिनों इनके कारण बहुत बड़ा हादसा होने से बचा है। हम इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएंगे। वहीं सुपरवाइजर भंवरलाल सहू ने बताया कि अगर बड़ा हादसा होता है तो कौन जिम्मेदार होगा।

जिला परिषद सदस्य: सूचना देने के बाद भी लीकेज ठीक नहीं होते, घेराव करेंगेे

जिला परिषद सदस्य गौरीशंकर थोरी ने बताया कि पल्लू उपतहसील के गांवों में भी पानी की समस्या गर्मी शुरू होते ही अपना रंग दिखाने लग गई है। आपणी योजना के अधिकारी पानी पहुंचाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। वहीं पाइप लाइन के लीकेज सूचना देने के बाद भी कर्मचारी नहीं ठीक करते। शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो आपणी योजना धन्नासर के कार्यालय का घेराव कर सड़कों पर उतरेंगे।

लीकेज से अंतिम छोर के गांवों तक नहीं पहुंचता पानी, हाईवे भी हो रहा क्षतिग्रस्त

मेगा हाईवे के पास आपणी योजना की मुख्य पाइप लाईन से बहता व्यर्थ पानी।

2. रिडकोर को रहता है हादसे का खतरा, मेगा हाईवे हो रहा ध्वस्त :बिसरासर-पल्लू, बरमसर-पल्लू के बीच मेगा हाईवे के किनारे एक खेत में मुख्य पाइप लाइन में लीकेज होने के कारण खेत में पानी भरने से तालाब बन जाता है। इसके अलावा मुख्य पाइप लाइन लीकेज होने से करीब डेढ़ माह पूर्व बिसरासर गांव के पास रात को मेगा हाईवे पर गड्डा बन गया था। गनीमत रही कि कोई बड़ा हादसा व जन हानि नहीं हुई। पानी से हर रोज सड़क को नुकसान होता रहता है।

यह है योजना

2003 से संचालन शुरू 2.88 एमसीएम क्षमता

आपणी योजना से दो जिलों के 170 गांवों के चक और ढाणियों में पानी सप्लाई होता है। हनुमानगढ़ जिले की सीमा के आखिरी गांव धन्नासर से चूरू के सुजानगढ़ तक आपणी योजना का पानी सप्लाई किया जाता है। इस योजना के प्लांट में 3 बड़ी डिग्गियों की क्षमता कुल 2.88 एमसीएम(मिलियन क्यूबिक मीटर) है। इसकी स्थापना 1999 को हुई थी लेकिन इसका सुचारू संचालन 2003 में हो गया था।

170 गांवाें को सप्लाई करने वाली पाइप में 100 लीकेज, 25 लाख लीटर पानी बर्बाद, इसे बचाएं तो 20 गांवों की बुझेगी प्यास
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