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किसान अाज से 10 दिन दूध-सब्जी शहर में बेचने नहीं लाएंगे गांव के बाहर स्टॉल लगाएंगे, लोग वहीं से सीधे खरीद सकेंगे

राष्ट्रीय किसान महासंघ के आह्वान पर शुक्रवार से शुरू होने वाले गांव बंद आंदोलन को लेकर शहरी क्षेत्र में भी असमंजस...

Dainik Bhaskar

Jun 01, 2018, 03:55 AM IST
किसान अाज से 10 दिन दूध-सब्जी शहर में बेचने नहीं लाएंगे गांव के बाहर स्टॉल लगाएंगे, लोग वहीं से सीधे खरीद सकेंगे
राष्ट्रीय किसान महासंघ के आह्वान पर शुक्रवार से शुरू होने वाले गांव बंद आंदोलन को लेकर शहरी क्षेत्र में भी असमंजस का माहौल है। गौरतलब है कि किसान संगठनो की ओर से दस दिन के लिए गांव बंद आंदोलन की घोषणा की गई है। इस दौरान गांवों से शहर में आने वाली सब्जी, दूध और अन्य कृषि उत्पादों की सप्लाई रोकने की बात कही गई है। इसे लेकर गुरुवार को खेती बचाओ किसान बचाओ मोर्चा के सदस्यों की ओर से प्रधानमंत्री के नाम का ज्ञापन एडीएम को सौंपा गया। उधर, आंदोलन से निपटने को लेकर प्रशासन की ओर से किसी भी तरह की तैयारी की घोषणा नहीं की गई है। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक चककाजाम या अन्य स्थिति से निपटने के लिए जाप्ता तैयार रखा गया लेकिन दूध, सब्जी जैसी आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने को लेकर किसी तरह की तैयारी की जानकारी नहीं मिल पाई। उधर, बाजार में व्यापारी भी एक-दो दिन में आंदोलन का रूख तय होने की बात कह रहे हैं।

शहरों में दूध व सब्जी की किल्लत होने पर किसान संगठन गांवों में विशेष स्टॉल लगाने की बात कह रहे हैं। राष्ट्रीय किसान महासंघ से जुड़े इंद्रजीतसिंह पन्नीवाली ने बताया कि एक-दो दिन बाद गांवों में स्टॉल लगाकर सब्जी व दूध की बिक्री की जा सकती है ताकि शहरी लोग गांवों में आकर खुद किसानों की दुर्दशा को समझ सकें। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को भी गांव में आकर दूध, सब्जी लेने पर पाबंदी नहीं रहेगी लेकिन गांव से कोई भी कृषि उत्पाद बिकने के लिए शहर नहीं आएगा। पन्नीवाली ने फिलहाल कहीं भी चक्काजाम या अन्य तरीके से विरोध प्रदर्शन की बात से भी इंकार किया है।

हड़ताल से फिलहाल ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं... दो दिन में पूरी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी

1. शहरवासियों के लिए गांव में रहकर सब्जी बेच सकेंगे किसान|हड़ताल के दौरान किसान अपनी सब्जी शहर में नहीं ले जाएंगे। गांव में रहकर ही अपनी सब्जी बेचेंगे। शहरवासी उनके यहां निर्धारित दुकानों से जकर उत्पाद ला सकेंगे।

2. दूध व्रिकेता गांवों के बाहर लगाएंगे स्टालेंे|दूध विक्रेता अस्थायी स्टाल लगाकर अपनी शर्तों व कीमतों पर दूध बेचेंगे। इसके अलावा शहर में सरस व अन्य ब्रांड का पैकिंग दूध भी आता है। लोग ये खरीद सकेंगे। शहर की डेयरियां पहले की तरह चलती रहेंगी। ये दूध बेचते रहेंगे।

3. हड़ताल में दालों और राजमा-चावल का लुत्फ उठाइए|हड़ताल में आप सब्जी नहीं खरीद पा रहे हैं तो आपके पास बढ़िया विकल्प है- दालें, चना, चावल-राजमा तथा किराना की दुकानों पर मिलने वाले सोयाबीन, बड़ी व अन्य घरेलू सब्जी।

फोटो जंक्शन बाजार में रात 9 बजे का है। हालात ये थे कि जंक्शन बाजार में सब्जी रेहड़ियां पर भीड़ लगी रही। गुरुवार को महीने का आिखरी दिन था। इस कारण सब्जी मंडी बंद रही। इससे भी लोगों को काफी परेशानी आई। जो रेहड़ी वाले सब्जी लाए थे, उन्होंने भी मुंहमांगे दामों पर उसे बेचा।

सब्जी विक्रेता अभी असमंजस में, बोले- सही स्थिति मंडी खुलने के बाद पता लगेगी

दूसरे शहरों से आने वाली सब्जियां भी नहीं आने देंगे किसान|सब्जी मंडी के व्यापारियों के मुताबिक अधिकांश जगह से सप्लाई नहीं होने की बात ही सामने आ रही है। सब्जी के होलसेल विक्रेता राजकुमार नानकानी ने बताया कि आम, कैरी, खीरा, प्याज और गोभी व मटर जैसी बेमौसम की सब्जियां हिमाचल प्रदेश से पंजाब व हरियाणा के रास्ते आती हैं। इन राज्यों में आंदोलन तेज रहने की संभावना है। बाकी सब्जियां स्थानीय हैं लेकिन इनकी आपूर्ति पर भी प्रभाव पड़ सकता है। नानकानी ने बताया कि अभी सब सप्लायर्स ने बंद की बात ही कही है लेकिन सही स्थिति शुक्रवार को मंडी खुलने पर ही पता लगेगी। खेती बचाओ किसान बचाओ संघर्ष समिति की ओर से आंदोलन को लेकर ज्ञापन एडीएम को सौंपा गया। प्रतिनिधिमंडल में शामिल इंद्रजीत पन्नीवाली ने बताया कि राष्ट्रीय किसान महासंघ के आह्वान पर सरकार की हठधर्मिता व गलत नीतियों के विरोध में जिले में गांव बंद रखे जाएंगे। इस दौरान किसान दूध, सब्जी व अन्य कृषि उत्पाद बाजार में नहीं लाएंगे। ज्ञापन देने वाले प्रतिनिधिमंडल में सुभाष टाक, नरेंद्र झोरड़, लखवीर सिंह, राजू, प्यारा सिंह, बलदेव सिंह, नेमीचंद, मोहनसिंह राठौड़ सिद्धार्थ झोरड़ आदि शामिल थे।

गंगमूल डेयरी के पास रहता है दो दिन का स्टॉक, हनुमानगढ़ अौर श्रीगंगानगर में यहीं से सप्लाई होता है|किसानों की ओर से आंदोलन की घोषणा और प्रशासन की तरफ से स्थिति स्पष्ट नहीं करने के चलते आमजन में आवश्यक वस्तुओं की किल्लत का भय है। मुख्य समस्या दूध व सब्जी की आपूर्ति को लेकर है। गंगमूल डेयरी से मिली जानकारी के अनुसार दो दिन का स्टॉक उपलब्ध रहता है लेकिन आंदोलन लंबा खिंचता है तो दिक्कतें हो सकती हैं। डेयरी के एमडी पीके गोयल ने बताया कि आंदोलन के संबंध में प्रशासन को पत्र लिखा गया था ताकि गांवों से दूध लाने वाले वाहनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। उन्होंने बताया कि आंदोलन के चलते शुरुआती दिनों में दूध की आवक 20-30 प्रतिशत तक कम होने की आशंका है। अभी डेयरी की ओर से हर राेज 135000 लीटर दूध खरीदा जाता है जबकि खपत 80000 लीटर दूध की है। गोयल ने बताया कि आंदोलन का रूख देखकर दो दिन बाद डेयरी की आवक पर पड़ने वाले प्रभाव का निर्धारण हो पाएगा। एडीएम प्रकाश चौधरी ने बताया कि किसी भी तरह के आंदोलन से निपटने के लिए पर्याप्त जाप्ता है। प्रशासन हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।

दूध

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