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गंगमूल डेयरी के टैंकरों को मिलेगी पुलिस सुरक्षा, डेयरी एमडी बोले- दुग्ध समितियां ही नहीं भिजवा रही हैं दूध, बढ़ेगा संकट

किसान आंदोलन के चलते बाजार की स्थिति बिगड़ती जा रही है। सब्जी के होलसेल व्यापारियों के मुताबिक रविवार को रोजाना के...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 04, 2018, 04:00 AM IST

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    किसान आंदोलन के चलते बाजार की स्थिति बिगड़ती जा रही है। सब्जी के होलसेल व्यापारियों के मुताबिक रविवार को रोजाना के मुकाबले दस प्रतिशत सब्जी ही मंडी में आई। प्राइवेट डेयरियों व सरस बूथ पर भी लोगों को दूध नहीं मिला। गंगमूल डेयरी में लगातार दूसरे दिन एक भी लीटर दूध नहीं पहुंचा। किसान नेताओं की ओर से गांवों में स्टॉल लगाने की बात तो कही जा रही है लेकिन कहीं भी व्यवस्थित तरीके से काम नहीं हो रहा है। इस कारण आमजन को दूध और सब्जी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। खास बात यह है कि किसानों के दबाव के चलते सब्जी के होलसेल रेट गिर रहे हैं वहीं आमजन को रिटेल में सब्जी महंगी मिल रही है। सब्जी के व्यवसाय से जुड़े लोगों ने बताया कि होलसेल मंडी में रेट आधे रह गए हैं वहीं रिटेल में रेट सवा से डेढ़ गुणा तक हो गए हैं।

    दूध व सब्जी की किल्लत को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारी बैठकें कर रहे हैं लेकिन समाधान सामने नहीं आया है। रविवार को कलेक्टर दिनेशचंद जैन ने अधिकारियों की बैठक के दौरान गंगमूल डेयरी के एमडी से दूध लाने वाली गाड़ियों के लिए पुलिस सुरक्षा उपलब्ध करवाने की बात कही। खास बात यह है कि दुग्ध समितियों के द्वारा दूध देने से इंकार के कारण गंगमूल डेयरी के पास दो दिन से एक भी लीटर भी आवक नहीं है। ऐसे में दूध के टैंकरों को सुरक्षा देने की बात भी बेमानी है। बैठक में मौजूद डेयरी के एमडी पीके गोयल ने बताया कि दस दुकानों पर मिल्क पाउडर उपलब्ध करवा दिया गया है। हालांकि कलेक्टर ने रात के समय गांवों से दूध मंगवाने का प्रयास जारी रखने और रात को ही बूथों पर भिजवाने की व्यवस्था के लिए कहा। जिलास्तरीय अधिकारियों की बैठक में कलेक्टर दिनेशचंद जैन ने रेलवे से आलू व प्याज मंगवाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सहकारी उपभोक्ता भंडार पर आलू, प्याज व सूखा दूध उपलब्ध करवाया जाए। डीएसओ को भी सब्जियों व दूध की उपलब्धता पर नजर बनाए रखने व मांग के अनुरूप व्यवस्था करवाने के निर्देश दिए। हालांकि विभागीय अधिकारियों के पास समस्या का कोई ठाेस समाधान नजर नहीं आया।

    दो अनूठे तरीकों से आंदोलन...आमजन से ले रहे समर्थन ताकि सफल हों किसान

    संगरिया: गांव हरिपुरा में किसानों ने 2 क्विंटल दूध का लंगर लगाया, ताकि बेकार न जाए

    हरिपुरा गांव में किसान आंदोलन के तहत किसान नेता सुरेंद्र जाखड़ और युवा किसान नेता बलकौर सिंह ढिल्लो के नेतृत्व में किसानों ने दूध का लंगर लगाया। किसानों ने राहगीरों ओर जरूरतमंद परिवारों को निशुल्क दूध वितरण किया। उनका कहना था कि दूध को सड़क पर व्यर्थ बहाने से अच्छा है कि जरूरतमंद परिवारों को निशुल्क भेंट कर दिया जाए। यही नहीं किसान बोले कि अस्पताल, गुरुद्वारा, मंदिर या जरूरतमंद परिवारों को वितरित कर दिया जाए। हरिपुरा के किसान नेताओं ने दो क्विंटल दूध निशुल्क वितरित किया। इस मौके पर पूर्व उपसरपंच महेंद्र सेवटा, पूर्व वार्ड पंच राधेराम सेवटा आदि मौजूद थे।

    किसान आंदोलन के तहत शेरगढ़ के पास डाला जाएगा पड़ाव: किसान आंदोलन के दौरान दूध व सब्जी के वाहनों को शहर में प्रवेश से रोकने के लिए शेरगढ़ के पास सोमवार से पड़ाव लगाया जाएगा। डीवाईएफआई प्रदेशाध्यक्ष जगजीत सिंह जग्गी व राजकीय एनएम पीजी कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष महेंद्र शर्मा के नेतृत्व में रविवार को भी किसानों ने प्रदर्शन किया। जगजीतसिंह जग्गी ने बताया कि सोमवार से किसान शेरगढ़ के पास ही पड़ाव डालकर बैठेंगे ताकि दूध व सब्जी ले जाने वाले वाहन शहर में प्रवेश न करें। रविवार को प्रदर्शन में मुकेश गोदारा, मोहनलाल लोहरा, बाबू सिंह, बंटी घोटिया आदि मौजूद रहे।

    होलसेल मंडी में सब्जी कम रेट पर बिक रही है। रिटेल में रेट जरूर तेज हो रहे हैं। रिटेल दुकानदार या रेहड़ी वाला रिस्क उठाकर सब्जी बेच रहा है इसलिए मुनाफा भी ज्यादा ले रहा है। वैसे रविवार को सब्जी की आवक सामान्य दिनों की अपेक्षा 10% ही हुई है। रविंद्र शाक्य, होलसेल सब्जी विक्रेता

    जिला प्रशासन को आर्मी के लिए भेजे जाने वाले दूध की गाड़ियों के लिए सुरक्षा की मांग की है। डेयरी के पास दो दिन से एक भी लीटर दूध नहीं आ रहा है। गाड़ियों की सुरक्षा बाद की बात है अभी तो दुग्ध समितियों ने ही दूध देने से मना कर दिया है। पीके गोयल, एमडी, गंगमूल डेयरी

    फेफाना: नाटक के माध्यम से किसानों ने दिया सरकार को संदेश, तंज भी कसे, विरोध जारी

    गांव बरवाली में 10 जून तक किसान आंदोलन में न तो बाजार का सामान खरीदेगा और न ही अपना दूध सब्जी अन्न बेचेगा। गांव की चौपाल में रविवार को क्षेत्रीय कलाकारों रामानंद, गौतम गोविंदा, दयाराम ढिल, बृजमोहन स्वामी, सतपाल स्वामी, किसान मस्तान हुड्डा, पृथ्वी पूनिया, बलराम सहारण, शंकरलाल व मामचंद सहारण आदि ने एक नाटक पेशकर किसान की खून - पसीने की कमाई का उचित हक नहीं मिलने का करारा व्यंग्य करते हुए सरकार को चेताया। इसके बाद गांव के मुख्य चौक में कामरेड बलवान पूनिया ने सभा की। इस मौके पर कृष्ण स्वामी, राजू पुनिया, कृष्ण कस्वां, मांगे राम सहारण, अमीलाल पूनिया आदि मौजूद थे।

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