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किसान आंदाेलन के बीच पुलिस सुरक्षा में खोथांवाली पहुंचे सहकारिता मंत्री, 543 को बांटे ऋण माफी के प्रमाण पत्र

जिले में चार दिन से चल रहे गांव बंद आंदोलन के बीच सहकारिता एवं गोपालन मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री अजयसिंह...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 05, 2018, 04:00 AM IST

किसान आंदाेलन के बीच पुलिस सुरक्षा में खोथांवाली पहुंचे सहकारिता मंत्री, 543 को बांटे ऋण माफी के प्रमाण पत्र
जिले में चार दिन से चल रहे गांव बंद आंदोलन के बीच सहकारिता एवं गोपालन मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री अजयसिंह किलक ने सोमवार को गांव खोथावाली में ग्रामसेवा सहकारी समिति से राजस्थान फसल ऋण माफी योजना 2018 की शुरुआत की। इस दौरान इसी समिति के लगभग 543 किसानों को ऋणमाफी प्रमाण पत्र वितरित किए गए, वहीं हाथों-हाथ दोबारा ऋण जारी कर चेक दिए गए। मंत्री ने सहकारी समिति में किसान भवन तथा मिट्‌टी परीक्षण प्रयोगशाला का भी उद्‌घाटन किया। विधायक द्रोपती मेघवाल ने कहा कि किसानों की मांगों को लेकर जो लोग सड़क पर हैं वे किसान हितैषी नहीं। सब्जी से भरी गरीब की रेहड़ी एवं दूध को सड़क पर पलटा मारना कहां की किसान नीति है। कार्यक्रम में उनके साथ कलेक्टर दिनेश जैन, भाजपा जिलाध्यक्ष बलवीर बिश्नोई, पीलीबंगा विधायक द्रोपती मेघवाल, एचकेएसबी के चेयरमैन महेंद्र पूनियां, एडीएम प्रकाश चौधरी, सीईओ भंवरलाल मेघवाल, बीडीओ दिनेश मिश्रा, एचकेएसबी बैंक के एमडी भूपेन्द्रसिंह ज्याणी, सरपंच राजेन्द्र थोरी, ग्राम सेवा के चेयरमैन जगसीरसिंह मौजूद थे। वहीं विधायक द्रोपती मेघवाल ने राजस्थान ऋणमाफी योजना की शुरुआत पीलीबंगा विधानसभा से शुरू करने पर मुख्यमंत्री का धन्यवाद ज्ञापित किया।

भाजपा कार्यकर्ताओं से हुए रूबरू: रीति-नीति पर चर्चा की

जिला प्रभारी मंत्री अजयसिंह किलक एवं विधायक द्रोपती मेघवाल सोमवार को एक कॉम्पलैक्स में भाजपा कार्यकर्ताओं से रूबरू हुए। इस दौरान पार्टी की रीति- नीति पर चर्चा हुई। वरिष्ठ भाजपा नेता सरपंच किरण जगा ने प्रभारी मंत्री को निवादान पंचायत की समस्याओं से अवगत करवाया। इस दौरान बालिका स्कूल में विज्ञान विषय की मांग रखी। इसको लेकर ज्ञापन सौंपा गया। विधायक ने कार्यकर्ताओं को पार्टी की रीढ़ की हड्डी बताया। इस दौरान बीएलए प्रभारी गिरधारीलाल मक्कड़, राजू सेठी, राकेश चौहान, प्रेम सारस्वत, विनोद मेघवाल, शिवर| नाई, दीपक शर्मा आदि मौजूद थे।

भास्कर ने पूछा: सड़क पर बैठे किसानों का दर्द कौन सुनेगा? मंत्री पहले तो बोले नहीं, दुबारा पूछा तो कहा-मेरे पास कोई नहीं आया

भास्कर के सवाल कि जो किसान सड़क पर हैं उनका दर्द कौन सुनेगा। इस पर मंत्री जी चुप्पी साध गए। दोबारा पूछने पर उन्होंने कहा कि मेरे पास तो कोई आया नहीं। जबकि प्रभारी मंत्री के हनुमानगढ़ से खोथांवाली जाते समय खाराचक, गोलूवाला, पक्कासारणा सहित कई जगहों पर लोग पड़ाव डाले बैठे थे। खाराचक में लोगों ने बीच में पेड़ डाल रखे थे लेकिन काफिले की गाड़ियां बीच में से ही निकल गई। इनका दर्द वहीं का वहीं रह गया।

किसान कहीं मंत्री का रास्ता न रोक लें, इसलिए डीएसपी रहे पूरे रास्ते में

प्रभारी मंत्री को खोथांवाली तक ले जाने में पुलिस की सांसें फूली रही। कई जगहों पर लोगों के सड़कों पर बैठे होने के चलते पुलिस को डर था कि कहीं विवाद की स्थिति उत्पन्न नहीं हो जाए लेकिन कार्यक्रम शांति से निपट गया। एहतियात के तौर पर एससीएसटी के सीओ भंवरलाल स्वयं काफिले के साथ नजर बनाए हुए थे।

आज दुलमाना में ऋण माफी का शिविर: सहकारिता एवं जिला प्रभारी मंत्री अजयसिंह किलक मंगलवार को दुलमाना में ऋण माफी शिविर में किसानों को प्रमाण पत्र वितरित करेंगे। सुबह साढ़े दस बजे दुलमाना ग्राम सेवा सहकारी समिति में आयोजित शिविर के दौरान ऋण माफी प्रमाण पत्र वितरित किए जाएंगे।

ऋण माफी योजना के यह 6 फायदे: जिलेभर में 1 लाख किसानों के 248 करोड़ रुपए माफ होंगे खोथावांली में 543 किसानों का ऋणमाफी का लाभ मिला।

जिले में कुल एक लाख किसानों की दो सौ अड़तालीस करोड़ की रकम माफ होगी।

पूरे प्रदेश में यह रकम आठ हजार करोड़ की है। यहां 29 लाख किसान फायदा लेंगे।

डिफाल्टर एवं सही किश्त जमा करवाने वाले दोनों को फायदा।

ऋणमाफी के बाद दोबारा फिर से ऋण मिलेगा।

माफ होने वाली यहां की राशि एक करोड़ से ऊपर है। जिसकाे किसानों को सीधे फायदे।

गोलूवाला. शिविर में ऋण माफी के प्रमाण-पत्र बांटते मंत्री व अन्य जनप्रतिनिधि।

ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं

समितियों की राशि माफ हुई है न कि बैंकों का लोन, वह कर्ज तो अभी बरकरार है

इस ऋणमाफी योजना का उद्‌घाटन कर सत्ता में वापस लौटने की चाहत रखने वाली भाजपा के जनप्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों ने इस योजना के प्लेटफार्म को पूरा भुनाने की कोशिश की लेकिन इस संबंध में जानकारी रखने वाले विशेषज्ञों का कहना था कि इस योजना से किसानों की माली हालत नहीं सुधरने वाली। क्यों यह वह राशि है जो केवल समितियों में माफ की गई है। जबकि किसान अन्य बैंकों में करोड़ों रुपए के बोझ तले दबा पड़ा है। इसके गणित को समझा जाए तो खोथांवाली के लेवल पर बात करें तो 543 किसानों का एक करोड़ रुपया माफ किया गया है, जो प्रति व्यक्ति औसत 20 हजार रुपए बैठता है। कहीं यह राशि वास्तव में कम भी है कहीं ज्यादा भी। औसत पर बात करें तो बीस हजार की राशि से किसान के जख्मों पर मरहम से घाव नहीं धोए जा सकते जबकि कर्ज का बोझ लाखों में है।

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