हनुमानगढ़

  • Hindi News
  • Rajasthan News
  • Hanumangarh News
  • अस्पताल के पालना गृह में परिजन छोड़ गए 2 साल की बच्ची, आशंका- उठ-बैठ नहीं सकती, इसलिए छोड़ा
--Advertisement--

अस्पताल के पालना गृह में परिजन छोड़ गए 2 साल की बच्ची, आशंका- उठ-बैठ नहीं सकती, इसलिए छोड़ा

हनुमानगढ़. जिला अस्पताल में भर्ती 2 साल की सेरेब्रल पॉल्सी से पीड़ित बच्ची। हनुमानगढ़ प्रदेश का संभवत: पहला...

Dainik Bhaskar

Jun 05, 2018, 04:00 AM IST
अस्पताल के पालना गृह में परिजन छोड़ गए 2 साल की बच्ची, आशंका- उठ-बैठ नहीं सकती, इसलिए छोड़ा
हनुमानगढ़. जिला अस्पताल में भर्ती 2 साल की सेरेब्रल पॉल्सी से पीड़ित बच्ची।

हनुमानगढ़ प्रदेश का संभवत: पहला अस्पताल, जहां दो बच्चियां आईं

भास्कर संवाददाता|हनुमानगढ़

अनचाहे नवजात शिशु को आश्रय के उद्देश्य से बनाए गए पालना गृह में लोग बीमार बच्चों को डाल रहे हैं। जिला अस्पताल में सोमवार को इस तरह का दूसरा मामला सामने आया। संभवतया प्रदेश में हनुमानगढ़ में ही इस तरह का यह दूसरा मामला है जब दो वर्षीय बच्ची को उसके परिजन पालना गृह में छोड़कर चले गए। खास बात है कि पालना गृह इसलिए बनाया गया था कि लोग अनचाहे शिशु को लोग झाड़ियों में नहीं फेंकें। ऐसे में दो साल तक मां के आंचल में लिपटी रही लक्ष्मी जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में मां के दुलार का इंतजार कर रही है। डॉक्टर्स का कहना है कि बच्ची सेरेब्रल पॉल्सी से पीड़ित है। ऐसे में माना जा रहा है कि इसी कारण परिजन बच्ची को पालना गृह में छोड़ गए।

डॉक्टर्स ने बेहतर उपचार हो इसलिए उसे 24 घंटे में हायर सेंटर रेफर किए जाने की सिफारिश की गई है। जिला अस्पताल के पालना गृह में बच्चा छोड़कर जाने का यह दूसरा मामला है। जानकारी के अनुसार सोमवार सुबह दस बजकर 25 मिनट पर पालना गृह का अलार्म बजा तो उसमें से बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। इस पर स्टाफ ने पालना गृह के पास पहुंचकर देखा तो उसमें एक बच्चा नजर आया। पालना गृह का ताला खुलवाकर बच्चे को बाहर निकलवाया और पीएमओ को सूचना दी। इससे पहले स्टाफ ने जेएसवाई वार्ड में जाकर वहां भर्ती प्रसूताओं एवं उनके परिजनों से पालना गृह से मिले बच्ची के बारे में पूछा लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। इसके बाद शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. एनएल आसेरी, डॉ. केखान गौरी आदि ने बच्चे की जांच कर डी- वार्ड में भर्ती कर उसका उपचार शुरू किया।

समुचित देखभाल में बच्चा खुद उठ-बैठ सकने की स्थिति में आने की उम्मीद

प्रमस्तिष्क पक्षाघात’ या “सेरेब्रल पाल्सी एक जटिल, अप्रगतिशील अवस्था है जो जीवन के प्रथम तीन वर्षों मे हुई मस्तिष्कीय क्षति के कारण होती है जिसके फलस्वरूप मांसपेशियों में सामंजस्य न होने के कारण तथा कमजोरी से अपंगता होती है।”यह एक प्रमस्तिष्क संबंधी विकार है। यह विकार विकसित होते मस्तिष्क के मोटर कंट्रोल सेंटर (संचलन नियंत्रण केंद्र) मे हुई किसी क्षति के कारण होता है। यह बीमारी मुख्यत: गर्भधारण (75 प्रतिशत), बच्चे के जन्म के समय (लगभग 5 प्रतिशत) और तीन वर्ष तक की आयु के बच्चों को होती है। सेरेब्रल पाल्सी पर अभी शोध चल रहा है, क्योंकि वर्तमान उपलब्ध शोध सिर्फ बाल्य (पीडियाट्रिक) रोगियों पर केंद्रित है। इस बीमारी की वजह से संचार में समस्या, संवेदना, पूर्व धारणा, वस्तुओं को पहचानना और अन्य व्यवहारिक समस्याएं आती है। सेरेब्रल पॉल्सी का मुख्य कारण गर्भावस्था के दौरान मां को संक्रमण, मां व बच्चे के रक्त समूह (ब्लड ग्रुप) का न मिलना, मां के गर्भ में बच्चे का अस्वाभाविक अनुवांशिक विकास व नवजात शिशु का पीलिया या अन्य किसी संक्रमण से ग्रस्त होना आदि हैं। बच्चे के पैदा होते ही सांस नहीं आना भी इसका कारण हो सकता है। बच्चे को हायर सेंटर पर रेफर किए जाने से समुचित देखभाल होने पर बच्चा खुद उठ-बैठ सकने की स्थिति में आने की उम्मीद है।

बाय इन्विटेशन

डॉ. एनएल आसेरी, शिशु रोग विशेषज्ञ

उपनियंत्रक बोले- बाल कल्याण समिति और प्रशासन को दी सूचना : उपनियंत्रक डॉ. दीपकमित्र सैनी का कहना है कि अस्पताल प्रशासन की ओर से दो साल की बच्ची पालना स्थल पर मिलने के बाद बाल जिला प्रशासन, कल्याण समिति और पुलिस को तत्काल सूचना दे दी गई। इससे पहले बच्ची की आवश्यक जांचें कराकर बच्चा वार्ड में भर्ती कराया गया। केयर टेकर और नर्सिंग स्टाफ बच्ची की देखभाल कर रहा है।

X
अस्पताल के पालना गृह में परिजन छोड़ गए 2 साल की बच्ची, आशंका- उठ-बैठ नहीं सकती, इसलिए छोड़ा
Click to listen..