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किसान बढ़ाने की मांग कर रहे थे, बीबीएमबी ने 3950 से घटा आईजीएनपी में 3000 क्यू. पानी मंजूर किया, सिंचाई पर संकट

भाखड़ा, पौंग और रणजीतसागर बांधों में गिरते जलस्तर और कम आवक के चलते प्रदेश के लिए जलसंकट की स्थिति बनने लगी है।...

Danik Bhaskar | May 30, 2018, 04:20 AM IST
भाखड़ा, पौंग और रणजीतसागर बांधों में गिरते जलस्तर और कम आवक के चलते प्रदेश के लिए जलसंकट की स्थिति बनने लगी है। मंगलवार को चंडीगढ़ में हुई बीबीएमबी की बैठक में ऐसी ही तस्वीर सामने आई है। इस बार बैठक में प्रदेश के हिस्से का पानी और कम हो गया है। बैठक में तय हिस्से के अनुसार अब आईजीएनपी में सिर्फ 3000 क्यूसेक पानी ही दिया जाएगा। बैठक में शामिल होने के लिए चंडीगढ़ गए जलसंसाधन विभाग के मुख्य अभियंता केएल जाखड़ ने बताया कि प्रदेश को 6050 क्यूसेक पानी आबंटित हुआ है। इसमें से 1600 क्यूसेक पानी गंगकैनाल, 1200 क्यूसेक भाखड़ा व 250 क्यूसेक खारा के लिए दिया जाएगा। बाकी बचा हुआ 3000 क्यूसेक पानी आईजीएनपी में चलेगा। गौरतलब है कि पहले आईजीएनपी में 3950 क्यूसेक पानी दिया जा रहा था लेकिन अब इसकी मात्रा कम हो गई है। ऐसे हालात में आईजीएनपी सिंचित क्षेत्र में सिंचाई पानी की उम्मीद ही नजर नहीं आ रही है।

बीबीएमबी की बैठक में दस जून तक के लिए तय हुआ प्रदेश के हिस्से का पानी

कारण- पहाड़ों में नहीं पिघल रही बर्फ, इसलिए घटा पानी

इस साल जहां प्रदेश में भीषण गर्मी पड़ रही है वहीं पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम अप्रत्याशित रूप से ठंडा है। जानकारी के मुताबिक ग्लेशियर वाले क्षेत्रों में अभी तापमान आठ-नौ डिग्री के आसपास ही बना हुआ है जबकि बर्फ पिघलने के लिए तापमान 16 डिग्री के करीब होना चाहिए। इस वजह से नदियों में पानी की आवक कम हो रही है। स्थिति यह है कि अधिकांश बांधों में जलस्तर कम होने के बावजूद आवक से अधिक निकासी हो रही है। यही वजह है कि पानी के संकट की स्थितियां बन रही हैं। इससे भी गंभीर बात यह है कि निकट भविष्य में भी कोई स्थिति में बदलाव की उम्मीद नहीं है।