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81.73% बच्चे पास; गणित व विज्ञान ने ऐसी बिगाड़ी मिस्ट्री कि 0.80% गिरा हनुमानगढ़ का परिणाम, रैंकिंग में भी 5 से 9वें पायदान पर पहुंचा

मिशन मेरिट जैसे अभियान शुरू न होने के कारण स्टूडेंट्स और स्टाफ में उत्साह की कमी इस साल के बोर्ड परीक्षा परिणाम...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 12, 2018, 04:20 AM IST

  • 81.73% बच्चे पास; गणित व विज्ञान ने ऐसी बिगाड़ी मिस्ट्री कि 0.80% गिरा हनुमानगढ़ का परिणाम, रैंकिंग में भी 5 से 9वें पायदान पर पहुंचा
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    मिशन मेरिट जैसे अभियान शुरू न होने के कारण स्टूडेंट्स और स्टाफ में उत्साह की कमी इस साल के बोर्ड परीक्षा परिणाम में नजर आ रही है। 12वीं के बाद हनुमानगढ़ का कमजोर प्रदर्शन दसवीं बोर्ड परीक्षा में भी जारी रहा। इस साल हनुमानगढ़ का दसवीं क्लास का रिजल्ट 81.73 प्रतिशत रहा। पिछले साल के मुकाबले जिले के रिजल्ट में 0.80 प्रतिशत की कमी आई है। इसके चलते प्रदेश में जिले की रैंकिंग पांचवें स्थान से गिरकर नौवें स्थान पर पहुंच गई। इससे पहले 12वीं क्लास का रिजल्ट भी पिछले साल के मुकाबले कम रहा था। 2014-15 में जिले का रिजल्ट 83 प्रतिशत तक पहुंच गया था। इससे पहले 2014-15 में जिले के 83 प्रतिशत बच्चे पास हुए थे। इसके बाद लगातार रिजल्ट गिरा और पिछले साल कुछ बेहतर हुआ था लेकिन अब फिर से जिले का रिजल्ट पहले से कम हो गया है।

    एक्सपर्ट व्यू

    11वीं क्लास में विषय चयन करते समय अंक प्रतिशत की बजाय अपनी रूचि पर ध्यान दें

    मोहनलाल स्वामी, रिटा. संयुक्त निदेशक, माध्यमिक शिक्षा

    दसवीं के बाद ही बच्चों के कैरियर की दिशा तय होती है। सबसे पहली बात यह है कि कम अंक हासिल करने वाले बच्चे भी निराश न हों। अभी मिले अंक उनका भविष्य तय नहीं करते हैं। 11वीं क्लास में विषय चयन करते समय भी अंक प्रतिशत की बजाय अपनी रूचि पर ध्यान दें। जरूरी नहीं है कि सभी टॉपर्स साइंस का ही चयन करें। कोई बच्चा प्रशासनिक या न्यायिक सेवा में जाना चाहता है तो आर्टस बेहतर विकल्प है। डॉक्टर, इंजीनियर, सीए जैसे व्यवसायों के लिए बच्चे प्रयास करते ही हैं लेकिन इनसे इतर विषयों के बारे में भी सोचना चाहिए। आज बहुत से ऐसे कैरियर ऑप्शन उपलब्ध हैं जिनमें 10वीं या 12वीं के अंकों की बजाय कार्यकुशलता अधिक मायने रखती है। संक्षेप में कहें तो बच्चे अंक व परिवार या समाज के दबाव में नहीं बल्कि अपनी रूचि के अनुसार विषय लें।

    इन होनहारों की कहानियां पढ़िए

    तनुश्री, 96.50% रावतसर

    माता-पिता ज्यादा नहीं पढ़े, पर पढ़ने को प्रेरित किया, अब टॉपर

    गांव रामपुरा मटोरिया निवासी किसान विजयसिंह राठौड़ की बेटी तनुश्री ने 96.50 प्रतिशत अंक हासिल कर शहरी बच्चों को पीछे छोड़ दिया है। अभी सीकर में आईआईटी के लिए तैयारी कर रही तनुश्री ने बताया कि पिता विजयसिंह राठौड़ किसान हैं और माता विजयलक्ष्मी गृहिणी हैं। ज्यादा पढ़े लिखे भले ही न हो लेकिन हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। तनुश्री ने बताया कि सफलता के लिए मेहनत तो खूब करनी पड़ती है। कुछ दिन तो ऐसे होते थे जब सिर्फ पांच घंटे ही सोती थी। बाकी पूरा समय पढ़ाई पर ही ध्यान केंद्रित किया। अब यही मेहनत करके आईआईटी का एंट्रेंस एग्जाम भी क्लियर करना है।

    सुशील कुमार 95.67% हनुमानगढ़

    कई बच्चे तमाम सुविधाओं के बावजूद पिछड़ जाते हैं वहीं कुछ जिंदगी की दुश्वारियों को झेलकर भी आगे बढ़ते हैं। टाउन के आदर्श विद्या मंदिर माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने वाले सुशील कुमार ने अपने िपता की घर में ही बनी छोटी सी बेकरी में हाथ बंटाकर भी 95.67 प्रतिशत अंक हासिल किए। बच्चे के पिता कुलदीप मंडल ने बताया कि दोनों बड़े बेटे भी पढ़ाई में होशियार हैं। बड़ा बीएससी कर रहा है और छोटे ने हाल ही में जेईई मेंस परीक्षा पास की है। ऐसे में सुशील को ही बेकरी के काम में हाथ बंटाना पड़ रहा था। स्कूल के बाद सुशील को सिर्फ तीन घंटे ही पढ़ने का मौका मिलता था। बाकी समय बेकरी का काम करवाता था। इसके बावजूद इतने अच्छे नंबर आए हैं तो खुशी की सीमा नहीं है। सुशील ने बताया कि अब मेडिकल सकांय से 12वीं क्लास पास कर नीट का एंट्रेस क्लियर करने का लक्ष्य है। कोशिश करूंगा कि एम्स या किसी अन्य बड़े मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिले। सुशील की सफलता से उनकी माता अनिता देवी भी बेहद खुश नजर आई। उन्होंने कहा कि बेटे को बेहतर सुविधाएं मिलती तो शायद प्रदेश में सबसे अधिक अंक ला पाता।

    िजले का रिजल्ट कम होने की बड़ी वजह, गणित व सामाजिक विज्ञान के कठिन पेपर ने बिगाड़ा सब

    1. प्रदेश के कई जिलों में रिजल्ट गिरा है। इसकी बड़ी वजह बच्चों को आठवीं तक फेल न करने की पॉलिसी भी है। इसका परिणाम आने वाले सालों में ज्यादा गंभीर तरीके से नजर आ सकता है।

    2. गणित, अंग्रेजी व विज्ञान जैसे विषयों में बच्चों के अंक कम आए हैं। यह तीनों मार्क्स सिक्योरिंग सब्जेक्ट हैं लेकिन बेस मजबूत न हो तो रिजल्ट बिगड़ता है। यह बात इस परिणाम में नजर आई है।

    3. सीबीएसई अंक देने में उदार नजर आता है वहीं राजस्थान बोर्ड ने अंक देने में कुछ सख्ती की है। इस बार गणित व सामाजिक विज्ञान का पेपर भी कुछ मुश्किल रहा था।

    4. सरकारी स्कूलों का पास प्रतिशत बेहतर बताया जा रहा है लेकिन मिशन मेरिट जैसे बड़े अभियान न होने के कारण पिछले साल जैसा उत्साह का माहौल नहीं बना।हरिकृष्ण आर्य, राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित

    सुबह स्कूल जाता, फिर पिता के साथ बेकरी में बिस्किट बनाता, महज तीन घंटे पढ़ता चौथी रैंक आने पर सुशील बोला- नीट पास कर डॉक्टर बनूंगा, परिजनों को सुख दूंगा

    परिणाम गिरने का गम भूल जाएंगे, आपको भी इन पर नाज होगा

    प्रतीक, 96.33% भादरा

    दूसरा स्थान, पूरा परिवार हैरान, बेटे के इतने नंबर कैसे आ गए

    घर के परिस्थितियों के चलते पिता महज दसवीं तक पढ़े तो माता भी पांचवी तक पढ़ी लेकिन बेटे प्रतीक सोनी ने 96. 33 प्रतिशत अंक हासिल किए। छोटी सी किरयाना की दुकान करने वाले पिता वेदप्रकाश बताते हैं कि दुकान से ही परिवार का गुजर बसर चलता है लेकिन बेटा इतने नंबर लाएगा यह उम्मीद नहीं थी। मां नीतू हमेशा बेटे को पढ़ लिखकर आगे पढ़ने के लिए प्रेरित करती थी। उसी की बदौलत प्रतीक ने भिरानी के राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय में पढ़ते हुए यह मुकाम हासिल किया है। प्रतीक का जिले में दूसरा स्थान आया है। प्रतीक भविष्य में इंजीनियर बनना चाहता है।

    फोटो|पंकज मिश्रा

    मानसी, 95.83% पीलीबंगा

    18 किमी स्कूल आती-जाती, घर में मां का हाथ बंटाती, तीसरी रैंक

    18 किमी प्रतिदिन बस में आना-जाना और घर के काम में मां के साथ हाथ बंटाना। फिर जब समय निकाला तो सेल्फ स्टडी करना। परिणाम 95.83 प्रतिशत अंक लेकर पीलीबंगा तहसील की टॉपर बन गई। छोटे से गांव लखासर के किसान पृथ्वीराज बिश्नोई की बेटी मानसी पर परिजनों को नाज है। प्रतिदिन नियमित रूप से चार से पांच घंटे पढ़ाई करती थीं। अब यह किसान की बेटी साइंस लेकर भविष्य में डॉक्टर बनना चाहती है। वहीं उसका बैडमिंटन खेलने का भी शौक है। मानसी ने बताया कि उसकी माता राधा रानी पीलीबंगा कस्बे के राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में व्याख्याता हैं।

    भास्कर एनालिसिस

    10वीं बोर्ड

    पिछली बार से इस बार0.80% घटा रिजल्ट

    28625

    स्टूडेंट परीक्षा में बैठे

    सैकंड डिवीजन

    10515

    छात्राएं

    छात्र

    13208

    परीक्षा में बैठी

    फर्स्ट डिवीजन 4988

    सैकंड डिवीजन 5107

    थर्ड डिवीजन 1087

    बेटियों का जिलेभर का परिणाम

    83.95 %

    4 साल में 14.53% बढ़ा परिणाम था, इस बार घटा

    68%

    2014

    2014

    2018

    81.73%

    इस बार भी बेटियां आगे|दसवीं के रिजल्ट में भी बेटियों ने लड़कों को पीछे छोड़ दिया है। कुल 83.95 प्रतिशत लड़कियां पास हुई वहीं लड़कों का पास प्रतिशत 79.86 प्रतिशत रहा। कुल संख्या में काफी अंतर होने के बावजूद फर्स्ट डिवीजन हासिल करने वाले लड़कियों की संख्या अधिक है। जिले में 5233 लड़कियों ने फर्स्ट डिवीजन हासिल की है वहीं फर्स्ट डिवीजन में आने वाले लड़कों की संख्या 4654 ही है।

    बारहवीं के बाद अब दसवीं के परिणाम में भी गिरावट, पिछले साल दसवीं का परिणाम था 82.53 फीसदी

    छात्र 15552

    कुल उत्तीर्ण 23395

    थर्ड डिवीजन

    83%

    2015

    फर्स्ट डिवीजन

    15552

    परीक्षा में बैठे

    फर्स्ट डिवीजन 4654

    सैकंड डिवीजन 5847

    थर्ड डिवीजन 1822

    छात्रों का जिलेभर का परिणाम

    79.86 %

    78.48%

    2016

    2017

    82.53%

    छात्राएं 13073

    जिले का प्रतिशत

    81.73

    82.53%

    81.73%

    2017

    2018

    2018

  • 81.73% बच्चे पास; गणित व विज्ञान ने ऐसी बिगाड़ी मिस्ट्री कि 0.80% गिरा हनुमानगढ़ का परिणाम, रैंकिंग में भी 5 से 9वें पायदान पर पहुंचा
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