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एक दिन में खरीदी जाएगी 40 क्विंटल ही सरसों, अधिकतम खरीद की सीमा पर 10 क्विंटल की कटौती से किसानों की बढ़ी परेशानी

समर्थन मूल्य पर सरसों की खरीद नियमों में उलझकर रह गई है। राज्य सरकार राहत के नाम पर नए नियम बनाती है और यही नियम...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 04:50 AM IST

समर्थन मूल्य पर सरसों की खरीद नियमों में उलझकर रह गई है। राज्य सरकार राहत के नाम पर नए नियम बनाती है और यही नियम किसानों के लिए परेशानी का सबब बन जाते हैं। ई मित्र के माध्यम से जारी हुए टोकन पर 25 क्विंटल सरसों बेच चुके किसान सोमवार को बची हुई जिंस मंडी में बेचने अाए तो कंप्यूटर सिस्टम से पर्ची ही नहीं निकली। हालांकि पहले यह कहा गया था कि किसान एक दिन में अधिकतम 25 क्विंटल सरसों बेचने के बाद बाकी की सरसों दोबारा मंडी में ला सकता है। सोमवार को किसान सरसों लेकर मंडी में बैठे रहे लेकिन पूरा दिन कोई सुनवाई नहीं हुई। देर शाम राज्य सरकार की ओर से खरीद के संबंध में नए नियम जारी किए गए। इसके तहत अब किसान से एक ही दिन में 40 क्विंटल सरसों समर्थन मूल्य पर खरीदी जाएगी। उसे दोबारा मंडी में आने की जरूरत नहीं होगी। वहीं पहले 25 क्विंटल सरसों खरीद एजेंसी को बेच चुके किसानों को 15 क्विंटल सरसों बेचने के लिए 18 अप्रैल तक का समय दिया गया है। खास बात यह है कि नए नियम जारी होने के बाद अगले दो दिन मंडी में सरसों की ढेरियां लग सकती हैं और उधर, खरीद एजेंसी के पास पर्याप्त बारदाना ही उपलब्ध नहीं है।

पहले 25-25 क्विंटल सरसों बेचने का था नियम, अब संशोधन

राज्य सरकार की ओर से एक दिन में 25 क्विंटल की बजाय 40 क्विंटल सरसों की खरीद के नियम को किसान के हित में बताया जा रहा है। हालांकि इसके फायदे बताते हुए यह बात िछपा ली गई कि पहले किसान दो बार 25-25 क्विंटल सरसों लाकर बेच सकता था लेकिन अब 40 क्विंटल से अधिक सरसों समर्थन मूल्य पर नहीं बेच पाएगा। उधर, 50 की बजाय 40 क्विंटल की अधिकतम खरीद का नया नियम थोपकर इस फायदे से किसान को महरूम भी कर दिया गया। अब सरकार की ओर से तय औसत उत्पादन के आधार पर भी किसान अधिकतम सात बीघा की उपज ही समर्थन मूल्य पर बेच पाएगा। 40 क्विंटल से अधिक उत्पादन होने पर बाकी की सरसों बाजार भाव पर ही बेचनी पड़ेगी जोकि अभी समर्थन मूल्य से करीब 500 रुपए प्रति क्विंटल नीचे चल रहा है। उधर, हनुमानगढ़ जिले को लेकर एक और नियम में बदलाव हुआ है। जिले में सरसों का प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादन 20 क्विंटल 97 किलोग्राम से बढ़ाकर 22 क्विंटल 10 किलोग्राम कर दिया गया है। किसान इसकी मांग लंबे समय से कर रहे थे।

प्रबंधक बोले-जहां बैग खत्म, वहां पुराने भिजवाए गए है

क्रय विक्रय सहकारी समिति के प्रबंधक बृजलाल जांगू ने बताया कि टाउन में सरसों की पैकिंग के लिए 2000 बैग हैं। आज जंक्शन में बैग खत्म हो गए थे। वहां एक बार पुराने बैग भिजवाए गए हैं। इनके भंडारण को लेकर दिक्कत आती है। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया गया है।

किसान बोले-आर्थिक व मानसिक दोनों नुकसान

किसान हंसराज बिस्सू ने बताया कि मैं सोमवार को मंडी में दुबारा सरसों लेकर आ था लेकिन कंप्यूटर से पर्ची नहीं निकलने के कारण खरीद नहीं हो पाई। अब दुबारा मंडी में आना पड़ेगा या कम भाव पर सरसों बेचनी पड़ेगी। जिससे मेरे समय के साथ आर्थिक नुकसान हो रहा है। अब परेशानी लेकर किसी के पास जाए।

परेशानी: जंक्शन में बारदाना समाप्त, टाउन में बचे हैं महज 2000 बैग

सरसों की खरीद में बारदाने की किल्लत भी परेशानी का सबब बनी हुई है। सोमवार को जंक्शन में बारदाना बिलकुल समाप्त हो गया। अब क्रय-विक्रय सहकारी समिति की ओर से खरीद के लिए पुराने बैग जंक्शन भिजवाए गए हैं। यह बैग सौ किलोग्राम के हैं जबकि एक बैग में 50 किलोग्राम सरसों ही भरी जानी है। बैगों का भंडारण करने वाली एजेंसी पहले ही स्टाकिंग की दिक्कत के कारण 100 किलोग्राम के बैगों में पैक सरसों लेने से मना कर चुकी है। ऐसे में मंगलवार को जंक्शन धान मंडी में होने वाली सरसों के भंडारण में फिर से दिक्कत आने की आशंका है। उधर, टाउन में भी सिर्फ 2000 बैग ही बाकी बचे हैं। 25 क्विंटल सरसों बेच चुके किसान अपनी बची हुई 15-15 क्विंटल सरसों बेचने के लिए अगले दो दिन मंडी में आते हैं तो बारदाने की बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी।

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