रोडवेज से रिटायर्ड 125 कर्मचारियों को ग्रेच्युटी मिली न ओवरटाइम का भुगतान, 1.25 करोड़ रुपए बकाया

Hanumangarh News - केस 1. कर्मचारी राजाराम गौतम दो वर्ष पूर्व नवबंर 2017 में रोडवेज से सेवानिवृत्त हुए। गौतम आज भी ग्रेच्यूटी की राशि,...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 07:33 AM IST
Bhadra News - rajasthan news 125 employees retired from roadways gratuity not paid overtime rs 125 crore outstanding
केस 1. कर्मचारी राजाराम गौतम दो वर्ष पूर्व नवबंर 2017 में रोडवेज से सेवानिवृत्त हुए। गौतम आज भी ग्रेच्यूटी की राशि, छुट्टियों का बकाया, ओवर टाइम की राशि सहित 14 लाख रुपए मिलने का इंतजार कर रहे हैं। सरकार देय राशि का भुगतान नहीं कर रही। गौतम पर परिवार की जिम्मेदारियां हैं, ऐसे में उन्हें हमेशा चिंता सताती रहती है। हाईकोर्ट से केस भी जीत चुके है। मगर कोई सुनवाई नहीं हुई।

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सेवानिवृत कर्मचारी बोले...अब तक उम्मीद अधूरी, करीब डेढ़ करोड़ रुपए का अटका भुगतान

कर्मचारी भुगतान समेत अन्य मांगों को लेकर धरना व प्रदर्शन कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई फायदा नहीं हुआ है। कर्मचारियों को वर्तमान सरकार से काफी उम्मीद थी, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ है।

सेवानिवृत कर्मचारियों ने बताया कि रिटायर्ड कर्मचारियों का पांचवें व छठे वेतन आयोग का एरियर, ग्रेच्युटी का पैसा, अवकाश, ओवरटाइम समेत अन्य भुगतान बकाया चल रहा है। यह राशि करीब डेढ़ करोड़ रुपए है।

आंकड़े जो बताते हैं : जानकारी के अनुसार जिलेभर में करीब सवा सौ से ज्यादा कर्मचारी रिटायर्ड है, जिनका भुगतान बाकी है। वहीं अगर प्रदेशभर की बात करें, तो करीब साढ़े तीन हजार सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं, जिन्हें बकाया भुगतान का इंतजार है। किसी के पीएफ की राशि अटकी है, तो किसी की ग्रेच्युटी। कोई अवकाश की राशि का इंतजार कर रहा है।

कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों के अनुसार कर्मचारियों को पेंशन तो मिलना शुरू हो गया, लेकिन पांचवें व छठे वेतनमान का लाभ, ग्रेच्युटी तथा बकाया छुट्टियों की राशि नहीं मिली है।

रोडवेज डिपो में 77 कंडक्टरों की कमी, 20 चालकों से कटवा रहे टिकटें, नतीजा 4 हजार किलोमीटर के रूट और छह से ज्यादा मार्गों पर बसों का आवागमन बंद

हनुमानगढ़| जिले के रोडवेज डिपो में ड्राइवर व कंडक्टरों की कमी के चलते रोडवेज की पांच बसों का संचालन बंद हो गया है। यही नहीं कई रूट पर बसों की संख्या भी कम कर दी गई है। दरअसल, रोडवेज डिपो में 77 परिचालकों की कमी है। ऐसे में 20 ड्राइवर बस चलाने का काम करने के साथ बसों में यात्रियों की टिकटें भी काट रहे हैं। वहीं रोडवेज के 4 हजार किलोमीटर के रूट और पांच बसों का संचालन बंद हो गया है। इससे रोडवेज को एक महीने के भीतर 60 लाख का नुकसान हो रहा है। बड़ी बात ये है कि बसों का संचालन नहीं होने से ग्रामीण क्षेत्रों के भी लोग परेशान हो रहे हैं। हालांकि डिपो में चालकों की भी कमी चल रही है मगर चालकों की पूर्ति संविदा पर लगे चालक पूरी कर देते हैं। ऐसे में कंडक्टरों के पद खाली होने से ज्यादा दिक्कत होती है। इसके अलावा ऑफिस में बाबूओं की भी कमी चल रही है। रोडवेज सूत्रों ने बताया कि डिपो से कुछ कर्मचारियों को डेपुटेशन पर इधर उधर लगा रखा है।

ये रूट हो रहे है प्रभावित : रोडवेज अधिकारियों के मुताबिक पदमपुर, नोहर, भादरा, रावतसर, सूरतगढ़, श्रीगंगानगर, अबोहर आदि मार्गों पर रोडवेज बसों का संचालन नहीं होने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। क्योंकि कंडक्टरों की कमी के चलते बसों के रूट कम कर दिए गए हैं। जबकि रोडवेज को रोजाना का 45 हजार किलोमीटर चलने का टारगेट है, लेकिन फिलहाल 41 हजार का का लक्ष्य पूरा हो रहा है।


केस 2. रोडवेज में कर्मचारी शीशपाल गोदारा करीब ढाई वर्ष पहले में सेवानिवृत्त हुए। खुद बीमार रहते है और उन्हें शुगर भी है। बच्चे छोटे हैं। कमाई का कोई साधन नहीं होने से पेंशन से गुजारा होना मुश्किल है। उनका करीब 12 से 13 लाख रुपए का भुगतान अटका पड़ा है। ये भी हाई कोर्ट से केस जीते हुए है। मगर अभी तक कोई सुनवाई नहीं हो पाई।

केस 3. कर्मचारी गुरचरणसिंह जनवरी 2017 में रिटायर्ड हुए। जीवन रोडवेज में खपा दिया। इनके दो बच्चे हैं, जिनकी शादी होनी बाकी है। गुरचरण सिंह बताते है कि बकाया भुगतान मिले तो बच्चों की शादी करें। पेंशन से गुजारा ही मुश्किल हो पाता है।

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