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‘विवाद से विश्वास’ योजना होगी शुरू, डायरेक्ट टैक्स से जुड़े पुराने मामले होंगे हल
पिछले कई वर्षों से लंबित पड़े टैक्स से जुड़े मामलों को निपटाने के उद्देश्य से सरकार ‘विवाद से विश्वास’ योजना लाने जा रही है। इससे डायरेक्ट टैक्स से जुड़े विवादों को सुलझाने में मदद मिलेगी। ख़ास बात है कि विभाग के अनुसार जिले में डायरेक्ट टैक्स से जुड़े 300 से अधिक मामले लंबित हैं। इन मामलों में 36 करोड़ रुपए से अधिक की राशि फंसी हुई है। इस योजना का लाभ लेने के लिए टैक्स पेयर्स को 31 मार्च तक राशि का भुगतान करना होगा। वहीं विवादित जुर्माना मामले में ब्याज और शुल्क विवादित कर के साथ जुड़ा नहीं होगा। करदाता को विवाद निपटाने के लिए केवल 25 फीसदी का भुगतान करना होगा। एक करदाता को 31 मार्च 2020 के बाद भुगतान पर विवादित कर का 110 फीसदी भुगतान करना होगा और जुर्माना, ब्याज और शुल्क का 30 फीसदी देना होगा। गौरतलब है कि लोकसभा ने डायरेक्ट टैक्स विवाद से विश्वास बिल 2020 को मंजूरी दी है। विभाग की मानें तो इस बिल का मकसद पुराने टैक्स विवादों का समाधान करना है। इसके तहत टैक्स पेयर्स को विवाद निपटाने का मौका मिलेगा। टैक्स पेयर्स को केवल विवादित टैक्स राशि का भुगतान करना होगा, उसे ब्याज और जुर्माने पर पूरी छूट मिलेगी। विवाद से विश्वास विधेयक जल्द ही पारित होने की स्टेज पर है, क्योंकि ब्याज और जुर्माने से छूट लाभ लेने की अंतिम तिथि 31 मार्च है। लोकसभा में बिल पास हो चुका है और अब ये विधेयक राज्यसभा में जाएगा। विभागीय अधिकारियों के अनुसार विभिन्न अपीलीय मंचों जैसे कि आयुक्त (अपील), आईटीएटी, उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में जो प्रत्यक्ष कर मामले लंबित हैं।
लंबित मामलों का निस्तारण करने के लिए यह एक अच्छा मौका साबित होगा। इससे उन टैक्स पेयर्स को अधिक लाभ मिलेगा जिनके विवाद काफी ज्यादा पुराने हो गए हैं तथा टैक्स की मांग में ब्याज की बड़ी राशि शामिल है। मानसिक परेशानी, खर्च और समय बचाने में काफी मदद मिलेगी।
अमित गोयल, आईटीओ।
करदाताओं के लिए लाभदायक होगी यह योजना
डायरेक्ट टैक्स से जुड़े विवाद निपटाने में मदद मिलेगी, टैक्स पेयर्स को केवल विवादित टैक्स राशि का भुगतान ही करना होगा। 31 मार्च तक डायरेक्ट टैक्स का भुगतान नहीं होने पर उन्हें 30 जून तक का समय दिया जाएगा, हालांकि, उन्हें 10 प्रतिशत ज्यादा टैक्स देना होगा। जिन मामलों में केवल ब्याज या जुर्माना बनता है, वहां विवादित ब्याज या जुर्माने का 25 प्रतिशत 31 मार्च तक भुगतान करना होगा। उसके बाद यह राशि बढ़कर 30 प्रतिशत हो जाएगी। ये स्कीम 30 जून 2020 तक चलेगी।