बायोवेस्ट खुले में फेंका तो क्यूआर कोड से होगी अस्पताल की पहचान

Hanumangarh News - संक्रमित बायोवेस्ट अगर किसी अस्पताल की ओर से खुले में फेंका गया तो उस अस्पताल की अब पहचान हो सकेगी। इसके लिए...

May 18, 2019, 08:10 AM IST
संक्रमित बायोवेस्ट अगर किसी अस्पताल की ओर से खुले में फेंका गया तो उस अस्पताल की अब पहचान हो सकेगी। इसके लिए बायोबैग पर क्यूआर कोडिंग सिस्टम के साथ बायोवेस्ट निस्तारण पर ऑनलाइन मॉनिटरिंग शुरू की गई है। टाउन स्थित महात्मा गांधी स्मृति सरकारी अस्पताल जिले में सरकारी और निजी स्तर पर पहला अस्पताल है जहां पर शुक्रवार को इसकी शुरूआत की गई। अधिकारियों के मुताबिक जल्द ही अन्य सरकारी और निजी अस्पताल भी इस सिस्टम के दायरे में आ जाएंगे। इसको लेकर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अधिकारियों के मुताबिक बायोमेडिकल वेस्ट नियम 2018 में अस्पतालों से संक्रमित कचरा निस्तारण के लिए क्यूआर कोड प्रणाली का उपयोग 27 मार्च 2019 से करने के निर्देश दिए गए थे। इसके तहत जिला अस्पताल से इसकी शुरूआत की गई है। जिला अस्पताल का क्यूआर कोड बैंगलोर से तैयार कराया गया है। इसका उद्देश्य बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन पर प्रभावी नियत्रंण सुनिश्चित करना है। प्रशासन को शिकायत मिल रही थी कि अस्पतालों का संक्रमित कचरा खुले में डाल दिया जाता है जिससे आमजन के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

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बायोबैग पर क्यूआर कोड, पहले अस्पताल में ब्लुटूथ से जुड़ी मशीन पर वजन फिर प्लांट पर पहुंचने पर भी होगी स्कैनिंग

बायोबैग पर रंग के मुताबिक क्यूआर कोड चिपकाए जाएंगे। क्यूआर कोड लगे बैग को अस्पताल में संग्रहण स्थल पर रखने के बाद ब्लुटूथ से जुड़ी मशीन पर बायोवेस्ट का वजन किया जाएगा। इसके बाद बायोवेस्ट संग्रहण करने वाली गाड़ी से प्लांट तक पहुंचाया जाएगा। खास बात है कि क्युआर कोड बैग को ब्लुटुथ वजन मशीन पर रख कर जैसे ही स्केनिंग की जाएगी कचरे का वजन ऑनलाईन अपलोड हो जाएगा। जिसका बड़ा लाभ ये होगा कि अब कहीं भी बायो बैग खुला मिले तो क्यूआर कोड से पता चल जाएगा कि संबंधित बायो बैग किस अस्पताल का है। इतना ही नहीं मुख्यालय जयपुर में बैठे स्वास्थ्य विभाग व प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारी बॉयोवेस्ट निस्तारण की ऑनलाइन निगरानी कर सकेंगे।

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