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ओलों से 48 हजार हैक्टेयर में फसल बर्बाद, 33% से ज्यादा खराबे का नियम, 13 हजार हैक्टेयर को मिलेगा मुआवजा
7 पंचायतों में सर्वे टीम के साथ पहुंचे 4 रिपोर्ट्स: ओलावृष्टि के बाद खेतों में दिखा तबाही का मंजर, रोने लगे किसान, बोले- रब रूठ गया हम से
केंद्र व राज्य सरकार किसानों की अाय बढ़ाने के लिए दावे ताे बड़े-बड़े करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत है। सरकार की पॉलिसी के अनुसार प्राकृतिक अापदा से फसलाें काेे 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान हाेने पर ही किसानों काे सहायता दी जा सकती है। इससे कम नुकसान में मुअावजा का काेई प्रावधान नहीं है। अगर किसी किसान ने प्रधानमंत्री फसल बीमा याेजना के तहत फसलाें का बीमा भी नहीं करवाया है अाैर नुकसान 33 प्रतिशत से कम हुअा है ताे उनकाे किसी भी प्रकार सहायता नहीं मिलेगी। िपछले 8 दिनाें में िजले में चार बार हुई अाेलावृष्टि हुई। इससे 48 हजार 115 हैक्टेयर में खड़ी गेहूं, चना व सरसाें की फसलाें काे नुकसान हुअा। कृषि िवभाग की अाेर से करवाए गए सर्वे में करीब 35 हजार हैक्टेयर में नुकसान 33 प्रतिशत से कम हुअा है। महज 13 हजार हैक्टेयर में ही फसल खराबा 33 प्रतिशत से अधिक है। इसकी भी अब तक राजस्व िवभाग ने काेई िगरदावरी प्रक्रिया शुरू नहीं की है।
भास्कर पड़ताल: पिछले रबी सीजन के 20 करोड़ रुपए का क्लेम अब भी बकाया
कृषि िवभाग के अधिकारी प्रधानमंत्री फसल बीमा याेजना के तहत प्रभावित किसानों काे राहत पहुंचाने का दावे कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा याेजना के तहत अनुमानित उत्पादन से जहां कम पैदावार हाेगी उसका क्लेम दिलाकर किसानों की भरपाई की जाएगी। अाेलावृष्टि से हुए नुकसान का क्लेम कब िमलेगा इसका किसी के पास जवाब नहीं है। क्याेंकि अब तक िपछले रबी सीजन का भी करीब 20 कराेड़ रुपए क्लेम बकाया है। एेसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि बीमा कंपनियां किसानों के नुकसान की भरपाई काे लेकर कितनी गंभीर है।
गणित: सरसाें में 30 प्रतिशत खराबा ताे प्रतिबीघा 5310 रु. का हुअा नुकसान
उदाहरण के ताैर पर माना जाए कि सरसाें का अाैसत उत्पादन चार क्विंटल प्रतिबीघा हाेना था। अाेलावृष्टि के कारण 30 प्रतिशत खराबा हुअा है ताे प्रतिबीघा 1.20 क्विंटल उत्पादन कम हाेगा। सरसाें का समर्थन मूल्य सरकार द्वारा 4425 रुपए घाेषित किया गया है। एेसे में किसान काे प्रति बीघा 5310 रुपए का नुकसान हाे गया। इसका सरकार द्वारा काेई मुअावजा नहीं दिया जाएगा। बारानी क्षेत्र में इस बार फसलें काफी अच्छी स्थिति में थी। प्रधानमंत्री फसल बीमा याेजना के तहत अाैसत उत्पादन का अनुमान काफी कम लगाया है।
नाेहर के 14 व रावतसर तहसील के 5 गांवाें में 40 से 85% तक नुकसान
कृषि िवभाग की प्रारंभिक िरपाेर्ट के अनुसार नाेहर तहसील क्षेत्र के 14 व रावतसर तहसील के 5 गांवाें में 40 से 85 प्रतिशत तक नुकसान हुअा है। इनमें अधिकांश फसलें बारानी भूमि की है। यहां पर किसानों द्वारा ज्यादातर सरसाें व चना की बुवाई की गई थी। अन्य जगह अाैसत खराबा 7 से 23 प्रतिशत है। यानी कहीं 7 प्रतिशत फसलाें काे नुकसान हुअा है ताे कहीं पर 15 से 20 अाैर 25 से 30 फीसदी। राजस्व िवभाग की िरपाेर्ट में फसल खराबे का अनुमान अाैर भी कम है।
एक्सपर्ट व्यू
भादरा क्षेत्र के गांव भिरानी की है। अपनी खराब फसल देख रोता किसान शीशराम ।
सभी फसलाें में नुकसान हाेने पर ही सरकार किसानों काे देती है मुअावजा: ओम जांगू
सरकार की पॉलिसी किसान विराेधी है। 33 प्रतिशत से कम नुकसान वाले काश्तकाराें काे राज्य व केंद्र सरकार द्वारा काेई मुअावजा नहीं दिया जाता। अगर एक किसान के पास 8 बीघा कृषि भूमि है। उसने चार में गेहूं व चार बीघा में सरसाें की बुवाई कर रखी है। सरसाें में 33 प्रतिशत नुकसान हाे गया अाैर गेहूं में खराबा नहीं ताे सरकार मुअावजा नहीं देती। किसान का फसल बीमा भी नहीं है अाैर नुकसान सरकार के दायरे से कम है ताे उसकाे सहायता नहीं मिलेगी।
भास्कर
राहत के हरसंभव कर रहे प्रयास
{नुकसान का सर्वे हाे गया है क्या?
}सर्वे करवाकर प्रारंभिक अनुमान की िरपाेर्ट तैयार कर प्रशासन काे भेज दी गई है।
{किसानों काे कितना नुकसान हुअा है?
}नाेहर व रावतसर तहसील क्षेत्र के कई गांवाें में नुकसान ज्यादा हुअा है। पूरे जिले की बात करें ताे 7 से लेकर 80 फीसदी तक हुअा है।
{प्रभावितों काे कितना मुअावजा मिलेगा?
}जहां 33 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान हुअा है, वहां के किसानों काे सरकार द्वारा मुअावजा दिया जाता है।
{अधिकांश जगह में 33 फीसदी से कम नुकसान है। उन्हें सहायता नहीं मिलेगी?
}प्रधानमंत्री फसल बीमा याेजना के तहत नहरी व बारानी भूमि में फसलाें के अाैसत उत्पादन का अनुमान लगाया जाता है। जहां पर अनुमानित से कम पैदावार हाेगी उन किसानों काे बीमा याेजना के तहत राहत पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
{अाेलावृष्टि के साथ बरसात भी हुई है। इससे नुकसान हुअा है या फायदा?
}जिन क्षेत्राें में िसर्फ बरसात हुई है, वहां फसलाें काे काफी फायदा हुअा है।
फेफाना (महबूब अली)| हर और खेतों में बर्बादी नजर आई। चक आठ जेएसएन के किसान लाजवंत गोदारा ने बताया कि उनकी 8 बीघा में तैयार फसल में 80 से 90% तक नुकसान हुआ है। पहले से ही खेती के खर्चे पूरे नहीं हो रहे हैं। ऐसे में पूरी फसल खराब होना काफी तकलीफदेह है। चक दो जेएसएन के किसान संतलाल ज्याणी ने बताया कि गेहूं की फसल जमीन पर आड़ी गिर गई। गेहूं की बालियों में दाना भी प्रभावित होगा। गेहूं कटाई के लिए किसानों को परेशान होना पड़ेगा। प्रभावित क्षेत्रों के दौरा पटवारी पृथ्वी सिंह, गिरदावर जगदीश भूकर, कृषि पर्यवेक्षक भूपसिंह भारी, प्रदीप कुमार, सरपंच प्रतिनिधि श़योवीर ज्याणी ने विभिन्न चक्कों का दौरा कर किसानों से हुए नुकसान की जानकारी ली।
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विशेष
फेफाना: समय सुबह 11 बजे
टिब्बी: पंचायत खिनानिया, श्योदानपुरा समय-दोपहर 1 बजे
भादरा: पंचायत भिरानी, सुरतपुरा, आसन व अजीतपुरा समय-सुबह 11:30 बजे
सीधी बात
दानाराम गोदरा, उपनिदेशक कृषि, हनुमानगढ़
टिब्बी (नवनीत सिडाना)|ग्राम पंचायत खिनानियां के चकों के खेतों में फसलें खत्म नजर आई। यहां सर्वे दल दोपहर डेढ़ बजे पहुंचा। फसल खराबे का सर्वे कर रिपोर्ट तैयार की। किसानों ने बताया कि यहां सरसों व चना की पकी हुई फसल खराब हो गई। फलियां फटने से दाने खेतों में बिखर गए। गेहूं की फसल खेतों में बिछ जाने उसकी पैदावार आधी रह गई है। पानी भरने से फसलें बर्बाद हो रही है। फसलों को करीब 60 प्रतिशत से अधिक नुकसान हो चुका है। मौके पर नायब तहसीलदार सुभाष चंद्र, गिरदावर देवीलाल, पटवारी कृष्ण चाहर, कृषि सहायक अधिकारी आदि ने दिलासा दिया। वहीं भाजपा महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष गुलाब सींवर ने बरसात एवं ओलावृष्टि से हुए किसानों के फसल नुकसान के मुआवजे की मांग रखी।
भादरा (अतुल शर्मा)|खेतों में हर तरफ तबाही नजर आई। किसानों का कहना था कि क्षेत्रों में मोटे आकार के ओले पड़े हैं। इससे सरसों व चने की फसलें खराब हुई हैं। कुछ खेतों में 50 प्रतिशत से अधिक खराबा हुआ है। भिरानी के किसान शीशराम ओला तो अपनी फसलों को देख फफक पड़े। कहा कि रब रूठ गया। कहा कि सरसों, तारामीरा व चनों की आड़ी पड़ी फसलों को ज्यादा नुकसान होने का अंदेशा है। कृषि अधिकारी सुरेन्द्र जाखड़ ने बताया कि वास्तव में ओलावृष्टि प्रभावित क्षेत्रों में कुछ खेतों को शत-प्रतिशत नुकसान हुआ है। एसडीएम मुकेश बारेठ ने बताया कि खेतों में भारी नुकसान हुआ है कुल मिलाकर स्थिति नियंत्रण में है।