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2 साल से पुरानी राशि वसूल नहीं कर सकता िडस्कॉम, स्थाई लोक अदालत का फैसला
जोधपुर डिस्कॉम अब दो साल से पुरानी राशि की अचानक बकाया बताकर उपभोक्ताओं से वसूली नहीं कर सकता है। इस संबंध में स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा, सदस्य महावीर स्वामी व बलविंद्र सिंह ने फैसला सुनाया है। दीप्ति आर्य प|ी संजय आर्य निवासी संगरिया ने अपने वकील लालचंद्र वर्मा के मार्फत स्थाई लोक अदालत में जोधपुर डिस्कॉम के खिलाफ परिवाद पेश किया था कि डिस्कॉम के अधिकारियों ने आडिट रिपोर्ट के आधार पर दीप्ति आर्य के 5 एनटीडब्ल्यू स्थित स्कूल ब्लू बेल्स चिल्ड्रन एकेडमी को नोटिस देकर सितंबर 2011 से दिसंबर 2018 तक कुल 4405 यूनिट पर मिक्स रेट के बजाय अघरेलू रेट देय होना बताते हुए 93207 रुपए की अंतर राशि जमा कराने के लिए कहा। डिस्कॉम ने गलत बिलिंग को आधार बनाकर यह बकाया राशि निकाली। एडवोकेट वर्मा ने यह तर्क दिया कि भारतीय विद्युत अधिनियम की धारा 56(2) के अनुसार दो वर्ष से अधिक अवधि के विद्युत उपभोग की राशि की वसूली नहीं की जा सकती है। स्थाई लोक अदालत ने फैसले में लिखा है कि परिवादिया का प्रार्थना पत्र आंशिक रूप से स्वीकार कर डिस्कॉम को यह आदेश दिया जाता है कि बिल जारी करने की तारीख से दो वर्ष की अवधि के दौरान देय हुई थी। वर्मा ने अपनी दलील में कहा कि ऐसे शिक्षण संस्थान जो राजकीय नहीं है। अघरेलू दरों पर विद्युत राशि वसूल करने के अधिकारी नहीं है। चूंकि परिवादिया का शिक्षण संस्थान निजी है। ऐसी स्थिति में परिवादिया से डिस्कॉम अघरेलू दरों से वसूली नहीं कर सकता। वह राशि डिस्कॉम परिवादिया से वसूल करने के लिए स्वतंत्र है लेकिन दो वर्ष से अधिक राशि परिवादिया से वसूल नहीं कर सकते। खास बात ये है कि लोक अदालत में इस तरह का यह पहला मामला बताया जा रहा है।
मनमाने तरीके से ऑडिट पैरा नहीं बना सकते
उपभोक्ताओं की पीड़ा है कि डिस्कॉम मनमानी तरीके से उपभोक्ताओं से बिल वसूल रहा है। बिल जमा करने के दो-तीन साल बाद आडिट करने के नाम पर अतिरिक्त बिल भेजकर वसूली कर रहा है। इस संबंध में अधिकारियों को कई बार अवगत करवाया जा चुका है लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती है। वहीं जिला उपभोक्ता मंच के पूर्व सदस्य मोहम्मद मुश्ताक जोइया का कहना है कि डिस्कॉम के अधिकारी मनमानी तरीके से आडिट पैरा नहीं बना सकते हैं। इसके लिए एक पैरा मीटर होना चाहिए और उपभोक्ता को भी सूचित करना चाहिए।