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कमरे को लेकर डॉक्टरों में विवाद, डॉ. कुलहरि ने पूरे दिन अस्पताल के मुख्य द्वार पर बैठ देखे मरीज

एक वर्ष पहले
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डॉ. कुलहरि की पीड़ा: बोले- मैं अवकाश पर था, पीछे से डॉ. संदीप सिंघल ने 6 नंबर कमरे से सामान उठवा 9 में रखवा दिया

पीलीबंगा सीएचसी में कार्यरत डॉक्टरों की आपसी खींचतान जहां एक ओर पूरे विभाग को शर्मसार कर रही है वहीं अस्पताल में आने वाले मरीजों के लिए भी परेशानी का सबब बनी हुई है। अस्पताल के डॉक्टर्स में कमरों व अन्य व्यवस्थाओं को लेकर चल रही खींचतान के चलते चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजीव कुलहरि ने शनिवार को अस्पताल के मुख्यद्वार के बाहर ही बैठकर पूरे दिन मरीज देखे। मुख्यद्वार के बाहर बैठकर पूरे दिन मरीज देखने का मामला कस्बे में चर्चा का विषय बना रहा। दरअसल, पीलीबंगा अस्पताल में डॉक्टरों के बैठने के लिए 5 कमरे हैं जबकि डॉक्टर आठ तैनात हैं। इसमें से एक कमरा दंत चिकित्सक के लिए और एक आयुर्वेदिक डॉक्टर के लिए है। इस लिहाज से छह डॉक्टरों के लिए तीन कमरे रहते हैं। ऐसे में अधिकतर बार एक कमरे में दो डॉक्टर बैठकर मरीजों को देखते हैं, जिससे मरीज भी परेशान होते हैं।

महिला चिकित्सक अवकाश पर है, उनके रूम में शिफ्ट किया था पर वह जाने को तैयार नहीं


यह सब डॉक्टर्स के बैठने की व्यवस्था सुचारू करने के लिए किया गया है। महिला डॉक्टर एक मात्र चिकित्सक चार माह की मेडिकल अवकाश पर है। इसकी वजह से डॉ. कुलहरि को उनके रूम में शिफ्ट किया गया है पर वह वहां जाने को तैयार नहीं है। जबकि रूम नंबर छह जनरल रोगियों को देखने वाले डॉक्टरों के लिए है। ऐसे में यह व्यवस्था की गई है। जहां तक कमरा नंबर 7 में बीसीएमओ ऑफिस बनाए जाने का मामला है उसके लिए डॉ. रोहित को कमरा खाली करने के लिए निर्देश दे दिए गए हैं। फिर भी कोई विवाद है तो सोमवार तक सारी व्यवस्थाएं सुचारू करवा दी जाएगीं।


डॉ. रोहित चौधरी बोले- इस संबंध मैं कोई बात नहीं करना चाहता। इस बारे में अस्पताल प्रभारी से ही बात करें वही सब बात बताएंगे।


बीसीएमओ और प्रभारी अधिकारी डॉ. सिंघल बोले

डॉ. कुलहरि का कहना था कि वे होली पर मेडिकल अवकाश लेकर घर गए हुए थे। पीछे से अस्पताल के प्रभारी अधिकारी एवं बीसीएमओ डॉ. संदीप सिंघल ने अस्पताल के 6 नंबर कमरे से उनका सामान उठवाकर 9 नंबर कमरे में रखवा दिया। जबकि वे पूरे समय अस्पताल में बैठकर मरीजों को सेवाएं देते हैं। डॉ. कुलहरि के अनुसार अधिकतर तो वे अस्पताल में आने वाले सभी मरीजों को देखने के बाद ही अपनी कुर्सी छोड़ते हैं फिर भले ही अस्पताल का ओपीडी समय खत्म ही क्यूं न हो जाए। इसके बावजूद प्रभारी अधिकारी ने जानबूझकर उन्हें अन्यत्र कमरे में शिफ्ट कर दिया। डॉ. कुलहरि का आरोप है कि पूर्व बीसीएमओ डॉ. रोहित चौधरी ने बीसीएमओ पद पर रहते हुए ओपीडी ब्लाक में अपना ऑफिस बनवाकर एक कमरा रोका हुआ है। अब बीसीएमओ पद से हट जाने के बाद भी डॉ. रोहित चौधरी उसी कमरे में बैठ रहे हैं और कमरे से जाते समय भी वे इस कमरे को लॉक कर चले जाते हैं। जिससे अन्य डॉक्टर्स को बैठने के लिए कमरा ही नहीं मिल पाता। और तो और डॉ. रोहित ने अभी भी वहां अपने नाम की प्लेट लगा रखी है।


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