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लोक गीत घोल रहे भटनेर नगरी की संस्कृति में रंग, 40 साल से बज रही धमालें, महिला बन झूमते हैं पुरुष

एक वर्ष पहले
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होली पर डफ और चंग की थाप पर फाल्गुन के लोक गीतों की परंपरा आज भी कायम है। जंक्शन और टाउन में अलग-अलग मंडलियां यह कार्यक्रम करती है। रात के समय होने वाले इस कार्यक्रम में लोक गीतों की ऐसी सरिता बहती है कि भटनेर नगरी में संस्कृति के रंग घुलने लगते हैं। विभिन्न जिलों से पहुंचने वाले कलाकार विभिन्न लोक संस्कृतियों का मेल करवाते हैं। ये चंग धमाल मंडलिया 30 से 40 वर्ष से इन कार्यक्रमों का आयोजन कर सांस्कृतिक विरासत को बचाए हुए हैं।

लोक गीतों के साथ मौसम और राजा-महाराजाओं का किया जाता है बखान

कार्यक्रम में गाई जाने वाली धमालें जहां मौसम परिवर्तन के बारे में बताती हैं तो वहीं राजा महाराजाओं के इतिहास का भी परिचय देती हैं। इनमें ‘राजाबल के दरबार में मची होली रे’ और ‘उड़ती पूर्वइया संदेशो म्हारो लेती जाइयो’ और ‘रुत आई रे पपीहा तेरे बोलण की’ और ‘रंग झीणौ रै राठौड़ा थारी महफिल रो’ आदि लोक गीत राजस्थान के मौसम और इतिहास की जानकारी देते हैं।

टाउन: गोरबंद चंग पार्टी अपने खर्चे पर कर रही है आयोजन

टाउन में होली पर फागुनी गीतों के साथ चंग धमाल का कार्यक्रम पिछले 40 वर्षों से निरंतर जारी हैं। टाउन में पुराना नगरपालिका चौतीना कुंआ मंदिर एवं गुड मंडी में गोरबंद चंग पार्टी के सदस्य इस परंपरा को जीवंत रखे हुए हैं। एडवोकेट मदन पारीक ने बताया कि 25 से अधिक सदस्यों की इस चंग पार्टी में हर वर्ग के लोग जुड़े हुए हैं। खास बात ये है कि इसमें हर वर्ग के लोग हिस्सा लेते हैं। इसमें संजय अरोड़ा महिला के वेश में डफ की थाप पर झूमते हैं। जिन्हें मेहरी के नाम से पुकारा जाता है। रात के समय जब यह कार्यक्रम चरम पर पहुंचता है ताे उत्सव में बदल जाता है।

लुखा कमेटी: 6 साल से कर रहे आयोजन, लोक गीत देर रात तक गूंजते हैं

लुखा कमेटी का जंक्शन दुर्गा मंदिर धर्मशाला में चल रहा हाेली धमाल कार्यक्रम राज्य के विभिन्न जिलाें की साैंधी महक बिखेर रहा है। कमेटी में हनुमानगढ़, बीकानेर, डूंगरगढ़ व चूरू जिले के कलाकार धमाल के माध्यम से शहरवासियों के मन में राजस्थान की संस्कृतिक से राेमांचित कर रहे हैं। कलाकार िपछले 6 वर्षाें से धमाल का कार्यक्रम कर रहे हैं। नगरपरिषद के पूर्व सभापति कालूराम शर्मा के अनुसार कमेटी में देवीलाल अाेझाईया, रेवतादास स्वामी, ओमप्रकाश, मनाेज सारस्वत, भीखमचंद माेहता, ओपी सैनी, बलदेव सारस्वत, चाैथमल तावनियां, जयनारायण चाैधरी अादि शामिल है।

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