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70 साल से वन विभाग की भूमि पर बने मकान हाईकोर्ट ने हटाने के आदेश दिए, नाेटिस दिए ताे पीड़िताें ने किया घेराव

एक वर्ष पहले
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ग्राम पंचायत मटोरियांवाली ढाणी में वन विभाग की भूमि पर अवैध रूप बने मकानाें काे हाईकोर्ट ने हटाने का आदेश दिया है। डीएफअाे काे 27 मार्च काे कब्जे हटाकर काेर्ट में पालना िरपाेर्ट पेश करनी हाेगी। वन विभाग की अाेर से संबंधित लाेगाें काे नाेटिस दिए गए हैं। इसके विराेध में सैकड़ाें ग्रामीणाें ने शुक्रवार काे डीएफअाे कार्यालय पर प्रदर्शन कर नारेबाजी की। इस अवसर पर हुई सभा में वक्ताअाें ने वन विभाग पर गरीबाें के अाशियाने उजाड़ने का अाराेप लगाया। उन्हाेंने कहा कि 70 वर्ष से लाेग यहां अपने घर बनाकर निवास कर रहे हैं। अब विभाग के अधिकारी काेर्ट का हवाला देकर उनके मकान ताेड़ने पर तुले हैं। इस मौके पर माकपा नेता रघुवीर वर्मा, 22-23 एनडीआर सरपंच प्रतिनिधि मोहन लोहरा, ग्राम पंचायत मटोरिया वाली ढाणी सरपंच जीतो देवी बाजीगर, रामप्रताप सुथार, जगदीश सहारण, लीलूराम, चेतराम टांडी, जगदीश चाहर, वेद मक्कासर, पूर्ण, पप्पू बाजीगर अादि ने वन विभाग की कार्रवाई का विराेध किया। इसके बाद ग्रामीणाें ने डीएफअाे कर्णसिंह काजला काे ज्ञापन देकर कब्जे हटाने की कार्रवाई राेकने की मांग की। इस पर डीएफअाे ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश की पालना जरूरी है। विभाग का मकसद किसी का भी घर उजाड़ना नहीं है। उन्हाेंने इस संबंध में उच्चाधिकारियाें काे अवगत करवाने का भराेसा दिलाया।

डीएफअाे ने धरनास्थल पर पहुंच की वार्ता ताे शांत हुए ग्रामीण


ग्रामीण दाेपहर 12 बजे वन विभाग कार्यालय के अागे एकत्रित हुए अाैर धरना लगा दिया। इस दाैरान ग्रामीणाें ने वन विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। करीब एक घंटे बाद सभी ग्रामीण डीएफअाे कार्यालय में घुसने लगे ताे माैके पर माैजूद पुलिसकर्मियाें ने उन्हें राेका। इसके बाद डीएफअाे कर्णसिंह काजला ने धरनास्थल पर पहुंच ग्रामीणाें से वार्ता की। इसमें ग्रामीणाें ने अपनी पीड़ा बताई। इस पर डीएफअाे ने कहा कि इस संबंध में उच्चाधिकारियाें काे अवगत करवा दिया है। साेमवार काे जयपुर में उच्चाधिकारियाें के साथ बैठक कर काेई हल निकालने का प्रयास किया जाएगा। इस पर ग्रामीण शांत हुए।

ग्रामीणों का अाराेप: राजस्व विभाग की गलती का खामियाजा भुगत रहे लाेग

ग्रामीणाें के अनुसार चक 5 एमडब्ल्यू व 15 एनडीआर ए की 150 बीघा आबादी ग्राम पंचायत मटोरियांवाली ढाणी की है। यह लगभग 70 साल से आबाद है। 150 बीघा आबादी में से 50 बीघा भूमि राजस्व रिकार्ड में वन विभाग की नर्सरी के नाम से दर्ज है। राजस्व विभाग की गलती का खामियाजा ग्रामीण भुगत रहे हैं। यहां न ताे कभी वन विभाग का कब्जा रहा अाैर न ही कभी कोई नर्सरी रही है। यहां स्कूल, सड़क, बिजली, पानी अादि की व्यवस्था है। अब वन विभाग उक्त 50 बीघा भूमि में बसे हुए 240 घरों को नोटिस दे रहा है। स्वयं कब्जा न हटाने पर जेसीबी से मकान ताेड़ने की धमकी दी जा रही है।
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