आईजीएनपी की लाइनिंग के लिए 2 साल पहले स्वीकृत ‌Rs. 1300 करोड़, अब तक पंजाब ने टेंडर भी नहीं करवाए

Hanumangarh News - पंजाब की मनमानी का खामियाजा राजस्थान के किसानों को इस बार भी मानसून के सीजन में उठाना पड़ेगा। पंजाब हिस्से में...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 08:30 AM IST
Hanumangarh News - rajasthan news for lining of ignp approved rs 1300 crores so far punjab has not got any tender
पंजाब की मनमानी का खामियाजा राजस्थान के किसानों को इस बार भी मानसून के सीजन में उठाना पड़ेगा। पंजाब हिस्से में इंदिरा गांधी नहर की लाइनिंग काफी जर्जर है। दो साल पहले तत्कालीन भाजपा सरकार ने पंजाब हिस्से में इंदिरा गांधी नहर परियोजना की रिलाइनिंग का कार्य करवाने के लिए 1300 करोड़ का बजट स्वीकृत कर दिया था, लेकिन अभी तक लाइनिंग दुरुस्तीकरण के टेंडर भी नहीं हो पाए हैं। ऐसे में किसानों को मानसून अवधि में भाखड़ा एवं पौंग बांध का लेवल अच्छा होने के बावजूद आवश्यकता के अनुसार सिंचाई पानी नहीं मिल पाएगा। लाइनिंग दुरुस्त करवाने के लिए राज्य सरकार की ओर से पंजाब सरकार को कई बार पत्र लिखे जा चुके हैं, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा। जल संसाधन विभाग हनुमानगढ़ की ओर से भी पंजाब के अधिकारियों से पत्र लिखकर लाइनिंग का कार्य शुरू करने की बार-बार अपील की जा रही है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हाे रही।

यहां तक कि मामूली मरम्मत का कार्य करवाने में भी पंजाब सरकार काेई रुचि नहीं ले रही है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार फरीदकोट से लौहगढ़ हेड तक इंदिरा गांधी नहर की लाइनिंग काफी डैमेज है। इस कारण नहर में हरिके से 11 हजार 500 क्यूसेक से अधिक पानी नहीं छोड़ा जाता। पंजाब के अधिकारियों को पत्र लिखकर व मौखिक रूप से मामूली मरम्मत कार्य करवाकर नहर में पानी की मात्रा थोड़ी और बढ़ाने की भी अपील की जा रही है, लेकिन काेई जवाब नहीं िमल रहा। ऐसे में मानसून के सीजन में चाहे भाखड़ा व पौंग बांध लबालब हाे जाएंगे, इसके बावजूद इंदिरा गांधी नहर में 11 हजार 500 क्यूसेक से अधिक पानी नहीं चलाया जाएगा। इस कारण राजस्थान के किसानों को अधिक पानी नहीं मिल पाएगा।

पंजाब की मनमानी, राजस्थान बेबस और भुगत रहे हैं जिले के किसान

नतीजा... लाइन डैमेज होने के कारण मानसून में नहीं मिलेगा जरूरत का पानी

इंदिरा गांधी नहर की क्षमता 18 हजार 500 क्यूसेक थी। नहर बनने के बाद मरम्मत कार्य नहीं होने के कारण साल दर साल नहर में पानी चलाने की क्षमता घटती गई। वर्तमान में 11 हजार 500 क्यूसेक पानी ही चलाया जा सकता है। दो वर्ष पहले तक इसमें अधिकतम सवा बारह हजार क्यूसेक पानी चलाया जाता था। अब पंजाब के अधिकारी साढ़े ग्यारह हजार क्यूसेक से अधिक पानी नहीं चलाते। उनका तर्क है कि इससे अधिक पानी छोड़ते ही इंदिरा गांधी नहर व सरहिंद फीडर के बीच की लाइनिंग धंस सकती है। अगर फरीदकोट से लौहगढ़ हेड तक नहर की लाइनिंग का कार्य हो जाता है तो राजस्थान के किसानों को प्रत्येक वर्ष अगस्त व सितंबर माह में पानी अधिक मिल सकता है। क्योंकि जुलाई से लेकर सितंबर माह तक बांधों के कैचमेंट एरिया में भारी बारिश और हिमपात होता है। इससे बांधों में पानी का लेवल बढ़ जाता है। लाइनिंग की मरम्मत के बाद बांधों में बढ़े जल स्तर के हिसाब से इंदिरा गांधी नहर में भी अधिक पानी छोड़ा जा सकता है।

गेज में भी पंजाब करता है मनमानी: इंदिरा गांधी नहर में हरिके से छोड़े जाने वाले पानी के गेज में भी पंजाब द्वारा मनमानी की जाती है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार पंजाब के रिकॉर्ड में हरिके से 11 हजार 500 क्यूसेक पानी बताया जाता है और राजस्थान के अधिकारियों के नापने पर पानी की मात्रा कम मिलती है। कम पानी का उनकाे कहा जाता है तो वे सिर्फ अपने नाप को ही सही बताते हैं। राजस्थान के अधिकारियों की सुनवाई भी नहीं करते। बार-ब्ार अपील करके ही पंजाब से पानी लिया जाता है।

सीएम ने पंजाब सरकार को लिखा है पत्र


बार-बार पत्र लिखकर कर रहे हैं अीपल


(फाइल फोटो) आईजीएनपी में री-लाइनिंग के कार्य में लगे मजदूर।

एक्सपर्ट व्यू लालचंद सहारण, सेवानिवृत्त एईएन, सिंचाई विभाग

दोनों राज्यों में है कांग्रेस सरकार हल हो सकती है पानी की समस्या

राज्य को हिस्से के अनुरूप पानी दिलाने के लिए कभी भी राजस्थान सरकार ने पंजाब पर दबाव नहीं बनाया। चाहे सरकार किसी भी दल की रही हाे हमेशा पंजाब के आगे झुककर ही पानी मांगा। पंजाब शुरू से ही मनमानी करता रहा है और इसका खामियाजा क्षेत्र के िकसानाें काे अाज भी भुगतना पड़ रहा है। सिंचाई विभाग के अधिकारी अपनी नौकरी कर चलते बनते हैं। अब सुनहरी मौका है पंजाब और राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है इसलिए आपसी समन्वय से नहर की मरम्मत करवा किसानों को पूरा सिंचाई पानी दिलवाना चाहिए। यह बात समझनी चाहिए कि पंजाब पानी देकर हम पर कोई उपकार नहीं कर रहा है। यह राजस्थान के किसानों का हक है और इसके लिए पूरी लड़ाई लड़नी चाहिए। पंजाब सरकार पर इंदिरा गांधी नहर की रिलाइनिंग का कार्य करवाने के लिए भी दबाव बनाया जाए ताकि साल में दाे माह ताे किसानाें काे अावश्यकता के अनुसार पानी िमले।

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