सरलीकरण-नामांतरण के लिए नहीं लगाने होंगे नप के बार-बार चक्कर, सरकार ने तय की टाइमलाइन

Hanumangarh News - अभी तक नामांतरण शुल्क एक प्रतिशत वसूला जा रहा था। उदाहरण के तौर पर अगर एक मकान अगर 10 बार आगे बिका है तो उसमें 10 चैन का...

Jan 16, 2020, 08:16 AM IST
Hanumangarh News - rajasthan news for simplification renaming no frequent trips to the nap government fixed timeline
अभी तक नामांतरण शुल्क एक प्रतिशत वसूला जा रहा था। उदाहरण के तौर पर अगर एक मकान अगर 10 बार आगे बिका है तो उसमें 10 चैन का कुल एक प्रतिशत और वर्तमान डीएलसी दर से शुल्क वसूला जा रहा था। स्वायत्त शासन विभाग की ओर से जारी नई अधिसूचना के हिसाब से अब नामांतरण आवेदन के दौरान ही 10 रुपए प्रति स्कवेयर मीटर के हिसाब से शुल्क जमा कराना होगा। संपत्ति के नाम हस्तांतरण प्रकरणों का निस्तारण आयुक्त व ईओ के स्तर पर नियमानुसार किया जाएगा। पहले इन प्रकरणों को लेकर नगरपरिषद बोर्ड से भी स्वीकृति लेनी पड़ती थी।

सुधार
भास्कर संवाददाता | हनुमानगढ़

शहर में पट्टाशुदा मकान या भूखंड बेचने के बाद नामांतरण के लिए लोगों को अब नगरपरिषद कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इसके लिए सरकार ने नामांतरण के लिए 21 दिन की टाइमलाइन तय कर दी है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि गाइडलाइन में अभी कुछ बिंदु स्पष्ट नहीं होने विसंगतियां दूर करने के लिए स्वायत्त शासन विभाग से मार्गदर्शन मांगा जाएगा। इसके बाद ही नए नियमों के मुताबिक नामांतरण शुरू हो सकेंगे। राज्य सरकार ने मकानों व प्लॉट बेचने के बाद नाम ट्रांसफर के नियमों में संशोधन किया है। नए नियमों के अनुसार नाम ट्रांसफर के मामले में न तो ले आउट नक्शा और न ही मौके की जांच करवाई जाएगी। मकान एक से दूसरे व्यक्ति के नाम ट्रांसफर की कार्रवाई के लिए आवेदक की ओर से प्रस्तुत प्रमाणपत्रों को ही आधार माना जाएगा। भूखंड पर बकाया राशि लेकर 21 दिन में इसकी कार्रवाई पूरी की जाएगी। समय सीमा में नाम ट्रांसफर सहित अन्य काम नहीं करने वाले, आवेदक को बार-बार चक्कर लगवाने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी। पहले इन्हीं औपचारिकताओं के नाम पर ही लोगों को दलालों, कर्मचारियों और अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ते थे। नामांतरण में जरूरी नहीं होने के बावजूद अधिकारी व कर्मचारी अनावश्यक जांचों और अन्य औपचारिकता के नाम पर महीनों तक फाइलें अटकाकर रखते थे। हारकर व्यक्ति दलालों के चक्कर में फंस जाता था। हालत यह है कि सेटबैक या ले आउट प्लान, भवन निर्माण की स्वीकृति के लिए जेईएन या अन्य अधिकारी से मौका रिपोर्ट ली जाती थी। कई प्रकार की मौका रिपोर्ट के लिए आवेदक को चक्कर लगवाए जाते थे। अब इसकी जरूरत ही नहीं है। गौरतलब है कि नगरीय निकायों में आमजन की ओर से निजी संपत्ति के विक्रय, गिफ्ट, वसीयत आदि के आधार पर नाम हस्तांतरण कराया जाता है।

अभी तक देना पड़ता था कीमत का एक प्रतिशत, अब 10 रुपए प्रति स्कवेयर मीटर के हिसाब से जमा होगा शुल्क

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