अाठ जिलाें में अाठ बार हुअा टिड्डियाें का हमला, 1.34 लाख हैक्टेयर से ज्यादा में टिड्डियाें काे मारा फिर भी नियंत्रण नहीं

Hanumangarh News - बीकानेर| बीकानेर, बाड़मेर, जालाैर, चूरू, जैसलमेर, जाेधपुर, श्रीगंगानगर अाैर हनुमानगढ़ के करीब दाे लाख हैक्टेयर में...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 08:33 AM IST
Hanumangarh News - rajasthan news locusts attacked eight times in eight districts
बीकानेर| बीकानेर, बाड़मेर, जालाैर, चूरू, जैसलमेर, जाेधपुर, श्रीगंगानगर अाैर हनुमानगढ़ के करीब दाे लाख हैक्टेयर में टिड्डियाें ने अाठ बार हमला किया। 95 हजार लीटर से ज्यादा कैमिकल का उपयाेग कर इनकाे मारा जा चुका बावजूद इसके टिड्डियाें पर नियंत्रण नहीं हाे पा रहा है। वजह, टिड्डियाें ने अंडे दे दिए हैं अाैर फाका यानी हापर्स निकल जाए जाे वापस टिड्डियाें के झुंड में तब्दील हाेते जा रहे हैं। जिन जिलाें में टिड्डियां हमला कर रही हैं वहां अब तापमान 40 से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच है लेकिन तापमान का भी टिड्डियाें पर काेई असर नहीं हाे रहा है। कृषि विभाग अब अहसहाय हाेता जा रहा है क्याेंकि मैलाथियान का जाे छिड़काव जंगल में किया जा सकता है वाे फसलाें पर संभव नहीं है क्याेंकि अगर फसल में इसका छिड़काव किया ताे इसका असर पशु अाैर अामजन पर हाे सकता हे। यहां तक कि लाेगाें की जान तक जा सकती है। टिड्डियाें की अांच जयपुर ताे पहुंच गई लेकिन सरकार स्तर पर अभी तक इस पर काेई प्रतिक्रिया नहीं अाई अाैर न ही काेई जनप्रतिनिधि इस पर बाेला। टिड्डियाें काे लेकर पश्चिमी राजस्थान का किसान चिंितत इसलिए है क्याेंकि बारिश के अभाव में ग्वार अाैर माेठ की फसल सूखने के कगार पर पहुंच गई अाैर बची फसल पर टिड्डियाें का खतरा मंडरा रहा है।

जैसलमेर के बाद बीकानेर में सर्वाधिक टिड्डियां

टिड्डियाें के हमले में बीकानेर दूसरे नंबर पर है। सबसे ज्यादा जैसलमेर के 85174 हैक्टेयर में टिड्डियाें से इलाका प्रभावित है। दूसरे नंबर पर बीकानेर का 35 हजार 157 हैक्टेयर क्षेत्र में टिड्डियाें ने पांव पसारे हैं। बाड़मेर में 12 हजार 460, जालाैर में 480, जाेधपुर में 2597, चूरू में 500, श्रीगंगानगर में 65 अाैर हनुमानगढ़ जिले में 42 हैक्टेयर में टिड्डियाें ने हमला किया है।

शुक्रवार काे बीकानेर में यहां थी टिड्डियां

पूगल, गज्जेवाला, बीकमपुर, राववाला, गडियाला, गिरिराजसर, सेवणाें की ढाणी, नाै डीजीएम, बज्जू से हाेते हुए झुंड अागे बढ़ रहा है। चिंता की बात ये है कि टिड्डियाें ने फिर से अंडे देने शुरू कर दिए हैं। इसलिए वे अभी फसलाें काे नुकसान नहीं पहुंचा रही हैं। फसलाें में सबसे पहले वे खेजड़ी, केर अाैर झाड़ियाें काे चट करती हैं लेकिन ये तीनाें चीजें नहीं मिली ताे किसान की फसलाें काे भी चट करने में देर नहीं करेंगी।

पूरी टीम क्षेत्र में है। सर्वे में जुटे हैं। उनके बैठने का स्थान चिन्हित हाेने पर सुबह मारने प्रक्रिया अपनाई जा रही है। साधन-सुविधा की कमी नहीं लेकिन किसान अपने स्तर पर भी फसलाें पर छिड़काव करे। जगदीश पूनिया, उपनिदेशक कृषि विभाग

टिड्डी नियंत्रण के लिए कृषि विभाग के उपाय

* तीन कराेड़ रुपए टिड्डियाें का सर्वे करने के लिए वाहनाें के लिए स्वीकृत

* एक कराेड़ रुपए की किस्त भी प्रभावित जिलाें काे जारी की

* 45 बाेलेराे अाैर 27 चार सीटर वाहन भी प्रभावित जिलाें में भेजे।

* जयपुर से संयुक्त निदेशक स्तर के अधिकारी काे दाैरे पर रवाना किया

* टिड्डी नियंत्रण केन्द्र जाेधपुर अाैर फरीदाबाद से विशेष मदद मांगी

* 52991 हैक्टेयर में हाॅपर्स अाैर 83 हजार हैक्टेयर में टिड्डियाें के झुंड काे मारा

* 21 मई 2019, 30 जून, तीन जुलाई, नाै जुलाई, 13 जुलाई, 16 जुलाई, 19 जुलाई अाैर 20 अगस्त काे टिड्डियाें का पाकिस्तान की अाेर से हमला हुअा।

* महाजन अाैर जैसलमेर फायरिंग रेंज के अासपास टिड्डियाें ने अंडे दिए जाे अब बड़े हाेकर परेशानी बने हुए हैं।

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