मनोज पुरोहित/ रमेश सिगची |हनुमानगढ़/रावतसर

Hanumangarh News - पहले भैंस व मूंगफली चुगाई मशीन बेची, फिर घर का सामान भी बेच डाला, किश्तें नहीं चुका पाया तो की आत्महत्या, हमें एक...

Bhaskar News Network

Feb 14, 2019, 05:52 AM IST
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पहले भैंस व मूंगफली चुगाई मशीन बेची, फिर घर का सामान भी बेच डाला, किश्तें नहीं चुका पाया तो की आत्महत्या, हमें एक बार तो अपना दर्द बताता


मनोज पुरोहित/ रमेश सिगची |हनुमानगढ़/रावतसर

कर्ज नहीं भरने से अपने ही खेत में मौत को गले लगाने वाले किसान राधेश्याम के घर तीसरे दिन भी सन्नाटा पसरा रहा। एक किसान ने कर्ज नहीं भरने के कारण मौत को गले लगा लिया लेकिन हैरानी की बात ये है कि प्रशासन का कोई आला अधिकारी किसान परिवार की सुध लेने नहीं पहुंचा। हां, सांत्वना के रूप में प्रशासन की ओर से बुधवार को एक पटवारी अवश्य पहुंचा लेकिन परिजनों के आंसू एक मात्र बेटे के चले जाने से रुक नहीं रहे थे। विडंबना की बात ये है कि कर्जमाफी के मुद्दे पर सरकारें अपनी राजनीतिक रोटियां सेकती है। शिविरों में कर्जमाफी के प्रमाण-पत्र बांटे जाते हैं लेकिन हकीकत में किसानों को कितना लाभ मिल पाता है यह राधेश्याम की आत्महत्या के बाद साफ नजर आया। तीसरे दिन भास्कर की टीम मृतक किसान के गांव न्योलखी में उसके घर पहुंची तो पता चला राधेश्याम के आर्थिक हालात इतने खराब थे कि अपनी दुधारु भैंस, मूंगफली चुगाई की मशीन ही नहीं बल्कि अपने घर में बने कमरे का सामान तक बेच दिया फिर भी किस्त नहीं भर पाया और आहत होकर मौत को गले लगा लिया। अब राधेश्याम के चले जाने से महिलाओं की चीख-पुकार और बुजुर्गों की आंखों में कई सवाल तैर रहे थे मानो कह रहे हो क्या किसान होना गुनाह है क्या?

आमजन की तरफ से उठ रहे मदद के हाथ

राजस्थान जन चेतना मंच के जिाध्यक्ष एडवोकेट एमएल शर्मा, अनिल सिहाग व जिला परिषद सदस्य दुलीचंद अठवाल ने मृतक किसान के घर पहुंचकर परिजनों को दिलासा दिया। हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया। उनका कहना था कि सरकार की किसान विरोधी नीतियों का खामियाजा भूमिपुत्रों को भुगतना पड़ रहा है। इसके खिलाफ व्यापक जन आंदोलन कर आर पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। मृतक राधेश्याम अपने पिता की इकलौती संतान था। उसकी असमय मौत से वृद्ध पिता की आंखें पथरा सी गई हैं। उन्हें अब भी पुत्र के लौटने का इंतजार है। प|ी इंद्रादेवी का करुण क्रन्दन सुनकर पत्थर दिल भी पिघल जाए।

लाइव... बैंक ने 24.84 लाख के नोटिस भेजे, घर वाले परेशान होते, इसलिए किसान ने किसी को नहीं बताया

समय अपराह्न 3 बजे। रावतसर के गांव न्योलखी में मृतक किसान राधेश्याम के घर के आंगन में एक तरफ लगे छोटे से टैंट में कुछ लोग बैठे हैं। एक तरफ सन्नाटा पसरा है तो दूसरी तरफ महिलाओं की चीत्कार कई सवाल पूछ रही है पर जवाब किसी के पास नहीं। घर के आंगन में बैठे पुरुष मौन थे। पिता के आंखों से रह-रहकर आंसू निकल रहे थे तो पास में बैठे पुरुष ढांढस बंधा रहे थे। पिता शिवभगवान ने रूंधे गले से बताया कि बैंक से बार-बार नोटिस आ रहे थे। एक साल पहले 17 लाख 84 हजार रुपए जमा करवाने का नोटिस आया। बाद में पता चला कि ट्रैक्टर के भी 7 लाख रुपए भी ब्याज सहित बकाया हो गए हैं। कर्जे को लेकर राधे बहुत परेशान था, पर बेटे ने कभी भी अपनी परेशानी का जिक्र तक नहीं किया। अब हमारे पास सिवाय अफसोस के कुछ भी नहीं है। वहीं मौके पर पटवारी सिरदाराराम मृतक के घर पहुंचे हुए थे। बोले कि फर्दमौका बनाते हुए रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश मिले हैं।

किसान राधेश्याम ने लोन लेकर ही यह ट्रैक्टर खरीदा था, लेकिन किश्तें नहीं चुका पाया तो ट्रैक्टर भी बेचना पड़ गया। बैंक की ओर से किसान को लगातार नोटिस आते थे, जिससे वह दबाव में था।

ये 4 कारण बने आत्महत्या की वजह... पानी नहीं तो फसल बर्बाद हुई, लोन चुकाने को सारी जमीन भी बेच डाली

1. मृतक किसान राधेश्याम के परिवार के पास 48 बीघा सिंचित व असिंचित भूमि है। कृषि कार्य के लिए पंजाब नेशनल बैंक रावतसर से केसीसी बनाई। इसके बाद नियति के क्रूर चक्र से एक तरफ जहां कृषि उपज कम हुई वहीं फसलों का पर्याप्त मूल्य नहीं मिला।

2. कृषि कार्य के लिए ट्रैक्टर व जीप भी लोन पर थे। जीप तो फाइनेंस कंपनी वाले ले गए। शेष राशि की वूसली के लिए कोर्ट में चेक अनादरण का मुकदमा भी दायर कर दिया। हालात विकट हो गए।

3. किस्त भरने के लिए अपनी दुधारु भैंस व मूंगफली चुगाई की मशीन भी औने-पौने दामों में बेच दी। इतना ही नहीं घर का गुजारा चलाने के लिए मृतक ने मकान में बना एकमात्र पक्का कमरा तोड़कर उसका सामान भी बेच दिया।

4. जो कृषि भूमि है उसमें पर्याप्त सिंचाई पानी नहीं मिला, जिससे फसलें कम हुई। ऊपर से कृषि उपज का पर्याप्त भाव भी हासिल नहीं हुआ। इससे घर खर्च चलाना भी दुभर हो गया तो बैंक की राशि जमा करवाना अपने आप में मुसीबत बनता चला गया।

कर्जमाफी के दायरे में नहीं आता था, प्रशासन ने कोई नोटिस नहीं भेजा था: कलेक्टर जाकिर हुसैन ने इस मामले में बताया कि किसान ने पंजाब नेशनल बैंक से लोन ले रखा था लेकिन वह सरकार की कर्जमाफी की श्रेणी में नहीं आ रहा था। प्रशासन की तरफ से कोई नोटिस आदि नहीं भेजा गया था। मौके पर कोई सुसाइट नोट भी नहीं मिला है।

-मृतक किसान के पिता शिवभगवान

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