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4 गांवों के वाटरवर्क्स में नहीं स्थाई कर्मी, 5 माह से नहीं हो रही पानी की सप्लाई, टैंकरों का महंगा पानी खरीद पी रहे

2 वर्ष पहले
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एक तरफ सरकार गांवों में शुद्ध पानी उपलब्ध करवाने के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। वहीं दूसरी तरफ वाटर वर्क्स में स्थाई कर्मचारी नहीं होने से लोगों को नियमित रूप से पानी की सप्लाई नहीं मिल रही है। ऐसा ही माजरा देखा जा सकता है जिला मुख्यालय के पास के गांव 28 एलएलडब्ल्यू, पक्काभादवा, उत्तमसिंह वाल तथा सुभानवाला वाला में। इन गांवों में बने वाटर वर्क्स में एक को छोड़कर सभी में एक एक अस्थाई कर्मचारी महज दो हजार रुपए रखे हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अस्थाई कर्मचारी की मजबूरी यह होती है कि इतने कम रुपए में वे पूरी ड्यूटी कैसे दे। इसी का परिणाम है कि ये कर्मचारी अपने हिसाब से पानी की सप्लाई छोड़ते हैं। इस वजह से इन दिनों चारों गांवों में पेयजल सप्लाई नियमित रूप से नहीं हो रही है। वहीं बहुत कम सप्लाई दी जा रही है। इससे घरों में डिमांड के अनुसार पानी नहीं मिल रहा है। स्थिति यह है कि अब ग्रामीण आए दिन टैंकरों से पानी मंगवाते हैं, जबकि उन्हें एक टैंकर का करीब तीन सौ से चार रुपए देना पड़ता है। चारों गांवों में नियमित पानी की सप्लाई नहीं होने से करीब 20 हजार लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं पशुओं को नहलाने और पानी पिलाने में भी ग्रामीणों को दिक्कत आ रही है। इसके अलावा मकान बनाने सहित अन्य कार्य भी प्रभावित होते हैं।

इधर, मसानी के वार्ड 8 व 9 में 5 साल से पेयजल किल्लत: 2 किमी दूर से लाते हैं ग्रामीण

टिब्बी|सरकार गांवों में बिजली पानी आवास की मूलभूत सुविधाओं के विस्तार के लिए बड़े-बड़े दावे कर रही है वही कस्बे के समीपवर्ती गांव सलेमगढ़ मसानी की रोही में बसी बस्ती में पेयजल की किल्लत के चलते दावे खोखले नजर आ रहे हैं। जहा क्षेत्र नहरों से घिरा है फिर भी भीषण गर्मी में लोग पेयजल से महरूम है। जानकारी के अनुसार पांच साल से पेयजल की किल्लत गांव सलेमगढ़ मसानी रोही स्थित चक13 जीजीआर के वार्ड 8 व 9 के लाेग झेल रहे हैं। कस्बे के समीपवर्ती ढाणी तारासिहं वाली ढाणी से सटी सलेमगढ़ मसानी की रोही में स्थित बस्ती में पेयजल की किल्लत के चलते भीषण गर्मी में बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। इस बस्ती में 35 परिवार निवास कर रहे हैं, जिनके पास रहने के लिए मकान व बस्ती में जाने के लिए सड़क तो है लेकिन पेयजल की किल्लत हैं। इस बस्ती में ग्राम पंचायत के 2 नल लगे हुए हैं। दोनों नल काफी समय से खराब पड़े हैं। यहां रहने वाले 35 परिवार बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। बस्ती में रहने वाले लोग मजदूरी व पशुपालन कर अपना व परिवार का पोषण करते हैं। बस्ती में रहने वाले लोग पास ही के खेतों में लगे नलकूप या एक किलोमीटर स्थित ढाणी से पेयजल लाने के लिए मजबूर है। बस्ती के लोगों का कहना है कि बस्ती से मात्र दो किलोमीटर दूर पेयजल पाइप लाइन है। इस पाइप लाइन से इस बस्ती को जोड़ा जाए तो पेयजल की समस्या दूर हो जाएगी। ग्रामीणों ने पेयजल की समस्या के समाधान नहीं होने पर ग्रामीण आशा नाथ, कालूराम, सुखमन्द्र सिंह, राम सिहं, गौवर्धन, गुरमीत सिंह, नरेश कुमार, दाताराम, कृष्ण कुमार, संरपच ममता देवी, समाज सेवी नरेश कुमार शास्त्री, शिशपाल वर्मा भी माैजूद थे।

टिब्बी. ये हाल है गांव में पानी का। लोग मटकियां और बाल्टियां लेकर पानी का इंतजार करते हैं।

यहां जली मोटर: गांव 28 एलएलडब्ल्यू में वाटरवर्क्स में लगी मोटर जल गई। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार ने कम क्षमता की मोटर लगाई है। इस वजह से मोटर जल गई है। इस कारण और भी ज्यादा समस्या हो गई है। हालांकि ठेकेदार नई मोटर, डिग्गियां सहित कई काम किए हैं। फिर भी स्थिति में सुधार नहीं हो पाया। अब खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

स्थाई कर्मी है नहीं, अस्थाई मनमर्जी करते हैं, क्या करें

यहां के वाटरवर्क्स पर पानी सप्लाई के लिए कोई स्थाई कर्मचारी नहीं है। अस्थाई कर्मचारी अपनी मनमर्जी से ड्यूटी करते हैं। नियमित सप्लाई नहीं होने से लोग टैंकरों से पानी मंगवाते हैं। इससे आर्थिक नुकसान हो रहा है। ब्रदीनारायण जाखड़, जिलाध्यक्ष, राष्ट्रीय किसान संगठन

अगर ऐसी समस्या है तो समाधान करवाएंगे

इस संबंध में मेरे पास कोई शिकायत नहीं आई है। साथ अभी मुझे दस दिन ही हुए ज्वाइन किए को। अगर ऐसी बात है तो पता करके समस्या का समाधान कर उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं देने का प्रयास किया जाएगा। हरपाल सिंह, एक्सईएन, जलदाय विभाग

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