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‘बेेटियां बोलीं हमारे भाग्य में हैं अगर ख्वाबों के पर, तो बंधन भी बहुत हैं ’

एक वर्ष पहले
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अखिल भारतीय साहित्य परिषद व श्री जयलक्ष्मी साहित्य कला एवं नाटक मंच के संयुक्त तत्वाधान में रविवार को काव्य गोष्ठी का आयोजन पूर्व पार्षद वीना सैन की अध्यक्षता में किया गया। कवि बलविंद्र भनौत ने कविता ‘कोख बेटियों की कब्र तक बनती रहेगी’ पेश कर कन्या भ्रूण हत्या पर कड़ा प्रहार किया। लेखक विजय बवेेजा ने ‘अब चिड़ियों की चहचहाहट नहीं सुनती’ कविता सुनाकर बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण को कविता के माध्यम से पेश किया। मदन पारीक ने ‘हर दिन हो महिला दिवस’, नवदीप भनौत ने गजल ‘बेेटियां बोलीं हमारे भाग्य में हैं अगर ख्वाबों के पर, तो बंधन भी बहुत हैं’ पेश की। गोष्ठी में सुखविंद्र शर्मा, मनोहरलाल बंसल, वीना सैन, राकेश वर्मा, अनुराग अरोड़ा आदि उपस्थित थे। गोष्ठी का संयोजन विजय बवेजा ने किया। .

अखिल भारतीय साहित्य परिषद व श्री जयलक्ष्मी साहित्य कला एवं नाटक मंच द्वारा महिला की अध्यक्षता में हुई काव्य गोष्ठी
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