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भारत माला पर किसानों का विरोध, बोले-पंजाब की तरह मुआवजा दो, दोनों ओर सर्विस रोड भी बनाओ

Bhaskar News Network

Mar 17, 2019, 05:45 AM IST

Hanumangarh News - भास्कर संवाददाता| हनुमानगढ़ केन्द्र सरकार की योजना भारत माला प्रोजेक्ट के तहत जामनगर से अमृतसर तक निकलने वाले...

Rawatsar News - rajasthan news resist the farmers on the bharat mala pay as compensation as punjab make service road both sides
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भास्कर संवाददाता| हनुमानगढ़

केन्द्र सरकार की योजना भारत माला प्रोजेक्ट के तहत जामनगर से अमृतसर तक निकलने वाले नेशनल हाइवे का कार्य शुरू होने से पहले ही क्षेत्र के किसानों ने दिए जाने वाले मुआवजे को लेकर विरोध शुरू कर दिया है। अधिग्रहण होने वाली जमीनों के किसानों की मांग है कि उन्हें पंजाब व हरियाणा के तर्ज पर मुआवजा दिया जाना चाहिए लेकिन प्रोजेक्ट के अधिकारी उनकी सुनवाई नहीं कर रहे हैं। वहीं अधिकारियों की माने तो उनका कहना है कि हनुमानगढ़ में डीएलसी रेट कम होने के कारण किसानों को इसका फायदा नहीं मिल पाएगा। वहीं शनिवार को कलेक्ट्रेट सभागार में एसडीएम कपिल यादव की अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसमें चक एचएमएच व एनडीआर क्षेत्र के किसानों की आपत्तियां सुनी गई। एसडीएम ने बताया कि 60 किसानों की आपत्तियां सुनी गई हैं। इसमें प्रोजेक्ट के अधिकारी भी शामिल रहे। अधिकारियों ने कहा कि किसानों को नियमानुसार पूरा मुआवजा दिलवाया जाएगा।

यूं समझे मुआवजा वितरण- फिलहाल इस हिसाब से मिलेगा किसानों को लाभ : डीएलसी रेट, जो जिला स्तरीय कमेटी तय करती है। शहर और गांव की दूरी के हिसाब से फैक्टर तय किए जाते हैं। जो गांव शहरी सीमा से 30 किमी ऊपर है तो डीएलसी का चार गुणा और यदि 10 किमी के अंदर है तो लगभग ढाई गुणा,10-20 किमी के अंदर है तो डेढ़ गुणा, 20-30 है तो पौने दो, इससे ऊपर है चार गुणा मुआवजा देने का पैमाना तय किया गया है। सोलेशियम की राशि भी दो गुणा लगाई जाएगी। इसके बाद 12 प्रतिशत का ब्याज भी दिया जाएगा। पहला गजट नोटिफिकेशन से लेकर अवार्ड जारी होने तक मिलेगा।

किसानों की ये 3 बड़ी मांगें...परिषद के बराबर ही मिले राशि, पंजाब-हरियाणा की तरह ज्यादा मुआवजा दो

इस तरह समझें पूरा प्रोजेक्ट : जिले की 5 तहसीलों के 25 गांव शामिल

इस प्रोजेक्ट में राजस्थान की 9 तहसीलें शामिल हैं, जिसमें हनुमानगढ़ की सबसे ज्यादा हैं। इसमें कुल 25 गांव इस सड़क के अंतर्गत आते हैं। यानी जिले के किसानों की अधिक जमीनें इस प्रोजेक्ट के आती है। हनुमानगढ़ की तहसील संगरिया, हनुमानगढ़, टिब्बी, रावतसर, पीलीबंगा शामिल है वहीं श्रीगंगानगर जिले की सूरतगढ़ और बीकानेर की तीन तहसीलें लूणकरणसर, नोखा और बीकानेर तहसील शामिल हैं। हनुमानगढ़ जिले की कुल 357 हैक्टेयर भूमि से हाेकर यह नेशनल हाइवे गुजरेगा। इसमें से हनुमानगढ़ तहसील की 217 हैक्टेयर जमीन शामिल है।

किसानों को पूरा मुआवजा दिलाने का प्रयास किया जा रहा है


1.पंजाब-हरियाणा की तरह मिले भाव : किसान पंजाब-हरियाणा की तर्ज पर भाव देने की मांग कर रहे हैं यानी वहां की डीएलसी की तरह ही यहां मुआवजा दिया जाए लेकिन अधिकारियों का तर्क है कि पंजाब-हरियाणा में डीएलसी रेट दुगुने हैं। यदि रिवाइज कर भी दिया जाए तो जिनकी जमीन आ रही है उनको तो फायदा मिल जाएगा लेकिन बाकी सभी को भी टैक्स भरना पड़ेगा। ऐसे में किसानों को एनएच एक्ट 1956 के तहत और आरएसीटीएलएआरआर 2013 के तहत ही मुआवजा दिया जाएगा।

2.नगरपरिषद क्षेत्र के बराबर ही मिलनी चाहिए राशि : किसानों का आरोप है कि उन लोगों को अभी तक यह नहीं बताया गया कि उनकी जमीन का कितना मुआवजा मिलेगा। किसानों का आरोप है कि नगरपरिषद क्षेत्र में पड़ने वाली जमीन की कीमत सबसे ज्यादा बताई जा रही है, जबकि उन जमीनों में भी किसान फसल ही उगा रहे हैं, फिर उन लोगों के साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है। इसलिए सभी किसानों को नगरपरिषद क्षेत्र के बराबर ही राशि मिलनी चाहिए।

3.सड़क के दोनों तरफ चाहिए सर्विस रोड :वहीं किसानों की मांग है कि जहां जमीन अधिग्रहण हो रही है वहां सड़क के दोनों और सर्विस रोड बनाई जाए। क्योंकि उनके खेत दो टुकड़ों में बंट जाएंगे। वहीं अधिकारियों की माने तो 70 मीटर जमीन अधिग्रहित की जा रही है। क्योंकि रोड 70 मीटर चौड़ी है। जो सिक्स लेन रोड होगी। ऐसे में हर किसी को तो रास्ता नहीं दिया जा सकता लेकिन फिर भी एनएच के ऊपर स्तर पर इसके लिए लिखा गया है।

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