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उर्वरकों का भंडारण समय पर करें सहकारी समिति, ताकि किसान ना हो परेशान: इफको महाप्रबंधक

2 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | हनुमानगढ़

इफको की अाेर से बुधवार को कृषि विभाग के आत्मा सभागार में जिला सहकार सम्मेलन एवं इफको किसान मित्र क्लब के सदस्यों के लिए प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इसमें इफकाे जयपुर के संयुक्त महाप्रबंधक राजेंद्र खर्रा ने किसानों को परंपरागत खेती के साथ पाॅली हाउस, शेडनैट, िड्रप सिंचाई अादि आधुनिक तकनीक अपनाकर खेती करने पर बल िदया। उन्हाेंने कहा कि िमट्टी जांच करवाकर किसान खेत में उर्वरक का प्रयाेग करें। प्रिल (छोटा दाना) यूरिया की बजाय दानेदार (मोटा दाना) यूरिया सभी फसलों के लिए फायदेमंद हाेती है। उन्हाेंने सहकारी समिति के प्रबंधकों से आग्रह किया कि इफको उर्वरकों का समिति के गोदामों में पर्याप्त भंडारण किया जाए, ताकि सीजन में िकसानाें काे परेशानी न हाे। कृषि उपनिदेशक दानाराम गोदारा ने विभाग की योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। आत्मा परियोजना के निदेशक जयनारायण बेनीवाल ने विभाग की योजनाओं के साथ कपास की उन्नत खेती पर जानकारी देते हुए सही समय पर उच्च गुणवत्ता वाली दवा का सही मात्रा में छिड़काव करने के बारे में बताया। हनुमानगढ़ केंद्रीय सहकारी बैंक के प्रबंधक निदेशक सुरेश कुमार ने सहकारी समितियों के माध्यम से किसानाें को दिए जाने वाले कृषि ऋण वितरण योजना के बारे में जानकारी दी। इस माैके पर कृष्णलाल जैन, इफको के क्षेत्र उपप्रबंधक एमआर जाखड़, अनिल बिश्नाेई, नरेन्द्र मांझू, इफको एमसी ने विचार व्यक्त िकए।

इधर, कपास तकनीकी सप्ताह का आगाज, वैज्ञानिकों ने दिए खेती में नवाचार के गुर

संगरिया| ग्रामोत्थान विद्यापीठ कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से कपास तकनीकी सप्ताह का आयोजन किया गया। इसमें गांव भगतपुरा, भाकरावाली, ढ़ाबां, दीनगढ़, हरीपुरा, मालारामपुरा, ढोलनगर व सन्तपुरा के कपास उत्पादकों ने भाग लिया। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अनूप कुमार ने सभी किसानों का स्वागत करते हुए कपास कृषि तकनीकी सप्ताह के आयोजन की महत्ता पर प्रकाश डाला। स्वामी केश्वानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर के पूर्व अनुसंधान निदेशक डॉ. पीएल नेहरा ने कपास की शस्य तकनीकी पर डालते हुए तकनीकी के पूर्ण रुप से अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कृषि व्यवसाय का रुप लेती जा रही है। अत: कृषि लागत के साथ गुणवत्ता युक्त उत्पादन बहुत जरूरी है। क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र, श्रीगंगानगर के वैज्ञानिक डॉ. सुबोध बिश्नोई ने कपास में आने वाली दैहिकीय अनियमितताओं तथा उनसे निवारण की तकनीकी किसानों के साथ साझा की। किसानों की ओर से लाए गए पादप नमूनों की पहचान कर उनके समाधान सुझाए गए। प्रबंधक कमलेश भाई पटेल ने विभिन्न उत्पादों की जानकारी दी।

संगरिया. कार्यक्रम में भाग लेते हुए वैैज्ञानिक और किसान ।

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