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वाट्सएप ग्रुप में मैसेज डालते ही अस्पताल पहुंच जाते हैं रक्तदाता, 4 साल पहले हुई थी शुरुअात

Hanumangarh News - रामसिंहपुर| साेशल मीडिया पर दिन भर जहां अनावश्यक मैसेज भेजे जाने की की शिकायतें रहती हैं। लाेग अफवाह फैलाने वाले...

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 08:15 AM IST
Hanumangarh News - rajasthan news the hospital has reached the hospital after sending the message to the wattspeep group it was 4 years ago
रामसिंहपुर| साेशल मीडिया पर दिन भर जहां अनावश्यक मैसेज भेजे जाने की की शिकायतें रहती हैं। लाेग अफवाह फैलाने वाले मैसेज भी भेजते हैं। वहीं चार साल से साेशल मीडिया का उपयाेग लाेगाें की जान बचाने में किया जा रहा है। इससे न अस्पताल में भर्ती लाेगाें की जान बचाई जा रही है, बल्कि अामजन रक्तदान के प्रति जागरूक हाे रहे हैं। दरअसल प्रदेश में एक वाट्स-एप ग्रुप अापात स्थितियाें में रक्तदान के लिए काम कर रहा है। इसका लक्ष्य है राज्य के सभी जिलों सहित तहसील मुख्यालयों के अस्पतालों में जरूरतमंदाें को तुरंत खून उपलब्ध करवाना ताकि उनकी जान बचाई जा सके।

श्रीगंगानगर जिले सहित प्रदेश भर के सैकड़ाे लोग इस मुहिम में जुड़ रहे हैं। जाे एक मैसेज पर तुरंत अस्पताल पहुंचकर मरीज के लिए रक्तदान कर रहे हैं। नागौर जिले के 24 वर्षीय भजन लाल बिश्नोई ने बताया कि अाईएएस डॉ जितेंद्र सोनी की प्रेरणा से 1 मई 2015 को ‘रक्त कोष’ नाम से वाट्सअप ग्रुप बनाया गया। शुरुआत में इस ग्रुप में नेगेटिव ब्लड ग्रुप के लोग शामिल किए गए क्योंकि इस ग्रुप के रक्तदाता कम मिलते हैं। बाद में सभी ग्रुप के लोगों को इसमें शामिल कर लिया गया। धीरे-धीरे बीकानेर श्रीगंगानगर जयपुर हनुमानगढ़ सहित प्रदेश भर के लोग जुड़ने लगे। संख्या बढ़ने जिलेवार ग्रुप बनाए गए। वर्तमान में श्रीगंगनगर-हनुमानगढ़ जिले में ‘रक्त काेष गंगानगर 2’ वाट्स-एप ग्रुप भी रक्तदान के लिए काम कर रहा है।

सभी ब्लड बैंक ऑनलाइन एक दूसरे से जुड़ जाएं, ताकि जहां रक्त की उपलब्धता अधिक है, वहां से जरूरत वाली जगह तक अापूर्ति की जा सके। इस दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। रामगोपाल, सचिव, रक्तकोष।

स्वैच्छिक रक्तदान करने वाले महज एक प्रतिशत

भारत में साल में औसतन एक करोड़ यूनिट रक्त की आवश्यकता के मुकाबले 75 लाख यूनिट ही उपलब्ध है। देश में स्वैच्छिक रक्तदान मात्र 1% है। राजधानी दिल्ली में 53 ब्लड बैंक हैं। इसके बावजूद एक लाख यूनिट रक्त की कमी है। केंद्रीयकृत ब्लड बैंक के अभाव में जरूरत वाली जगह पर उपलब्धता के बावजूद रक्त नहीं पहुंचाया जा सकता।

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