परदादा और दादा एसएचओ थे और पिता एसपी, 5 बार असफल हुआ लेकिन जिद थी कि सिर्फ IPS ही बनना है...और छठीं बार में क्रैक कर लिया UPSC

मनोज पुरोहित

Apr 15, 2019, 01:10 PM IST

ऐसे जज्बे से अर्शदीप को मिली कामयाबी, बोला- तीसरी कक्षा में पिता को वर्दी में देख तय किया था, मैं भी वर्दी ही पहनूंगा

Hanumangarh Rajasthan news upsc civil services exam result now selected arshdeep for ips get 580 rank

हनुमानगढ़ (राजस्थान)। सिविल सर्विस में चयनित हुए अर्शदीप सिंह पहले ऐसे शख्स होंगे जिन्होंने अपने दादा-परदादा के नक्शे-कदम पर चलकर पुलिस सेवा में जाने का सपना संजोया जो अब जल्द ही पूरा होने वाला है। खास बात ये है कि इनके परिवार की तीन पीढ़ियां पुलिस महकमे में सेवाएं दे चुकी हैं और अब यह सिलसिला चौथी पीढ़ी में भी यूं ही चलेगा। दरअसल, अर्शदीप के परदादा, दादा, पिता यानी तीन पीढ़ियां पुलिस विभाग में सेवाएं दे चुके हैं और अब अर्शदीप का भी यह सपना पूरा होने जा रहा है। 29 वर्षीय अर्शदीप हाल ही में सिविल सर्विस में चयनित हुए हैं। उन्होंने सिविल सर्विस एग्जाम में 580वां रैंक हासिल किया है।

बड़ी बात ये है कि पुलिस सेवा में जाने का सपना पूरा करने के लिए अर्शदीप ने बीएसएफ में एसिस्टेंट कमांडर का पद तक छोड़ दिया। यही नहीं पांच बार असफल रहने के बावजूद छठे प्रयास में आखिरकार यह सफलता हासिल की। अपने पिता नरेंद्रपाल से प्रेरित होकर अर्शदीप ने यह मुकाम हासिल किया। अर्शदीप का पैतृक गांव श्रीगंगानगर जिले में गांव गुलाबेवाला हैं, वहीं हनुमानगढ़ के चक ज्वालासिंह वाला में उनके नाना का घर है। उन्होंने अपनी पूरी पढ़ाई भठिंडा, चंडीगढ़ और दिल्ली में पूरी की। फिल्हाल अर्शदीप पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में वकालत करते हैं।

अर्शदीप बोला- पिता को वर्दी में देख तय किया था, मैं भी वर्दी ही पहनूंगा, इसे जेहन में रखा


अर्शदीप की तीन पीढ़ियों की बात करें तो परदादा सरदार श्याम सिंह श्रीगंगानगर में एसएचओ थे। वहीं दादा जोगिंद्र सिंह चूरू में एसएचओ रहे। वहीं पिता नरेंद्र सिंह वर्तमान में बठिंडा के एसपी हैं। वहीं अर्शदीप बताते हैं कि पिता के अलावा मां सिमरणजीत कौर ने भी पढ़ाई के लिए उन्हें हमेशा तैयार रहने की प्रेरणा दी। स्कूल के समय से ही मेरा जुड़ाव खेल से रहा लेकिन घर का माहौल ऐसा था कि पुलिस सेवा ही सर्वोपरि थी। 2005 से 10 तक निशानेबाजी में कई प्रतियोगिताएं खेलीं पर सपना दूसरा था इसलिए पिता की प्रेरणा से पढ़ाई जारी रखी। चंडीगढ़ में बीए पूरी की फिर एमए दिल्ली में और एलएलबी दिल्ली में की। इसके बाद 2012 में बीएसएफ में एसिसेंट कमांडर के पद पर हुआ लेकिन ज्वाइन नहीं किया और पढ़ाई जारी रखी। इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से 2015-18 तक लॉ की। फिर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में प्रैक्टिस शुरू कर दी। इस दौरा कई परीक्षाओं में फेल भी हुआ पर सिविल सर्विस के एग्जाम देना जारी रखा। अब छठी बार में मेरा चयन हुआ।

तीसरी कक्षा में पिता को वर्दी पहने हुए देखा, तब ही ठान लिया पुलिस में जाना है

दरअसल, तीसरी कक्षा में जब अर्शदीप अपने पिता नरेंद्रपाल सिंह को पुलिस की वर्दी पहने हुए देखते तभी दिमाग में यह बात आती थी कि मैं बड़ा होकर ऐसी ही वर्दी पहनूंगा। धीरे-धीरे यह जज्बा और गहराता गया। पिता के कहने पर पढ़ाई में जुट गया लेकिन पुलिस अफसर बनने की ललक नहीं छोड़ी। आखिर अब सिविल सर्विस में चयन होने के बाद अब मेरा सपना पूरा हुआ है।

निशानेबाजी में 4 बार गोल्ड, वर्ल्डकप ट्रायल भी दिया पर पुलिस सेवा में ही जाना था

अर्शदीप बताते हैं कि उनकी खेल के प्रति बेहद रुचि रही। उन्होंने निशानेबाजी की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में 4 बार गोल्ड मैडल जीते। यहां तक की वर्ल्डकप ट्रायल भी दिया। मेरी मेहनत ने ही मुझे इस मुकाम तक पहुंचाया फिर मैंने सोचा कि ऐसी मेहनत पुलिस सेवा के लिए करनी है।

X
Hanumangarh Rajasthan news upsc civil services exam result now selected arshdeep for ips get 580 rank
COMMENT