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दृष्टिबाधित लवप्रीत को प्राइवेट में नहीं मिला प्रवेश, कहा- यह पास नहीं होगा सरकारी स्कूल में पढ़कर लाया 10वीं में 80.83%, बोला- मैं भी शिक्षक बनूंगा

Hanumangarh News - उपतहसील ढाबां के वार्ड 15 में रहने वाले मजूदर के दृष्टिहीन बेटे लवप्रीत सिंह ने दसवीं में 80.83 प्रतिशत अंक प्राप्त...

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 08:15 AM IST
Hanumangarh News - rajasthan news visually impaired lavpreet did not get admission in private said 8083 in 10th in the government school it will not pass spoken i will also become a teacher
उपतहसील ढाबां के वार्ड 15 में रहने वाले मजूदर के दृष्टिहीन बेटे लवप्रीत सिंह ने दसवीं में 80.83 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। ख़ास बात यह है कि राउमावि में पढ़ने वाले इस विद्यार्थी को हर कोई यह बात कहता था कि वह दसवीं कक्षा पास नहीं कर सकता। लेकिन लवप्रीत की मेहनत, जिद्द तथा जुनून ने यह मुकाम हासिल किया है।

उसके परिणाम से स्कूल स्टॉफ भी अचंभित है। लवप्रीत ने चार विषयों में विशेष उपलब्धि हासिल की है। उसने हिंदी में 95, विज्ञान में 84, सामाजिक विज्ञान में 85 व पंजाबी में 90 अंक प्राप्त किए। उसके पिता संता सिंह ने बताया कि उनका बेटा बचपन से ही पूर्ण दृष्टिहीन है। दसवीं बोर्ड परीक्षा में उसे हेल्पर के साथ अतिरिक्त समय भी दिया गया था। जब परीक्षा परिणाम आया तो परिजनों की ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था। लवप्रीत का एक छोटा भाई भी है जो बिलकुल सामान्य है। पंचायत समिति प्रधान रजनी मोहन मेघवाल, राजू और सरपंच गुरपास सिंह ने ऐसे बच्चों का विशेष सम्मान करने की बात कही।

लवप्रीत का सपना है कि वह 12वीं में इससे भी अधिक अंक लाए। उसने बताया कि वह एक आदर्श शिक्षक बनना चाहता है। ताकि उस जैसे मूक बधिर और दृष्टिहीन बच्चों को वह पढ़ा सके और उन्हें काबिल बना सके।

चाचा ने कहा- इंटरनेट से देखा, फिर बोलकर कराई पढ़ाई

चाचा गुरजंट सिंह ने उसको बचपन से बोल बोल कर पढ़ाई करवाई। चाचा की लगन के कारण ही उसे थोड़ा संबल मिला। उन्होंने कभी यूट्यूब पर तो कभी बोल बोल पर पाठ याद करवाया। लवप्रीत के परिजनों ने बताया कि दृष्टिहीन होने के कारण बचपन में उसे किसी भी स्कूल में एडमिशन नहीं मिला। काफी कोशिश के बाद उसे प्राइवेट स्कूल में दाखिला मिला। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण उसने सरकारी स्कूल में पढ़ाई की थी।

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