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बादलवाही व नमी से गेहूं में बढ़ा येलाेरस्ट का प्रकाेप, उत्पादन प्रभावित हाेने की अाशंका, विभाग बता रहा नियंत्रण के उपाय
जिले में गत दिनाें हुई ओलावृष्टि व बरसात के बाद अब तक माैसम खुला नहीं है। लगातार बादलवाही के कारण गेहूं की फसल में येलाेरस्ट का प्रकाेप देखने काे मिल रहा है। इससे उत्पादन प्रभावित हाेने की अाशंका है। इस कारण किसानों की िचंता बढ़ती जा रही है। कृषि विभाग के अधिकारी भी सतर्क हाे गए है। कृषि पर्यवेक्षकों काे नियमित रूप से खेताें में पहुंचकर किसानों काे राेग के लक्षण व नियंत्रण के उपाय बताने के लिए पाबंद किया गया है। इसके साथ कृषि अादान िवक्रेताअाें से भी किसानों काे जागरूक करने की अपील की गई है। कृषि अधिकारियाें काे प्रभारी नियंत्रण के लिए माॅनीटरिंग के िनर्देश दिए गए हैं। विभाग के अधिकारियाें के अनुसार लगातार बादलवाही के कारण येलाेरस्ट का प्रकाेप बढ़ता है। इससे उत्पादन प्रभावित हाेता है। समय पर राेग की पहचान कर नियंत्रण के लिए कवकीनाशी रसायन का छिड़काव किया जाना चाहिए। कृषि अादान विक्रेताअाें काे किसानों काे कवकनाशी रसायन उपलब्ध करवाने के िनर्देश िदए हैं।
कवकीनाशी रसायन का छिड़काव कर पाया जा सकता है काबू: येलाेरस्ट के प्रकाेप काे कवकीनाशी रसायन का छिड़काव कर काबू पाया जा सकता है। िवभागीय अधिकारियाें के अनुसार राेग के लक्षण दिखाई देने पर प्राेपीकाेनाजाेल अथावा टेबूकाेनाजाेल की एक मिली मात्रा या ट्राईफलाेक्सीस्ट्राेबिन व टेबूकाेनाजाेल की 0.60 ग्राम मात्रा एक लीटर पानी में घाेल कर स्प्रे करनी चाहिए। एक बार छिड़काव के बाद भी राेग पर नियंत्रण नहीं हाेता है ताे 10 से 15 दिन बाद दाेबारा स्प्रे की जानी चाहिए।
कृषि विभाग ने कहा- पीलापन व येलाेरस्ट राेग की पहचान जरूरी
कृषि विभाग के अधिकारियाें के अनुसार किसान येलाेरस्ट राेग की सही तरीके से पहचान नहीं कर पाते। गेहूं की फसल में नाईट्राेजन, जिंक, सल्फर अादि तत्वाें की कमी हाेने के कारण पत्तियाें का रंग पीला हाे जाता है। इस पर किसान फंगीसाईड का छिड़काव करना शुरू कर देते हैं। इस कारण राेग पर नियंत्रण भी नहीं हाेता अाैर किसानों काे अार्थिक नुकसान भी हाेता है। पाेषक तत्वाें की कमी के लक्षण तथा येलाेरस्ट के लक्षण अलग-अलग हाेते हैं। येलाे रस्ट में शुरूअात अवस्था में पाैधाें की पत्तियाें पर अालपिन के सिरे जैसे छाेटे-छाेटे चमकीले पीले रंग के उभरे हुए धब्बे बनते हैं। किसानों काे राेग की पहचान कर िनयंत्रण के प्रयास करने चाहिए।
इधर, पल्लू क्षेत्र में ओलावृष्टि की गलत रिपोर्ट देने का लगाया आरोप, सौंपा ज्ञापन
पल्लू| उपतहसील क्षेत्र में गत दिनों हुई ओलावृष्टि से हुए नुकसान को लेकर जिला परिषद सदस्य गौरीशंकर थोरी के नेतृत्व में नायब तहसीलदार को जिला कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंप कर मुआवजा दिलाने की मांग की है। ज्ञापन में ओलावृष्टि से सरसों गेंहू,जो, चना में हुए भारी नुकसान के लिए सही गिरदावरी कर पीड़ित किसानों को मुआवजा दिलवाने व बीमा क्लेम दिलवाने की मांग की। किसानों ने चेतावनी दी कि सरकार किसान को राहत देना चाहती है, जबकि राजस्व विभाग किसानों की अनदेखी कर रहा है, यह कतई किसान बर्दाश्त नहीं करेंगे । बिसरासर, केलनिया, कलासर, प्रेमपुरा, ढाणी बिजारणिया, ढाणी लेघान में ओलावृष्टि से बर्बाद हुई किसानों की फसल का उचित मुआवजा व बीमा क्लेम लेकर रहेंगे अन्यथा किसान प्रशासन के खिलाफ बड़ा आंदोलन करेंगे। ज्ञापन देने वालों में बिसरासर सरपंच प्रतिनिधि आदराम मुहाल, भंवरलाल बुडानिया विनोद सारण, शौकत अली, राधे स्वामी, राकेश सिद्ध, भानीराम बुडानिया, आसाराम सहित आदि किसान रहे मौजूद थे।
फील्ड स्टाफ काे खेताें का भ्रमण करने के लिए किया पाबंद: उपनिदेशक
अनुकूल माैसमीय परिस्थितियाें के कारण येलाेरस्ट का प्रकाेप बढ़ता है। समय पर नियंत्रण नहीं हाेने से उत्पादन प्रभावित हाे सकता है। एेसे में फील्ड स्टाफ काे खेताें का भ्रमण कर राेग के लक्षण दिखाई देने पर किसानों काे जागरूक करने के िनर्देश िदए गए हैं।
दानाराम गाेदारा, उपनिदेशक कृषि (विस्तार), हनुमानगढ़
गेहूं की फसल में येलाेरस्ट एक खतरनाक बीमारी है। इससे फसल में 70 प्रतिशत तक नुकसान हाे सकता है। रात में 7 से 13 डिग्री सेल्सियस तापक्रम तथा 85 से 100 प्रतिशत अार्द्रता व दिन में 15 से 24 डिग्री तापमान रहने पर येलाेरस्ट राेग बढ़ता है। राेग की शुरू की अवस्था में गेहूं के पाैधे की पत्तियाें पर अालपिन के सिरे जैसे छाेटे-छाेटे चमकीले पीले रंग के उभरे हुए धब्बे धारियाें में दिखाई देते हैं। ये बाद में पीसी हुई हल्दी जैसे पीले चूर्ण में बदल जाते हैं। पत्तियाें काे अंगुली से छूने पर पीले रंग का पाउडर लग जाता है। राेग की गंभीर अवस्था में यह राेग पाैधाें के तने, बालियाें तथा दानाें पर भी अटैक कर सकता है। इस कारण फसल काे भारी नुकसान हाेने का अंदेशा रहता है।
यूं समझें, कैसे बढ़ता है इस रोग का प्रकोप:15 से 24 डिग्री दिन में तापमान रहने से फैलता है येलाेरस्ट राेग