4 साल पहले हुआ दर्दनाक हादसा, सिर फटा-चकनाचूर हो गईं 22 हड्डियां, 32 दिन कोमा में, याददाश्त भी चली गई...पति के प्यार से मौत के मुंह से लौट आई पत्नी / 4 साल पहले हुआ दर्दनाक हादसा, सिर फटा-चकनाचूर हो गईं 22 हड्डियां, 32 दिन कोमा में, याददाश्त भी चली गई...पति के प्यार से मौत के मुंह से लौट आई पत्नी

ऐसे पति का प्यार पत्नी के लिए ऑक्सीजन साबित हुआ,  दोनों कहते हैं, एक-दूसरे का साथ कभी नहीं छोड़ेंगे

Bhaskar News

Feb 14, 2019, 01:44 PM IST
Rajasthan Shri Ganga Nagar News Today special story of Valentines Day Love chemistry of husband wife

श्रीगंगानगर (राजस्थान)। आज वेलेंटाइन डे है, यानी प्यार का दिन। तो चलिए बताते हैं आपको प्यार की ताकत जिसने साइंस को भी सोचने को मजबूर कर दिया। जिला अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ राजेश अरोड़ा और उनकी पत्नी महिला रोग विशेषज्ञ डॉ वीना अरोड़ा के प्रेम के आगे भगवान को भी झुकना पड़ा। 8 जनवरी 2015 को एक सड़क हादसे में डॉ वीना का सिर फट गया और दिमाग बाहर आ गया। शरीर की 22 हड्डियां टूटकर चकनाचूर हो गई थीं। चेहरा पिचक गया था, नाक और ठुड्डी भी टूट गई थी। आईसीयू में 32 दिन तक कोमा में रहीं और उसके बाद होश आया। शरीर का ऐसा कोई हिस्सा नहीं था, जहां पर गंभीर चोटें नहीं लगी हाें। सिर की चोट के कारण याददाश्त भी करीब-करीब चली गई थी।

चिकित्सा भाषा में इसे सीवियर हैड इंजरी विद मल्टीपल ट्रोमा फ्रैक्चर कहा जाता है। उनकी हालत देखकर सब यही दुआ कर रहे थे कि किसी न किसी तरह जान बच जाए। यहां तक कि उनका इलाज कर रहे न्यूरो सर्जन डॉ अजय मिश्रा और ऑर्थो सर्जन डॉ बीएम सहारण तक को इस बात का आश्चर्य है कि वे अब करीब 90 फीसदी तक ठीक हो गई हैं। ढाई महीने अस्पताल में इलाज के बाद डॉक्टरों ने यह कहते हुए छुट्टी दे दी कि अब इनकी सेवा करो। शायद ही दोबारा अपने पैरों पर खड़ी हो पाएं। लेकिन वह ठीक हुई और ये सब हुआ डॉ राजेश अरोड़ा के प्यार की बदौलत।


लव केमिस्ट्री...राजेश का प्यार वीना के लिए ऑक्सीजन साबित हुआ


डा.राजेश अरोड़ा बताते हैं, 8 जनवरी 2015 को मैं पत्नी वीना, बेटे इंजीनियर राहुल और सीए बेटी सोनल के साथ दोस्त के यहां कार्यक्रम में जा रहे थे। कार बेटा चला रहा था और बेटी आगे बैठी थी। गुलाबेवाला के पास कार अनियंत्रित होकर पेड़ से टकरा गई। कार में सवार हम तीनों को मामूली चोटें ही आई लेकिन डॉ वीना ने अपने बच्चों की सारी बलाएं खुद पर ले लीं। जब उनको अस्पताल लाया गया तब कोई नहीं कह रहा था कि वे अब बच पाएंगी भी या नहीं। डॉ अजय मिश्रा ने कहा कि दवा के साथ दुआ भी करो। शायद भगवान हमारी सुन लें। सीएमएचओ डॉ नरेश बंसल मेरे बैचमेट हैं। उन्होंने मुझसे कहा कि बालाजी महाराज से मन्नत मांगो,सब ठीक हा़े जाएगा। मैने भगवान से अपनी पत्नी की जिंदगी मांगी। ढाई महीने बाद हम उनको लेकर घर चले गए। उनकी याददाश्त चली गई थी और पूरे शरीर में फैक्चर थे। मैने और मेरे बच्चों ने लगातार छुट्टी लेकर उनकी सेवा की। फिजियोथेरेपी दी और घर में प्यार का माहौल बनाए रखा। भगवान की कृपा हुई और उनकी याददाश्त भी लौट आई। अब तो वे करीब 90 फीसदी तक स्वस्थ हैं और अपनी डयूटी भी जॉइन कर ली है। डॉ वीना बताती हैं कि अगर मेरे पति और बच्चे हिम्मत हार जाते तो शायद आज मैं इनके साथ न होती। ये मेरे पति के प्यार की ताकत है कि हम आज भी एक दूसरे को बखूबी समझते और प्यार करते हैं।

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