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हिंडौली देख जर्मनी की मेम बोली-दिस विलेज इज वेरी नाइस

विदेशियों को बूंदी जिले की संस्कृति खूब भा रही है। 3 दिन तक जर्मनी की मेम हिंडौली के एक परिवार की मेहमान बनकर रही...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 02:20 AM IST

हिंडौली देख जर्मनी की मेम बोली-दिस विलेज इज वेरी नाइस
विदेशियों को बूंदी जिले की संस्कृति खूब भा रही है। 3 दिन तक जर्मनी की मेम हिंडौली के एक परिवार की मेहमान बनकर रही तथा यहां की संस्कृति-सभ्यता को बारीकी से जाना। जर्मनी की मिरी मेम स्थानीय मेहमाननवाजी, रहन-सहन और पारंपरिक आवभगत से खासी प्रभावित हुई और कहा कि अवसर मिला तो एक बार फिर आएगी।

अब की बार वह परिवार के साथ आएंगी। मिरी ने हिंडौली क्षेत्र के कई दर्शनीय स्थलों का भ्रमण किया। तीन दिनों में विदेशी बाला ने कस्बे के पांडव कालीन हुुंडेश्वर महादेव, डूंगरी बालाजी व पाल बाग पर स्थित तेजाजी महाराज के दर्शन किए। राम सागर झील के तट पर बैठकर झील को निहारा। बारहदरी को देखकर तो विदेशी विदेशी मेम बोली दिस विलेज इज वेरी नाइस। हिंडौली के खटोड़ परिवार की मेहमान बनकर रही जर्मन की मिरी ने हाथों में मेहंदी भी रचाई। खटोड़ परिवार ने उसे 3 दिन तक बेटी की तरह रखते हुए सोमवार को जयपुर के लिए विदा किया। भारतीय परंपरा के तहत विदाई में कपड़े भी भेंट किए। वह शुक्रवार को ही हिंडौली पहुंच गई थी, जब से सोमवार तक यहीं रुकी।

एक बार फिर आएंगी बूंदी

मिरी मेम ने जाते हुए भी यही दाेहराया कि अवसर मिला तो वह एक बार फिर हिंडौली व बूंदी के पर्यटनस्थलों को निहारने के लिए परिवार के साथ आएगी। वह संत गंगरावल महाराज मंदिर पर भी गई।

जर्मन की मिरी जयपुर में जर्मनी लैंग्वेज की टीचर है। मिरी 3 माह के लिए जयपुर में जर्मनी की लैंग्वेज सिखाने आई हुई है। हिंडौली खटोड़ परिवार की चेल्सी जयपुर में मिरी से जर्मन लैंग्वेज का कोर्स कर रही है। चेल्सी अपने गांव हिंडौली आ रही थी। जब चेल्सी ने मिरी मेम को बताया कि वह हिंडौली (बूंदी) जा रही है। मिरी बूंदी के पर्यटन स्थलों की से वाकिफ थी, तो उसने भी साथ चलने की बात कही। इससे वह चेल्सी के साथ हिंडौली आ गई।

3 दिन के प्रवास में खूब भाया हिंडौली, बोली-अब दुबारा परिवार के साथ आएंगी

हिंडौली/बूंदी। महादेव के दर्शन के बाद दर्शनार्थियों के साथ फोटो खिंचवाती जर्मनी मेम मिरी।

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