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इटावा में कलशयात्रा के साथ भागवत कथा प्रारंभ

इटावा में सोमवार को कलशयात्रा के साथ भागवत कथा प्रारंभ हुई। कथा में प्रथम दिन संत प्रेम नारायण ने कहा कि आज परिवार...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 06, 2018, 02:20 AM IST

इटावा में सोमवार को कलशयात्रा के साथ भागवत कथा प्रारंभ हुई। कथा में प्रथम दिन संत प्रेम नारायण ने कहा कि आज परिवार में कड़वाहट मनमुटाव संबंधों में टकराव, अहं की भावना आदि दुर्गुणों ने पैर पसार लिए हैं इसलिए आज घर घर में रावणरुपी राक्षस ने घर-घर अपना जाल बिछा लिया है घर परिवार की सुख शांति को ग्रहण सा लगा दिया है।

उन्होंने कहा कि गृहस्थ आश्रम सबसे श्रेष्ठ है संबंधों में कड़वाहट से संबंधों की शांति सुख गायब सी हो गई है , जहां लोग घर में सब एक दूसरे का आदर सम्मान करेंगे, प्रेम करेंगे, एक दूसरे का सहयोग करेंगे तभी बच्चों में अच्छे संस्कार आ पाएंगे और वह श्रेष्ठ भारत के निर्माण के लिए एक योग्य नागरिक बन पाएंगे। इसके लिए हमें सबसे पहले स्वयं को सभी प्रकार के व्यसन विकारों से मुक्त करना होगा और ईश्वर से जुड़ना होगा। उन्होंने कहा कि मनुष्य को जीवन में कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। जिस व्यक्ति की सोच अच्छी होती है उसकी दुनिया में पहुंच अच्छी होती है। उन्होंने बताया कि भजन करने से शरीर में ऊर्जा बढ़ती हैं तथा उसका लाभ महत्वपूर्ण हो जाता है। उन्होंने कहा कि सच्चे प्रेम में समर्पण की आवश्यकता होती है। हर कार्य को करने से पहले कुछ समय विचार करना चाहिए। यह करूं, इससे किसी का अहित तो नहीं होगा। किसी का अहित हो ऐसा कार्य नहीं करना चाहिए। कभी किसी निर्बल को मत सताओ। निर्बल की अंतर्मन से निकली आह कभी-कभी सताने वाले का पूर्ण विनाश कर देती है।

धर्म

संत प्रेम नारायण ने कहा: पहले स्वयं को व्यसन विकारों से मुक्त करना होगा

गणपति स्थापना के साथ प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम का शुभारंभ

सुल्तानपुर टाकरवाडा देवजरी महादेव के स्थान पर नवीन मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का शुभारंभ सोमवार को गणपति स्थापना के साथ किया गया। अध्यक्ष अटल बिहारी सुरेलिया ने बताया कि नवीन मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में 5 फरवरी से 14 फरवरी तक विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। जिसके तहत 9 फरवरी को माता पूजन किया जाएगा। 10 फरवरी को तेलों की रस्म अदा की जाएगी। 11 फरवरी को गंगा पूजन कर कलश यात्रा का आयोजन किया जाएगा। साथ ही मूर्ति को नगर भ्रमण कराया जाएगा। 12 फरवरी को हवन यज्ञ का आयोजन होगा व मूर्ति को जलाधिवास कराया जाएगा। 13 फरवरी को अन्नाधिवास के साथ ही रात्रि जागरण व भजन संध्या का आयोजन राधे म्यूजिकल ग्रुप मून्दला द्वारा किया जाएगा। 14 फरवरी को शिव विवाह के बाद महाप्रसाद का आयोजन किया जाएगा।

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