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कालीसिंध नदी से रात में निकाली जाती है बजरी, दिन में ट्रैक्टरों से होती है सप्लाई

सांगोद व उपखंड मुख्यालयों के बीच बहने वाली कालीसिंध नदी बजरी माफियाओं की स्थली बन गई है। यहां अवैध खनन का काम...

Danik Bhaskar | Jan 17, 2018, 03:50 AM IST
सांगोद व उपखंड मुख्यालयों के बीच बहने वाली कालीसिंध नदी बजरी माफियाओं की स्थली बन गई है। यहां अवैध खनन का काम पिछले दो वर्षों से चल रहा है, इससे बजरी माफियाओं की पौ बारह हो रही है।

यहां पर बजरी माफियाओं द्वारा सारे नियम एवं सुप्रीम कोर्ट के आदेश ताक में रखकर ग्रेवल की एसटीपी लेते हुए रातभर बजरी का अवैध खनन किया जा रहा है। ये रात के अंधेरे में नदी से बजरी निकालकर एकत्रित कर लेते हैं तथा इसे दिन के उजाले में ट्रैक्टरों के माध्यम से सप्लाई कर मोटी रकम कमाते हैं। खनन विभाग कोटा व रामगंजमंडी की कार्यवाही भी इस काम में लगे माफियाओं के कदमों को नहीं रोक पा रही है। इससे राज्य सरकार को भी रवन्ना व ट्रैक्स नहीं मिलने से प्रतिमाह लाखों रुपए का चूना लग रहा है। इसी तरह चरेल, बूढ़नी के पास भी परवन नदी से बजरी निकासी का काम बेरोकटोक जारी है। कई बार इन गांवों के लोग खनिज विभाग को लिखित में शिकायत कर चुके हैं। जिस पर एक-दो बार खनिज विभाग रामगंजमंडी की टीम ने वहां पहुंचकर एकत्रित किए गए बजरी के स्टॉक को जब्त कर जुर्माना राशि वसूल कर अपने काम की इतिश्री कर ली, लेकिन ये काम फिर से धड़ल्ले के साथ हो रहा है।

ग्रेवल की एसटीपी लेकर बजरी का हो रहा खनन: सूत्रों के अनुसार कनवास तहसील के कालीसिंध नदी किनारे बसे गांवों में अवैध खनन हेतु कोटा की एक मैसर्स द्वारा ग्रेवल खोदने के लिए रामगंजमंडी खनिज विभाग से स्वीकृति ली है, लेकिन इसकी मिलीभगत से मामोर, सलोनिया, कलमंडी में नदी के अंदर जेसीबी मशीन एवं डंपरों के माध्यम से रातभर का स्टॉक एकत्रित किया जा रहा है।

तहसीलदार से शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं: क्षेत्र के ग्रामीणों द्वारा तहसीलदार कनवास को शिकायत करने पर जांच में पाया कि खनन विभाग ने ग्राम कलमंडी में ग्रेवल खुदाई की स्वीकृति कोटा की एक मैसर्स को दी दे रखी है, जबकि ग्रेवल खुदाई का कार्य कालीसिंध नदी की एक गैर मुमकिन जगह चल रहा है। वर्तमान में कालीसिंध नदी में अवैध खनन जोरों पर है। पुलिस एवं खनन विभाग मूकदर्शक बना हुआ है।

जहां की एसटीपी है, वहां तो खड़ी है फसल: कनवास तहसीलदार सत्यनारायण बसवाल ने बताया कि खनिज विभाग ने जिस जगह ग्रेवल खुदाई के लिए एसटीपी जारी की है। शिकायत के बाद जांच की तो इस खसरा नंबर में तो सरसों की फसल खड़ी मिली है। उन्होंने पुष्टि करते हुए बताया कि इस मामले की जांच रिपोर्ट जिला कलेक्टर कोटा व माइनिंग इंजीनियर को भिजवा दी है।

फर्राटे भरते निकल जाते हैं बजरी से भरे वाहन: सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना में सांगोद, कनवास पुलिस कालीसिंध, परवन नदी से बजरी निकासी पर पूरी तरह से रोक लगाने के प्रति गंभीर है। कई बार पुलिस इन नदियों में जाकर माफियाओं को पकड़कर कार्यवाही करती है। कालीसिंध नदी के किनारे के गांवों में यह काम नावों के माध्यम से कुछ लोग करते हैं। पुलिस ने कई बार इनकी नावें भी जब्त की, लेकिन ये काम नहीं रुका। कई बार तो गश्त के दौरान ही बजरी से भरे ट्रैक्टर व अन्य वाहन फर्राटे भरते हुए निकल जाते हैं। बाद में पुलिस को इनका पीछा करके उन्हें बरामद करना पड़ता है।

निर्माण मजदूर यूनियन की बैठक में उठा बजरी का मामला: इटावा. निर्माण मजदूर यूनियन सीटू तहसील इटावा की बैठक मंगलवार को यूनियन कार्यालय खाती कॉलोनी नगरपालिका के पास अध्यक्ष बजरंगलाल महावर की अध्यक्षता में हुई। बैठक में अध्यक्ष महावर ने कहा कि जब से सरकार ने बजरी पर रोक लगाई है, तब से क्षेत्र का हर मजदूर परेशान है तथा काम नहीं मिल पा रहा है। जिसके कारण श्रमिकों के सामने राेजी-रोटी की समस्या पैदा हो गई है। बैठक में महामंत्री मुरारीलाल बैरवा व सत्यनारायण महावर ने बताया कि सरकार द्वारा बजरी पर लगाई गई रोक के चलते निर्माण मजदूरों को कार्य करने में आ रही परेशानी व अन्य समस्याओं पर विचार-विमर्श किया गया तथा अपनी मांगों को लेकर 19 जनवरी को प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम उपखंड अधिकारी को ज्ञापन देने का निर्णय लिया गया। बैठक में विधि सचिव रामनारायण पहाड़िया, सचिव राकेश महावर, सत्यनारायण महावर, कोषाध्यक्ष गोपाललाल महावर, महामंत्री मुरारीलाल बैरवा, प्रेमशंकर बैरवा, रामकिशन महावर, हजारीलाल, राजू, द्वारिकाप्रसाद महावर, रामचंद्र महावर, कमलाबाई, सुशीलाबाई, मंजूबाई, सुगनाबाई सहित कई श्रमिक मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री के नाम बजरी की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन: सुल्तानपुर. कस्बे के पंचायत समिति मुख्यालय पर निर्माण मजदूर यूनियन सुल्तानपुर के सदस्यों ने बजरी पर लगी रोक को शीघ्र हटाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। निर्माण मजदूर यूनियन के अध्यक्ष तालिम हुसैन व दुलीचंद मीणा ने बताया कि बजरी पर रोक होने के कारण निर्माण कार्य ठप पड़े हैं। इससे मजदूर भी बेरोजगार हो गए हैं। मजदूर यूनियन के सदस्य मंगलवार को चंबल कॉलोनी में एकत्रित हुए। वहां से रैली के साथ पंचायत समिति मुख्यालय पहुंचे और बजरी पर लगी रोक को शीघ्र हटाए को लेकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

सांगोद. कालीसिंध नदी से कलमंडी, सलोनियां व मामोर गांव के समीप अवैध तरीके से बजरी निकालने के बाद लगा रेत का ढेर।

इधर, बजरी पर रोक होने से निर्माण कार्य ठप

बपावर. पीएचसी भवन का निर्माण कार्य रेत के अभाव में हो रहा अवरुद्ध।

बपावर| बजरी पर रोक लगी हुई होने से क्षेत्र में होने वाले कई निर्माण कार्य ठप पड़े हुए हैं। ऐसा ही एक नजारा का नजारा बपावर की आदर्श पीएचसी भवन बनवाने में दिखाई दे रहा है।

यहां कमरों की अभाव होने से निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन रेत के अभाव में काम ठप पड़ा है। भवन के कमरों के लिए बेसिक फाउंडेशन की खुदवाई के बाद कार्य नहीं होने से मरीजों को भी परेशानी हो रही है। बजरी के अभाव में निर्माण से संबंधित सरकारी व गैर सरकारी निर्माण कार्यों पर निर्भर ठेकेदार, कारीगर बेरोजगारी के दौर से गुजर रहे हैं। वहीं कस्बेवासियों ने सरकार सेे अतिशीघ्र बजरी उपलब्ध करवाने की आवाज उठाई है।