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भगवान सज्जनों के लिए दीनबंधु हैं और दुष्टों के कालस्वरूप: संत प्रेमनारायण

इटावा। नगर के कोटा रोड पर भागवत कथा के पांचवें दिन शुक्रवार को संत प्रेमनारायण ने कहा कि भगवान अनुभव से ही समझ में...

Danik Bhaskar | Feb 10, 2018, 04:45 AM IST
इटावा। नगर के कोटा रोड पर भागवत कथा के पांचवें दिन शुक्रवार को संत प्रेमनारायण ने कहा कि भगवान अनुभव से ही समझ में आते हैं। भगवान आत्मा के रूप में बुद्धि के दृष्टा और प्रेरक हैं। आदर्शनिष्ठ व अनुभवी माता-पिता ही कृष्ण जैसा पुत्र पा सकते हैं।

पुतना मां बनकर भगवान को धोखा देने के लिए आई थी। भगवान को धोखा नहीं दिया जा सकता। भगवान सज्जनों के लिए दीनबंधु हैं और दुष्टों के काल स्वरूप हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को भरपूर प्यार देना चाहिए, लेकिन उनकी गलत आदत छुड़ाने का प्रय| हमेशा करना चाहिए। बालक के निर्माण में मां की अहम भूमिका होती है तथा उसका विशेष उत्तरदायित्व होता है। उन्होंने कहा कि महापुरुषों की कथनी का अनुसरण करना चाहिए। मानव शरीर तो कर्म से बना है। जैसे स्वर्ण से आभूषण, मिट्टी से बर्तन बनते हैं उसी प्रकार कर्म से ही मनुष्य का शरीर बनता है। शरीर को कर्म रहित करना असंभव है। इसी प्रकार ज्ञान प्राप्त करने से कुछ नहीं होता है। उसे व्यावहारिक रूप में अमल में लाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पाप मनुष्य को पतन की ओर ले जाता है, इसलिए मनुष्य को सदैव सदकार्य करने चाहिए।

सुल्तानपुर. कस्बे के विजय हनुमान मंदिर परिसर में संगीतमय श्री नानी बाई रो मायरो कथा वाचन महायज्ञ महोत्सव शुक्रवार से शुरू हुआ। पदमा शर्मा ने नरसी जी का जीवन परिचय देते हुए कहा कि नरसी जी जन्म से गूंगे बहरे थे। साथ ही उनके माता पिता की भी बीमारी से मौत हो गई थी। इनका लालन पालन दादी ने किया था। साधु संतों व भगवान के आशीर्वाद से नरसी जी बोलने लगे और उन्हें भगवन की भक्ति प्राप्त हुई। 600 वर्ष पूर्व भगवान नरसीजी ने कृष्ण भक्ति में लीन होकर 56 करोड़ की सम्पत्ति को परमार्थ के काम में लगा कर एक वर्ष में ही समाप्त कर दिया। उन्होंने परमार्थ की सेवा व कृष्ण भक्ति को नहीं छोड़ा व गरीबों की सेवा में लगे रहे। नरसी को जब भी मदद की जरूरत हुई तो भगवान कृष्ण ने स्वयं आकर उनकी मदद की।