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19 से 11वीं रैंक पर जिला, पांच साल में 18.90%सुधरा रिजल्ट

एक ऐसी मेधावी बेटी ने सफलता के परचम लहराए जिसको एक हादसे के कारण अपने दोनों हाथ गंवाने पड़े। समेल निवासी अंजू रावत...

Bhaskar News Network| Last Modified - Jun 12, 2018, 03:50 AM IST

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19 से 11वीं रैंक पर जिला, पांच 
 साल में 18.90%सुधरा रिजल्ट
एक ऐसी मेधावी बेटी ने सफलता के परचम लहराए जिसको एक हादसे के कारण अपने दोनों हाथ गंवाने पड़े। समेल निवासी अंजू रावत आटूण स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर राजकीय बालिका आवासीय विद्यालय में पढ़ती है। उसने 58 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। दिसंबर 2010 में खेत पर मवेशी चराने के दौरान छठीं में पढ़ रही अंजू का एक हाथ 11 हजार केवी लाइन के झूलते तारों से चिपक गया। हाथ छुड़ाने के प्रयास में दूसरा हाथ भी करंट की चपेट में आ गया वह बेहोश हो गई। बाद में दोनों हाथ काटने पड़े। लगभग पांच साल तक घर पर ही रहने के बाद पिता सोहन सिंह से पढ़ने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि तुम्हारे दोनों हाथ ही नहीं है। तुम कैसे पढ़ोगी, कैसे लिखोगी। अंजू ने पापा से कहा कि आप चिंता मत कीजिए। मेरा काम मैं खुद करूंगी। लेकिन पढ़ूंगी जरूर। फिर खुद ही पैंरों से लिखने लगी। पैंरों से लिखते हुए देख बच्चों व शिक्षकों को भी अचरज हुआ। नवीं कक्षा में अंजु ने आटूण आवासीय विद्यालय में प्रवेश लिया। जहां से उसने दसवीं की परीक्षा दी। सोमवार को घोषित परिणाम से विद्यालय परिवार ने भी खुशी जताई।

सफलता का पायदान छूने की कहानी पैरों से लिखकर पढ़ने वाली अंजू की मुस्कुराहट व जज्बे से समझिए

भीलवाड़ा। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के सोमवार को घोषित परिणाम में भीलवाड़ा को प्रदेश में 11वीं रैंक मिली है। हमारे लिए खुशी की बात यह है कि पांच सालों से लगातार प्रदर्शन सुधर रहा है। इसका असर जिले की रैंकिंग पर पड़ा है। पिछले साल के प्रदर्शन में 4.33 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ आठ स्थान का सुधार करते हुए भीलवाड़ा की रैंकिंग प्रदेश में 10वें नंबर पर पहुंच गई है।

मुस्कुराहट

हमारी सफलता का पैमाना यह है कि 2014 में जहां परिणाम 62 फीसदी था उसके बाद 2015 में 75%, 2016 में 75.57% और 2017 में हम 76.57 प्रतिशत पर पहुंचे। इस सत्र में 4.33 प्रतिशत का सुधार कर 80.90 फीसदी परिणाम हािसल किया।

जज्बा

सत्र 2018 में जिले में 520 सरकारी माध्यमिक स्कूलों में विषय अध्यापकों सहित 800 शिक्षकों के पद खाली थे। गांव में बेटियों को पढ़ने के लिए 10 से 15 किमी दूर तक जाना पड़ता है। तमाम मुिश्कलों के बावजूद हमारे विद्यार्थियों ने जज्बा दिखाते हुए बेहतर परिणाम दिया।

सफलता

साल दर साल बेहतर परिणाम देने और मुश्किलों से लड़ने का नतीजा यह है कि जिले में स्कूली शिक्षा की तस्वीर पूरी तरह से बदल गई है। औसत रहने वाला जिला अब प्रदेश के बेहतर शिक्षा वाले जिलों में शुमार हो रहा है। जिले के 12वीं परिणाम भी लगातार बेहतर रह रहे हैं।

5889 छात्र-छात्राओं को मिली प्रथम श्रेणी

संसाधन व शिक्षकों की कमी बाधक नहीं बनी

80.90%

जिले की स्कूली शिक्षा की तस्वीर ही बदल गई

कुल रिजल्ट

5 साल से लगातार सुधर रहा प्रदर्शन

81.79%

छात्रों की स्थिति-रिजल्ट :80.15%

80.15%

छात्राएं उत्तीर्ण

छात्र उत्तीर्ण

मजबूरी को ताकत बनाया... किशोर गृह में रहे बालमुकुंद-राहुल को प्रथम श्रेणी

पारिवारिक कारणों से किशोर गृह में रहने को मजबूर दो भाईयों ने प्रथम श्रेणी प्राप्त की। दोनों ने समान अंक प्राप्त किए हैं। किशोर गृह अधीक्षक हेमंत खटीक के अनुसार, जहाजपुर क्षेत्र के बाल मुकुंद वैष्णव एवं राहुल वैष्णव बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष डॉ. सुमन त्रिवेदी के समक्ष पेश हुए।अपनी पारिवारिक समस्या बताई। फिर प्रवेश मिला। बाल मुकुंद व राहुल ने एक दूसरे से अधिक अंक लाने की प्रतिस्पर्धा करते हुए पढ़ाई की। अध्ययन के दौरान कोई समस्या आने पर एक दूसरे की मदद करने से भी नहीं चूकते थे। सोमवार को घोषित परिणाम में दोनों भाईयों ने 60 प्रतिशत अंक प्राप्त किए।

लक्ष्य पर निशाना... जहाजपुर की स्वाति को 96.87% अंक, जिले में सबसे ज्यादा

जहाजपुर | स्वाति पुत्री चंद्रशेखर सोनी ने 96.87 प्रतिशत अंक हासिल किए। स्वाति ने कहा कि उसने लक्ष्य तय कर लिया था। इसे हासिल करने के लिए रोज 4 घंटे पढ़ती थी। सनराइज पब्लिक सैकंडरी स्कूल में अभिनंदन किया गया। भुवनेश गौतम ने स्वाति व उसके माता-पिता को माला पहनाई। संस्था प्रधान अशोककुमार ने 5000 रुपए नकद पुरस्कार देने की घोषणा की। इस दौरान स्कूल निदेशक अशोक कुमार, शिक्षाविद कैलाशचंद्र पंचोली, चंद्रप्रकाश पंचोली आदि मौजूद थे।

श्रमिक की बेटी टीना के 90 फीसदी

कांगनी | राउमावि कांगनी की छात्रा टीना मंसूरी ने 10वीं दसवीं बाेर्ड परीक्षा मेेें 90 प्रतिशत अंक हासिल किए। टीना की मां शाहिदा बेगम आंगनबाड़ी कार्यकर्ता है। पिता पीरू माेहम्मद मंसूरी मजदूरी करते हैं। टीना ने बताया कि वह प्रत्येक विषय को एक घंटा समय देती थी। मां दिव्यांग है इसलिए घर के काम में टीना सहयोग करती है। माता-पिता की इच्छा है कि बेटी कलेक्टर बने।

बदनौर की तनीषा 91.17% लाई

बदनौर | रतन चौक में चाय की थड़ी लगाने वाले पवनकुमार अग्रवाल की बेटी तनीषा ने 10वीं बोर्ड में 91.17 प्रतिशत अंक हासिल किए। तनीषा राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय की छात्रा है। तनीषा स्कूल के अलावा घर पर सुबह एक घंटा और रात में दो घंटे नियमित पढ़ाई करती थी। बाकी समय में थड़ी पर जाकर पिता का हाथ बंटाती है। तनाव दूर करने के लिए वह टीवी देखती है।

फ़र्स्ट डिवीजन 2921

सैकंड डिवीजन 5466

थर्ड डिवीजन 2291

छात्राओं की स्थिति- 81.79 %

रजिस्टर्ड छात्रा: 13324

फ़र्स्ट डिवीजन 2968

सैकंड डिवीजन 4760

थर्ड डिवीजन 1479

छात्रों की स्थिति - 80.90 %

रजिस्टर्ड छात्र: 25021

फ़र्स्ट डिवीजन 5889

सैकंड डिवीजन 10226

थर्ड डिवीजन 3770

परीक्षा दी: 11257

एपियर: 24581

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