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कथा के चौथे दिन कृष्ण जन्मोत्सव की झांकी सजाई

कोटड़ी | सगतपुरिया के धर्मस्थल श्रीबैकुंठधाम जुझार धणी में भागवत कथा के चौथे दिन शनिवार को श्रीकृष्ण जन्म की लीला...

Dainik Bhaskar

May 20, 2018, 03:55 AM IST
कथा के चौथे दिन कृष्ण जन्मोत्सव की झांकी सजाई
कोटड़ी | सगतपुरिया के धर्मस्थल श्रीबैकुंठधाम जुझार धणी में भागवत कथा के चौथे दिन शनिवार को श्रीकृष्ण जन्म की लीला का वर्णन किया। इस दौरान झांकी में जैसे ही कंस की जेल में कृष्ण ने जन्म लिया, पांडाल जयकारों से गूंज उठा। नंदोत्सव के दौरान तो पांडाल खुशी से झूम उठा। बधाइयां गाईं और एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया। टॉफियां व खिलौने बांटे गए।

कथा वाचक पं. भगवतीकृष्ण महाराज ने कहा कि संसार का कल्याण करने के लिए भगवान अवतार लेते हैं। जब-जब धर्म की हानि होती है, तब सज्जनों का कल्याण और राक्षसों का वध करने के लिए भगवान प्रगट होते हैं। कथा वाचक ने संगीतमय चौपाई जब-जब होई धर्म की हानि, बाढहि असुर अधम अभिमानी से भाव विभोर कर दिया।




जहाजपुर

पुण्य कमाना ही जीवन की असली संपदा: बाल व्यास कार्तिक कृष्ण

सिंगोली चारभुजा | सिंगोली श्याम परिवार की ओर से भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के दूसरे दिन कथावाचक पं. कार्तिक कृष्ण महाराज ने कहा कि पुण्य ही इंसान के जीवन की असली संपदा है।अगर व्यक्ति सोचता है कि बेटा बुढ़ापे का सहारा बनेगा तो उसका ये सोचना गलत है। इंसान का पुण्योदय है तो दुश्मन भी सेवा करेगा। अगर पुण्योदय नहीं है तो बेटा भी छोड़कर चला जाएगा। महाराज ने कहा कि हम भाग्यशाली है जो पवित्र पुरुषोत्तम मास में कथा सुनने का अवसर मिल रहा है। सिंगोली सहित कई गांवों से लोग कथा सुनने पहुंचे।

नशा नहीं करने का लिया संकल्प

जहाजपुर | बंदी छोड़ कबीर साहिब की दया से बारा देवरा के पास वैष्णव वाटिका में शनिवार को संत रामपाल के सान्निध्य में मंगल प्रवचन संपन्न हुआ। जिसमें सभी धर्मशास्त्र के आधार पर भक्तिमार्ग एवं पूर्ण परमात्मा के सशरीर होने का प्रमाण दिया। संत रामपाल ने सत्संग में बताया कि सच्ची भक्ति पूर्ण संत की शरण में जाने से ही मिलती है। जो कि तत्वदर्शी संत होता है और उनके बताए नाम स्मरण से मोक्ष हो सकता है। कार्यक्रम में 20 नए लोगों ने संत से नाम लेकर सही भक्ति मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। सत्संग में सुरेश दास, कैलाश दास, मंसा दास, मिश्री दास व अन्य कई भक्तों ने सेवाएं दी। सभी श्रद्धालुओं ने नशा नहीं करने व दहेज नहीं लेने का संकल्प लिया।

कथा के चौथे दिन कृष्ण जन्मोत्सव की झांकी सजाई
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