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जयपुर (विनोद मित्तल). सरकारी नौकरी की आस लगाए बैठे विद्यार्थी मित्रों सहित 12 लाख उन अभ्यर्थियों को झटका लगा है, जिन्होंने विद्यालय सहायक भर्ती के लिए आवेदन किया था। सरकार ने हाल में विधानसभा में एक प्रश्न के उत्तर में बताया है कि यह भर्ती रद्द हो चुकी है। दूसरी ओर, अभ्यर्थी यह समझ रहे थे कि इस भर्ती का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और उम्मीद कर रहे थे कि उनके हक में फैसला आ सकता है। बता दें कि पांच साल पहले 21 जुलाई, 2015 को राज्य सरकार ने संविदा पर काम कर रहे विद्यार्थी मित्रों के समायोजन के लिए यह भर्ती निकाली थी। इसमें 33,493 पद थे। इन पदों के लिए 12,03,013 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था।
शिक्षा सहायक से विद्यालय सहायक तक यूं आगे बढ़ी प्रक्रिया
27 हजार विद्यार्थी मित्रों के लिए 2013 में 33 हजार पदों पर शिक्षा सहायक भर्ती निकाली गई। इसमें एक साल के अनुभव के लिए 10, दो साल पर 20 व 3 साल पर 30 अंक देने का प्रावधान था। बोनस अंकों को लेकर विवाद हुआ और मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। तत्कालीन सरकार ने 13 दिसंबर 2014 को शिक्षा सहायक भर्ती रद्द कर इसके स्थान पर 33,493 पदों पर विद्यालय सहायक के नाम से नई भर्ती की घोषणा की। इसमें वर्ष के अनुभव के हिसाब से 5, 10 और 15 अंक और साक्षात्कार के 15 अंक का प्रावधान रखा गया। यह भर्ती भी पुरानी भर्ती की तर्ज पर बोनस अंकों के विवादों में फंस गई और मामला फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। अब तक कोर्ट से किसी प्रकार का निर्णय नहीं अाया है। विधानसभा में यह जानकारी मिली है कि यह भर्ती रद्द हो चुकी है।
सामान्य के लिए 275 रुपए शुल्क, रिजर्व कैटेगिरी के लिए 175 रुपए
इस भर्ती में सामान्य, ओबीसी और एमबीसी (क्रीमीलेयर) के लिए शुल्क 275 रुपए, एससी, एसटी, ओबीसी (नॉन क्रीमीलेयर) के लिए 175 रुपए निर्धारित किया गया था। आवेदनों से ही सरकार के खाते में 25 करोड़ रुपए जमा हो गए। एफडी के हिसाब से इस राशि का पांच साल का ब्याज ही पांच करोड़ रुपए बन रहा है।
पिछली सरकार ने किया था निरस्त: मंत्री
सरकारी लापरवाही के कारण विद्यालय सहायक भर्ती पांच साल से कोर्ट में अटकी हुई है। शुल्क लौटाने और भर्ती रद्द होने की सूचना कभी दी ही नहीं गई। -अशोक सिहाग, प्रदेश संयोजक, राजस्थान
विद्यार्थी मित्र शिक्षक संघ विद्यालय सहायक भर्ती का विज्ञापन वर्ष 2015 में जारी किया गया था। इसको पूर्ववर्ती सरकार ने ही निरस्त कर दिया था। -बीडी कल्ला, कैबिनेट मंत्री
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