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नहर में लाशों का ढेर: 4 जिलों में इंदिरा गांधी नहर में 7 साल में 1383 शव मिले, सिर्फ 191 की ही पहचान

5 महीने पहले
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इंदिरा गांधी नहर 649 किमी लंबी है ।
  • जनवरी 2010 से मई 2017 तक 1383 शव मिले, सड़ी-गली और कटी-फटी होने से 90 फीसदी शवों की शिनाख्त तक नहीं हुई
  • गुमशुदा लोगों की रिपोर्ट और हुलिया से शव का मिलान किया जाता है, पोस्टमाॅर्टम करवा कर विसरा लेकर एफएसएल के लिए भेजा जाता है

बाड़मेर (लाखाराम जाखड़). राजस्थान से लगते पंजाब बॉर्डर से जैसलमेर के मोहनगढ़ तक 649 लंबी इंदिरा गांधी नहर में 7 साल में मिली 1383 लोगों की लाशों में से 1192 लोगों की मौत रहस्य बन कर ही रह गई है। लाशें उगलती नहर में इन लोगों की मौत के बाद मिले शवों की पहचान तक नहीं हुई है। सड़ी-गली और कटी-फटी होने से 90 फीसदी शवों की शिनाख्त तक नहीं हुई। मिलने वाले शवों में हत्या थी या फिर आत्महत्या, इसके राज नहर के पानी में ही डूब गए हैं।  


पुलिस की ओर से इन लाशों की शिनाख्त के भी कोई सार्थक प्रयास नहीं होते हैं। नहरी अधिकारी या कई किसान शव को देखने के बाद भी पुलिस को सूचना नहीं देते हैं। वे शव को पानी में ही आगे सरका देते हैं। इंदिरा गांधी नहर का पानी अपराध छिपाने की आसान जगह बन चुकी है। यही वजह है कि हत्या जैसे संगीन अपराध में भी शवों को नहर में फैंक दिया जाता है। सड़ा-गला शव सैकड़ों किमी तक नहर में बह कर चला जाता है और जब मिलता है तो उसकी शिनाख्त तक नहीं हो पाती है। इंदिरा गांधी नगर में जनवरी 2010 से मई 2017 तक  1383 शव मिले, जिसमें 1192 शवों की पहचान नहीं हुई। सबसे ज्यादा श्रीगंगानगर में 721 शव मिले, जिसमें महज 67 की शिनाख्त हुई, 654 की नहीं हुई। हनुमानगढ़ में 427 शव मिले, जिसमें 71 की शिनाख्त हुई, 356 की नहीं हुई। बीकानेर में 155 शव मिले, सिर्फ 19 की शिनाख्त हुई, 136 की नहीं हुई। जैसलमेर में 80 शव मिले, जिसमें 34 की शिनाख्त हुई, लेकिन 46 की नहीं हुई।

पिछले सात साल में इंदिरा गांधी नहर में मिले शव :

यह हो रहा है इंदिरा गांधी नहर में :

सरका दी जाती हफ्ते बाद गलने लगता है: हई।

शव मिलने के बाद पुलिस को यह करना होता है
शव मिलने के बाद फर्द कब्जा लेकर धारा 174 में रपट दर्ज कर अनुसंधान किया जाता है। प्रदेश सहित सभी थानों को सूचना भेजनी होती है। गुमशुदा लोगों की रिपोर्ट व हुलिया से शव का मिलान किया जाता है। पोस्टमार्टम करवा कर विसरा लेकर एफएसएल के लिए भेजा जाता है। पहचान नहीं होने पर 72 घंटे बाद अंतिम संस्कार पुलिस कर सकती है। डीएनए के सैंपल भी संबंधित पुलिस थाने में सुरक्षित रखने के निर्देश है। मृतक की सामग्री को सुरक्षित रखा जाता है।

पहचान के लिए विसरा, डीएनए सैंपल रखते हैं: एसपी
बीकानेर एसपी प्रदीप मोहन शर्मा ने बताया कि नहर में मिलने वाले अधिकतर शव सड़े-गले ज्यादा होते है, ऐसे में पहचान नहीं हो पाती है। शव मिलने के बाद सभी थानों को उसके मैसेज भेजते हैं। गुमशुदा लोगों के हुलिया और फोटो से लाश की मिलान भी करते है। विसरा, डीएनए सैंपल भी रखे जाते है ताकि मृतक की पहचान हो सके।

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