वर्ल्ड हार्ट डे / हर साल 25 लाख मौत हार्ट डिजीज से, भारत में इससे 26% मौतें



2.5 million deaths per year from heart disease
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2.5 million deaths per year from heart disease

  • कम उम्र के युवाओं को भी घेर रही यह बीमारी
  • कोरोनरी आर्टरी डिजीज, दिल का दौरा प्रमुख

Sep 29, 2018, 08:40 AM IST

जयपुर. दिल को कैसे जवां रखा जाए, किस तरह उसे बीमारियों से दूर रखा जा सकता है और मौजूदा हालात में किस तरह दिल की बीमारियां हो रही हैं और डॉक्टर्स के पास कब जाएं... वर्ल्ड हार्ट डे से पूर्व राजस्थान के कार्डियोलॉजिस्ट ने विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से आमजन को जागरुक किया।

2030 तक यह आंकड़ा 30 मिलियन तक हो जाएगा

  1. डॉक्टर्स के मुताबिक, यूं तो भारत में हार्ट डिजीज से हो रही मौतों का कोई आंकड़ा नहीं है, लेकिन दुनिया में 25 लाख लोगों की मौत का कारण हार्ट डिजीज है। नारायणा हॉस्पिटल के डॉ. राहुल शर्मा और डॉ. अंकित माथुर ने बताया कि वर्ष 2030 तक यह आंकड़ा तीन करोड़ तक हो जाएगा। 

  2. वहीं भारत में इन मौतों की 26 प्रतिशत मौत हार्ट डिजीज से हो रही हैं। सबसे ताज्जुब की बात यह कि 18 साल तक की उम्र के युवाओं को हार्ट डिजीज हो रही हैं। इनमें कोरोनरी आर्टरी डिजीज, दिल का दौरा प्रमुख हैं।

  3. ये गलतियां बिलकुल नहीं करें

    सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अशोक गर्ग ने बताया कि एंजाइना को छाती में भारीपन, असामान्य दबाव, तेज दर्द, जलन, ऐंठन के अहसास के रूप में पहचाना जा सकता है। कई बार इसे अपच या हार्ट-बर्न समझने की गलती भी हो जाती है। इसलिए लापरवाही नहीं करें। 

  4. एंजाइना कंधे, बांहों, गर्दन, गले, जबड़े या पीठ में भी महसूस की जा सकती है। बीमारी के दूसरे लक्षण छोटी-छोटी सांस आना, धड़कनों का तेज होना, कमजोरी या चक्कर आना, उल्टी आने का अहसास होना और पसीना आना भी हो सकते हैं।  

  5. साइलेंट किलर भी है अटैक

    डॉ. राहुल शर्मा ने बताया कि दिल का दौरा आने पर इसके लक्षण आधे घंटे तक या इससे ज्यादा समय तक रहते हैं। साथ ही आराम करने या दवा खाने से भी आराम नहीं मिलता। लक्षणों की शुरुआत मामूली दर्द से होकर गंभीर पीड़ा तक पहुंच सकती है। 

  6. कुछ लोगों में हार्ट अटैक का कोई लक्षण सामने नहीं आता, जिसे हम साइलेंट मायोकार्डियल इन्फेक्शन यानि एमआई कहते हैं। ऐसा आमतौर पर उन मरीजों में होता है, जो डायबिटीज से पीड़ित होते हैं।

  7. इंडियन हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक, भारत में होने वाले कुल हार्ट अटैक का 50 प्रतिशत 50 से कम उम्र और 25 प्रतिशत 40 से कम उम्र के लोगों में होता है। गांवों की अपेक्षा शहर के लोग इस बीमारी के प्रति ज्यादा जागरूक हैं।

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