मंडे पॉजिटिव / पालनागृह में छोड़े गए 43 बच्चों को कनाडा और अमेरिका में मिल गया अपना आशियाना



दो दिन पहले महिला चिकित्सालय में पालने में मिली नवजात। दो दिन पहले महिला चिकित्सालय में पालने में मिली नवजात।
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दो दिन पहले महिला चिकित्सालय में पालने में मिली नवजात।दो दिन पहले महिला चिकित्सालय में पालने में मिली नवजात।

  • राजधानी में पिछले 15 दिन में दो बच्चियां लावारिस हालत में मिल चुकी हैं
  • पौने दो साल की बात करें तो ऐसी 27 लावारिस लड़कियां मिली हैं
  • जिन्हें उनके अपनों ने छोड़ा, उनके लिए कई घरों के दरवाजे खुल गए हैं

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2019, 01:46 AM IST

जयपुर. जयपुर में पिछले 15 दिन में दाे बच्चियाें काे लावारिस छाेड़ कर चले गए। दाे दिन पहले एक नवजात महिला चिकित्सालय में पालने में मिली। वहीं, दूसरी बच्ची घाट की गुणी टनल में लावारिस मिली। दाेनाें ही बच्चियाें के परिजनाें का अभी तक पता नहीं चला है। एेसे ही मामलाें काे लेकर भास्कर ने पड़ताल की ताे सामने अाया कि पिछले पाैने दाे साल में 27 एेसी लावारिस लड़कियां मिली हैं। जयपुर में जनवरी 2018 से अब तक बेघर हुए 43 बच्चों को कनाडा और अमेरिकी की फैमिली गोद ले चुकी हैं। इनमें 16 लड़के व 27 लड़कियां हैं। शहर में 6 पालनाघर हैं। गांधी नगर स्थित राजकीय शिशु एवं बालिका गृह में 2018 से अब तक 171 लावारिस बच्चे आए। 

 

केस-1; ब्लेडर की समस्या थी, एक साल पहले कनाडा की फैमिली ने गोद लिया

राशि (बदला हुआ नाम) को 2016 में किसी ने सड़क किनारे लावारिस छोड़ा गया था। मोती डूंगरी थाने ने उसे गांधी नगर स्थित राजकीय शिशु गृह में दाखिल कराया था। बच्ची को ब्लेडर की समस्या थी। बच्ची शौच नहीं कर पाती थी। कई दिनों तक जेके लोन में उपचार चला। 2018 में उसे कनाडाई फैमिली ने गोद लिया है।

 

केस-2; 2017 में सरकारी हाॅस्पिटल में छोड़ी गई, 2018 में अमेरिका चली गई

माही (परिवर्तित नाम) को 2017 में किसी ने फागी स्थित सरकारी हॉस्पिटल के पालना गृह में छोड़ा गया था। पुलिस काे सूचना दी गई। पुलिस ने उसे गांधीनगर शिशु गृह में दाखिल कराया। 2018 में यूएसए फैमिली ने गोद ले लिया। बच्ची यूएसए में गोद लिए परिवार के साथ रह रही है और स्वस्थ है। 
 

 समाज से हमारी अपील है कि बच्चों को लावारिस नहीं छोड़ें। इसके लिए शहर में 6 जगह पालनाघर बने हुए हैं, जो फैमिली पारिवारिक कलह के कारण बच्चों को छोड़ना चाहती है, वो भी बाल कल्याण समिति के सामने बच्चे को सौंपें। हम खुशी खुशी से उन बच्चों को रखेंगे। छोड़ने वाले की जानकारी भी सार्वजनिक नहीं की जाती है।

पंवार किरण के., राजकीय शिशु गृह की अधीक्षक 

 

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