राजस्थान / जयपुर डिस्कॉम की सैंट्रल टेस्टिंग लैब में 500 करोड़ के मेटेरियल की जांच की नहीं होती है 'निगरानी'



500 crores of material is not investigated in the Central Testing Lab of Jaipur Discom
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500 crores of material is not investigated in the Central Testing Lab of Jaipur Discom

  • यहां पर दस इंजीनियर व कर्मचारी पांच साल से भी ज्यादा समय से लगे हुए है

Dainik Bhaskar

Jul 12, 2019, 02:01 PM IST

श्याम राज शर्मा जयपुर. डिस्कॉम की सैंट्रल टेस्टिंग लैब (सीटीएल) में हर साल 500 करोड़ के ट्रांसफार्मर, केबल, कंडक्टर, इंसुलेटर सहित अन्य मैटेरियल की जांच होती है, लेकिन यहां पर निगरानी का कोई इंतजाम ही नहीं है। यहां पर दस इंजीनियर व कर्मचारी पांच साल से भी ज्यादा समय से लगे हुए है। लंबे समय से लगे कर्मचारियों ने पिछले दिनों केबल के सैंपल बदलने के बाद हुए बयानों में खुद यह गुनाह कबूल किया है। हालांकि इंजीनियरों की मिलीभगत के बिना सैंपल बदलना नामुमकिन है, लेकिन इंजीनियरों को बचाने के लिए जिम्मेदारों को सस्पेंड करने के बजाए एपीओ कर खानापूर्ति कर दी। अब मामले को  दबाया जा रहा है। 


सीटीएल के इंचार्ज एक्सईएन राकेश दुसाद का कहना है कि सैंपल की जांच का काम एक्सईएन व जेईएन के स्तर पर होता है। सैंपल बदलने के मामले को दिखवाया जा रहा है। 

 

3 करोड़ की एक हजार मीटर की घटिया केबल सप्लाई, कार्रवाई नहीं  
जयपुर डिस्कॉम ने विश्वकर्मा स्थित ठोलिया केबल्स कंपनी को एक हजार किलोमीटर केबल सप्लाई करने के लिए 3 करोड़ रुपए का वर्क ऑर्डर दिया। बदला गया सैंपल बारां सर्किल के स्टोर से आया था। टेस्टिंग में कोटा व बारां के सैंपल फेल होने के बावजूद फर्म के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। 


इस मामले पर ठोलिया केबल्स के अनूप ठोलिया का कहना है कि सैंपल बदलने को लेकर मुझे कोई जानकारी नहीं है। सैंपल फेल होते रहते है। यह कोई बड़ी बात नहीं है। 

 

दफ्तरों में सीसीटीवी कैमरा, लैब में कोई निगरानी नहीं  
जयपुर डिस्कॉम की मेटेरियल मैनेजमेंट (एमएम) विंग में पांच साल पहले टेस्टिंग के लिए आए मीटर बदलने व मीटर जलाने का मामला सामने आया था। इसके बाद एमएम विंग के दफ्तर में सीसीटीवी कैमरा लगाए दिए और दफ्तर में आने वालों की मॉनिटरिंग सख्त कर दी। लेकिन सीटीएल में 500 करोड़ के सामान  की क्वालिटी जांच को लेकर कोई मॉनिटरिंग ही नहीं है। यहां पर सप्लायर कंपनियों के दबाव में सीसीटीवी कैमरा भी नहीं लगाए। माना जा रहा है कि सीसीटीवी कैमरा लगा होता तो केबल सैंपल बदलने पर अब तक कार्रवाई हो चुकी होती।

 
केवल 4 फीसदी सैंपल ही होते है फेल
डिस्कॉम की सैंट्रल टेस्टिंग लैब में हर महीने ट्रांसफार्मर, केबल, कंडक्टर, इंसुलेटर सहित अन्य मेटेरियल के 3000 सैंपल टेस्टिंग के लिए आते है। लेकिन इसमे से करीब 120 सैंपल ही फेल होते है। आरोप है कि ज्यादातर सैंपल मैनेज करने के बाद ही टेस्ट होते है। ऐसे में फेल के बजाए पास होने की रिपोर्ट आती है।

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