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जीका वायरस / खौफ में शहर: आठ और मामले सामने आए, आंकड़ा बढ़कर पहुंचा 50 पर



8 More Test Positive for Zika Virus in Jaipur, taking total number of Cases
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8 More Test Positive for Zika Virus in Jaipur, taking total number of Cases
  • स्वाइन फ्लू और डेंगू के बाद अब जीका वायरस का खौफ  

Dainik Bhaskar

Oct 13, 2018, 04:23 PM IST

जयपुर। प्रदेश में जीका वायरस का खौफ थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। शनिवार को जीका के आठ और मामले सामने आने से प्रशासन में हड़कंप मच गया है। ये दो मामले मुरलीपुरा और विद्याधर नगर सहित शहर के अलग-अलग इलाकों से आए हैं। इसके साथ ही शहर में जीका वायरस का आंकड़ा बढ़कर 50 हो गया है। 

पूरा शहर जीका की जद में!

  1. इससे पहले शुक्रवार को जयपुर में जीका के दस और मरीज सामने आने के बाद आंकड़ा बढ़कर 42 हो गया था। जयपुर को छोड़ दें तो देश में जीका के सिर्फ 4 मामले सामने आए हैं। शुक्रवार को दस मामलों में से आठ शास्त्रीनगर में, वहीं दो केस सिंधीकैंप क्षेत्र स्थित राजपूत हॉस्टल में सामने आए। उल्लेखनीय है कि स्वाइन फ्लू में राजस्थान पहले ही देश में नंबर 1 और डेंगू में पांचवें नंबर पर है।

  2. जीका का एपिक सेंटर बनने के बाद शहर के पर्यटन को खासा नुकसान हो रहा है। जयपुर आने वाले पर्यटकों में 25 से 30 फीसदी की गिरावट आई है। का के मामलों को देखते हुए डॉक्टरों की छुटि्टयां रद्द कर दी गई हैं। जल्द ही डब्ल्यूएचओ की टीम जयपुर आएगी। शहर में जीका वायरस के मरीजों की संख्या 50 तक पहुंच गई है, लेकिन मच्छरों को रोकने की विभाग की तमाम कोशिशें विफल हो रही हैं।

  3. नगर निगम का दावा है कि शास्त्रीनगर और प्रभावित इलाकों में 2 टाइम फोगिंग करवाई जा रही है। सवाल यह उठ रहा है कि इससे भी जीका बेलगाम क्यों हो रहा है और अगर प्रभावित इलाकों में फोगिंग हो रही है तो मामलों में बढ़ोतरी कैसे हो रही है। भास्कर ने पड़ताल की तो पाया कि डब्ल्यूएचओ के अनुसार 6 तरह के केमिकल से फोगिंग की जानी चाहिए, जबकि जयपुर में केवल पायरोथ्रेम का ही इस्तेमाल हो रहा है।

  4. बता दें कि पिछले 20 सालों में मच्छरों को खत्म करने के लिए जिन संसाधनों और केमिकल का उपयोग किया जाता था, मच्छरों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने से वे अब बेअसर होते जा रहे हैं। ऐसे में विभाग सिर्फ पायरोथ्रेम ही काम में ले रहे हैं। उसकी मात्रा का भी उन्हें अंदाजा नहीं है। नियमानुसार घरों के अंदर और खुले में अलग मानकों पर फोगिंग की जानी चाहिए। 

  5. अधिकारियों को ही नहीं पता, क्या काम में ले रहे हैं 

    नगर निगम के अधिकारियों को यह जानकारी ही नहीं है कि फोगिंग में कौनसा केमिकल कितनी मात्रा में काम में लिया जाना चाहिए। घर के अंदर और बाहर किस स्तर पर फोगिंग करें, जिससे मच्छर मर जाएं और लोगों की सेहत भी न बिगड़े। 

  6. केमिकल को लेकर डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइंस

    • केमिकल इनडोर आउटडोर 
    • डेल्टामेथेरिन यूएल 0.5 0.5 1.0 
    • डेल्टामेथेरिन ईडबल्यू 0.05 01 
    • लेम्बडा-साइक्लोरिथिन ईसी 1-2 2 
    • मेलाथियोन ईडबल्यू एंड यूएल 112-600 112-600 
    • पेरामिथिन, एस-बायोलेरिथिन 0.55-0.73 - 
    • एंड पाइपोरिनिल बूटोक्साइड 
    • डीडी, ट्रांस साइपेनोथिरिन ईसी 0.1-0.2 3.5-4.0 

  7. जानलेवा लापरवाही 

    • होना चाहिए: भास्कर ने पड़ताल की तो सामने आया कि डब्ल्यूएचओ के अनुसार तो इंडोर और आउटडोर में फोगिंग होनी चाहिए। 
    • ये कर रहे: सिर्फ सड़कों पर ही फोगिंग की जा रही है जबकि मच्छर तो कोनों में छिपे होते हैं। 
    • होना चाहिए: 6 कीटनाशकों का अलग-अलग मात्रा में उपयोग किया जाना चाहिए। 
    • ये कर रहे: सिर्फ पायरोथ्रेम का ही इस्तेमाल हो रहा, जो नाकाफी है। 
    • कोई पायरोथ्रेम बता रहा तो कोई मेलाथोइन ईडब्ल्यू, यूएल 

  8.  केमिकल के बारे में पूछा गया तो निगम के कुछ अधिकारियों ने पायरोथ्रेम के इस्तेमाल के बारे में बताया। बोले-काफी समय से यही उपयोग कर रहे हैं। कुछ अधिकारी बोले-फोगिंग में मेलाथोइन ईडब्ल्यू और यूएल काम में लिया जा रहा है। मात्रा पर चुप्पी साध ली। 

  9. डब्ल्यूएचओ की मानें तो 6 केमिकल चाहिए

    जीका वायरस पर पुलिस का पहरा सिंधी कैंप का राजपूत हॉस्टल खाली शास्त्री नगर के बाद सिंधी कैंप राजपूत हॉस्टल में जीका वायरस के मरीज मिलने के बाद यहां खलबली मची हुई है। हॉस्टल में रहने वाले ज्यादातर छात्र हॉस्टल छोड़कर भाग गए हैं। वहीं, पीड़ित छात्र पुलिस पहरे में हैं, ताकि इनसे वायरस आगे नहीं फैले। 

  10. वायरस से प्रभावित इन इलाकों में दहशत 

    शहर के शास्त्री नगर-लाल चौक, भट्टा बस्ती इलाके में शिव शक्ति नगर, विद्याधर नगर सेक्टर एक के आसपास के इलाके, अंबाबाड़ी फौजी बस्ती, नया खेड़ा कच्ची बस्ती, दुर्गापुरा महारानी फार्म गायत्री नगर, लुहारों का खुर्रा, बास बदनपुरा, चांदपोल सीकर हाउस इलाका, दरबार स्कूल का क्षेत्र, सांगानेर में मुहाना मंडी के सामने क्षेत्र मलेरिया व डेंगू की चपेट में आ रहे हैं। इन इलाकों के दहशतजदा लोगों का कहना है कि यहां रहने में डर लगने लगा है। 
     

  11. क्या है जीका वायरस, कैसे चपेट में लेता है?

    एडीज मच्छर के काटने से होता है। शारीरिक संबंध बनाने और खून चढ़ाने से भी इसके फैलने की संभावना रहती है। गर्भवती मां से गर्भस्थ शिशु में जा सकता है।

     

    पहचान किस तरह हो सकती है?
     

    जीका के भी डेंगू व उस जैसी बीमारियों से मिलते-जुलते लक्षण ही होते हैं। सिरदर्द, बेचैनी, जोड़ों में दर्द, बुखार होना जीका के लक्षण हैं।

     

    कंटेंट : संदीप शर्मा

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