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नींदड़ योजना : रेवेन्यू बोर्ड मान चुका- मंदिर माफी की नहीं, जमीन किसानों की है

नींदड़ आवासीय योजना के लिए अवाप्त की जा रही मंदिर माफी की जमीन में नया विवाद सामने आया है।

Dainik Bhaskar

Dec 04, 2017, 07:05 AM IST
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जयपुर. नींदड़ आवासीय योजना के लिए अवाप्त की जा रही मंदिर माफी की जमीन में नया विवाद सामने आया है। जेडीए की ओर से सबसे पहले बसाए जाने वाले ब्लॉक के लिए अधिग्रहीत की गई जमीन का मंदिर माफी रेफरेंस दो साल पहले ही रेवन्यू बोर्ड खारिज कर चुका है। रेवन्यू बोर्ड मान चुका है कि जमीन किसानों की है, मंदिर माफी की नहीं है। आमेर तहसीलदार और प्रशासन ने किसानों के आवेदनों पर कार्रवाई करने के बजाए पूरे मामले को कागजी कार्यवाही में ही उलझाए रखा। जेडीए ने उस जमीन के बदले किसानों को बतौर मुआवजा 25 फीसदी विकसित जमीन देने के बजाए मुआवजे का चैक कोर्ट में जमा करवा दिया। जेडीए ने रेरा में रजिस्ट्रेशन करवाया और 16 बीघा जमीन का 11 नवंबर को कब्जा लेकर ब्लॉक भी काट दिया।


जेडीए ने नींदड़ आवासीय स्कीम की प्लानिंग 2009 में शुरु कर दी थी। जेडीए ने अक्टूबर 2010 में भूमि अवाप्ति अधिनियम-1894 की धारा 4 के तहत खातेदारों को नोटिस जारी कर दिया था। नंवबर 2011 में अधिनिय की धारा- 6 के नोटिस दे दिए। इसी दौरान भूमि अवाप्ति अधिनियम में बदलाव की मुहिम चली। जेडीए ने नए नियम के पहले ही 31 मई 2013 को अवार्ड जारी कर दिया। नया भूमि अवाप्ति अधिनियम जनवरी 2014 से लागू हुआ। आवासीय स्कीम 1350 बीघा में बसाई जा रही है। यहां पर करीब 280 बीघा जमीन जेडीए खातेदारी की सरकारी है। 120 बीघा जमीन मंदिर माफी की है। करीब 280 बीघा जमीन खातेदार जेडीए के पक्ष में समर्पित कर चुके है। जेडीए ने 2010 की डीएलसी के अनुसार 30 लाख रुपए बीघा के हिसाब से 50 करोड़ रुपए कोर्ट में जमा करवा दिए।

जमीन देने से पैसे का नुकसान, पैसा देने से जमीन का लाभ

- नींदड़ आवासीय योजना के लिए अवाप्त जमीन के नगद मुआवजे के तौर पर जेडीए 2010 की डीएलसी रेट से मुआवजा दे रहा है यानी केवल 30 लाख रुपए बीघा।

- नींदड़ आवासीय योजना के लिए अवाप्त जमीन के नगद मुआवजे के तौर पर जेडीए 2010 की डीएलसी रेट से मुआवजा दे रहा है यानी केवल 30 लाख रुपए बीघा।

- यानी एक बीघा जमीन समर्पित करने पर किसानों पर एक करोड़ 10 लाख रुपए कीमत की जमीन मिलेगी, यानि जेडीए को 80 लाख का फायदा व किसानों को नुकसान है।

रेवन्यू बोर्ड का आदेश

रेवन्यू बोर्ड ने अक्टूबर 2015 में नींदड़ की खसरा नंबर 1496, 1498, 1499 व अन्य की 16 बीघा जमीन को लेकर मंदिर माफी रेफरेंस खारिज कर दिया था। इस पर किसानों ने आमेर तहसीलदार को नामान्तरकरण खोलने के लिए आवेदन किया। करीब दो साल से मामला फाइलों में ही चल रहा है। अन्य मामले रेवन्यू बोर्ड व हाईकोर्ट में पेडिंग है।

अफसरों की दलील- अ‌वार्ड जारी हो चुका, नामांंतरण नहीं खोल सकते

रेवन्यू बोर्ड में रेफरेंस खारिज होने के बाद हमने अपील- नो अपील के लिए कलेक्टर को लिख दिया था।
-रतन कौर, आमेर तहसील की तत्कालीन तहसीलदार

म्यूटेशन खुलवाने के लिए लोग आए थे, लेकिन आला अधिकारियों से आदेश पर ही कार्रवाई कर सकते है।
-सुमन चौधरी, आमेर तहसीलदार

जमीन का अवार्ड जारी हो चुका है। अवार्ड हो चुकी जमीन का तहसीलदार नामान्तरकरण नहीं खोल सकता है। भूमि अवाप्ति अधिकारी ने टाइटल विवादित मानते हुए मुआवजा कोर्ट में जमा करवा दिया। ऐसे में किसान कोर्ट से मुआवजा ले सकता है।

राजकुमार सिंह, जेडीए के डिप्टी कमिश्नर

जेडीए ने कब्जा हटाने का भी नहीं दिया नोटिस : किसान
नींदड़ बचाओ किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष प्रभातीलाल शर्मा का कहना है कि जेडीए ने गोपालपुरा बाइपास, खड्डा बस्ती और निम्स से अवैध अतिक्रमण व कब्जा हटाने के लिए नोटिस दिया है, लेकिन नींदड़ में अचानक कार्रवाई की है। इससे सरकारी की छवि खराब हुई है।

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