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सर्किल बस स्टैंड पर जाम लगते ही घुसते हैं कॉरिडोर में, हर दिन हादसे

वर्ष 2017 में कॉरिडोर में हुए हादसों में अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी और 10 से ज्यादा लोग गंभीर घायल हुए हैं।

Bhaskar News| Last Modified - Dec 19, 2017, 05:42 AM IST

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जयपुर. सीकर रोड पर बीआरटीएस कॉरिडोर में रविवार को हुए हादसे में एक छात्र की मौत होने के बाद सोमवार को ट्रैफिक पुलिस ने हादसे का कारण जानने के लिए मोबाइल क्रैश लैब भेजी। लैब ने करीब 1 घंटे तक आसपास के क्षेत्र की रिकॉर्डिंग कर अध्ययन किया तो सामने आया कि कॉरिडोर बस स्टैंड से शुरू होने के कारण वाहन चालक आसानी से इसमें घुस जाते हैं। यहां बसों का जमावड़ा रहता है। ऐसे में आए दिन हादसे हो रहे हैं। इन्हें रोकने के लिए या तो बस स्टैंड हटाना होगा या कॉरिडोर आगे बढ़ाना होगा।

 

यहां हर दिन 2 हादसे
सीकर रोड के बीआरटीएस कॉरिडोर में व चौराहों पर औसतन रोज 2 हादसे होते हैं। ज्यादातर मामलों में वाहन चालक समझौता कर लेते हैं। वर्ष 2017 में कॉरिडोर में हुए हादसों में अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी और 10 से ज्यादा लोग गंभीर घायल हुए हैं। 

सुझाव जिनसे हादसों पर लगाम संभव

 

1. कॉरिडोर आगे खिसकाएं
अगर बस स्टैंड नहीं हटे तो कॉरिडोर की शुरुआत बस स्टैंड के बजाय दूर से करें। यानी की कॉरिडोर भवानी निकेतन कॉलेज के गेट के पास से शुरू करें। ताकि वाहन चालकों को पता चल सके कि कॉरिडोर कहां से शुरू हो रहा है। 


2. साइन बोर्ड लगाए जाएं
कॉरिडोर जहां से शुरू होता है, वहां कोई साइन बोर्ड या रिफ्लैक्टर भी नहीं है। जिससे रात को पता ही नहीं चल सकता कॉरिडोर कहां से शुरू हो रहा है। 


4. गार्ड लगाए जाने चाहिए
पूरे कॉरिडोर में कहीं पर सिक्योरिटी गार्ड नहीं है। इसलिए वाहन चालकों को कोई डर नहीं रहता। वे बेधड़क इसमें घुस जाते हैं। वाहन चालक भी जल्दी पहुंचने के प्रयास में कॉरिडोर में वाहन ले जाते हैं और हादसों का सबब बनते हैं।


3. सड़क की चौड़ाई बढ़ाई जाए
बस स्टैंड और कॉरिडोर आगे-पीछे नहीं कर सकते तो सर्किल से कॉरिडोर तक की सड़क की चौड़ाई बढ़ाए, ताकि कॉरिडोर का दूर से पता चल सके। 

 

 

पिता बोले-बच्चों को वाहन न चलाने दें
हादसे के शिकार प्रणय के पिता श्याम अग्रवाल व चाचा विजय अग्रवाल को अफसोस है कि प्रणय दोस्त के साथ स्कूटी पर क्यों गया? जो स्कूटी चला रहा था वह भी नाबालिग है। पिता का कहना है कि जब तक बच्चे बालिग न हो जाएं और उन्हें ट्रैफिक नियमों की जानकारी न हो तब तक वाहन चलाने न दें। बच्चों को ट्रैफिक नियमों और रास्तों का जानकारी नहीं रहती है। पिता ने कहा कि मैंने बेटा खो दिया, लेकिन ध्यान रखें कि बालक कितनी भी जिद करें, उन्हें वाहन चलाने नहीं दें। हालांकि, श्याम अग्रवाल ने प्रणय को स्कूटी नहीं दिला रखी थी, लेकिन प्रणय दाेस्त की स्कूटी पर बैठ कर चला गया था।

 

लो-फ्लोर बसों ने इस साल 10 जानें लीं

 

- 507 बसें जेसीटीएसएल की शहर में 
- 180 बसें बिल्कुल खटारा, जो 2010 में खरीदी गई थीं 
- 70 नई बसें लगाईं हैं जेसीटीएसएल ने पुरानी बसों के स्थान पर 
- 25 कंडम बसें ही हटाईं, चाहते तो 70 को हटा सकते थे 
 30 मिडी बसें नए साल में चारदीवारी में चलाने की योजना है।
 

..और नतीजा 
इस साल में 34 एक्सीडेंट किए। दिनों-दिन खटारा हो रही इन बसों से हुए हादसों में 10 लोगों की मौत, 31 घायल हुए। ज्यादातर हादसे ब्रेक फेल होने से हुए हैं। शहर के पूर्वी जिले में 16 हादसे हुए, जिसमें 3 लोगों की मौत और 15 लोग घायल हुए। वेस्ट जिले में लो फ्लोर से 10 हादसे हुए। जिनमें 3 की मौत और 8 घायल हुए। नॉर्थ जिले में 6 हादसों में 2 की मौत और 6 घायल हुए। साउथ जिले में केवल 2 हादसे हुए, जिनमें 2 की मौत और 2 घायल हुए।

 

 

 

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