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इस पुलिस अफसर का है विवादों से नाता, अब DGP को कोर्ट में ले जाने की दी धमकी

एपीओ एडीजी इंदू कुमार भूषण ने नया बखेड़ा खड़ा कर दिया।

मनोज शर्मा | Last Modified - Dec 23, 2017, 07:52 AM IST

इस पुलिस अफसर का है विवादों से नाता, अब DGP को कोर्ट में ले जाने की दी धमकी

जयपुर. करीब एक महीने पहले तत्कालीन डीजीपी पर अरेस्ट कराने का आरोप लगाकर विवाद खड़ा करने वाले एपीओ एडीजी इंदू कुमार भूषण ने नया बखेड़ा खड़ा कर दिया। ताजा मसला सरकारी वाहन से जुड़ा है। पुलिस मुख्यालय ने उनको आवंटित वाहन उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया है। ऐसे में, एडीजी ने डीजीपी को पत्र लिखकर साफ कहा है कि सरकार ने मुझे एपीओ किया है न कि नौकरी से निकाला या फिर सस्पेंड किया। सरकार का कोई भी आदेश वाहन रखने से रोक नहीं सकता है। यह रंजिशवश किया जा रहा है।

- उन्होंने डीजीपी को अदालत में ले जाने तक की धमकी दे डाली। इस चिट्‌ठी की एक प्रति उन्होंने गृह विभाग के प्रमुख सचिव को भेजी है। एडीजी भूषण और विवादों का चोली-दामन का साथ रहा है। इससे पहले हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान वहां के राज्यपाल से बहस। मीटिंग के दौरान गृह मंत्री के सामने डीजीपी से नोक-झोंक। पुलिस अफसरों पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने जैसे आरोप। गनमैन की पिटाई व जेल के डॉक्टर को धमकी देने जैसे गंभीर विवादों से वह घिरे रहे हैं।

- उधर, राज्य सरकार का कहना है कि एपीओ अफसर को आने-जाने के लिए वाहन दिए जाने की व्यवस्था नियमों में नहीं है। इसलिए, नियमानुसार ही वाहन नहीं दिया जा रहा है। उधर, एडीजी भूषण ने इस बारे में बात करने से इनकार ही कर दिया।

पुराने तीन कारण गिनाए

नियमों का हवाला दिया : इंदू भूषण ने लिखा है कि राज्य सरकार ने 11 दिसंबर को मुझे पदस्थापन की प्रतीक्षा में रखा है न कि नौकरी से निकाला या फिर सस्पेंड किया है। मुझे दफ्तर आना-जाना पड़ता है इसके लिए मैं वाहन संख्या-आरजे-19 सीसी 1784 को रखने के लिए विधिवत अधिकृत हूं। राज्य सरकार का कोई भी आदेश मुझे पदस्थापन की प्रतीक्षा के दौरान वाहन के प्रयोग से वंचित नहीं करता है।

पुरानी बात याद दिलाई : इससे पहले 26 जुलाई, 2013 से 5 जनवरी, 2014 तक एपीओ रहा। इस दौरान मेरे पास सतत विभागीय वाहन रहा। इसके बाद मैं 15-16 में एपीओ रहा, जिसके दौरान वाहन नहीं रहने की वजह से मैं तत्कालीन मुख्य सचिव सीएस राजन से मिला और उन्होंने मुझे ट्रांसपोर्ट भत्ता मंजूर किया।

कोर्ट ले जाने के लिए चेताया: एडीजी ने अंत में लिखा है कि एपीओ रहने के दौरान अधिकारी विभागीय वाहन के उपयोग के लिए पूर्णतया अधिकृत है। इसलिए, आपसे विनम्र अनुरोध है कि केवल निजी रंजिश के आधार पर आम मुझे इस वाहन के प्रयोग से वंचित नहीं करें। यदि ऐसा किया गया तो मुझे अदालत की शरण में जाना पड़ेगा।

वरिष्ठ अफसरों को घेरा
तत्कालीन डीजीपी अजीत सिंह पर गड़बड़ी के आरोप लगाए। कहा, वे उन्हें गिरफ्तार कराना चाहते थे। कुछ अफसरों ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया।

गनमैन को पीटा :अपने ही गनमैन एवं ड्राइवर से मारपीट का एक मामला शास्त्रीनगर थाने में वर्ष, 2013 में दर्ज किया गया था।

डॉक्टर को धमकाया :एडीजी जेल रहते 2015 में जयपुर जेल के डॉक्टर को फोन पर गाली-गलौच के आरोप लगे। इस मामले में शिकायत भी दर्ज की गई।

राज्यपाल से बहस :हैदराबाद पुलिस अकादमी में आंध्र-तेलंगाना राज्यपाल ईएसएल नरसिम्हन राव से बहस करने लगे। मिड करियर ट्रेनिंग से हाथों हाथ रिलीव कर रवाना किया।

गृहमंत्री के सामने नोक-झोंक:पिछले दिनों पुलिस मुख्यालय में गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया उच्च स्तरीय बैठक ले रहे थे। इसी दौरान डीजीपी से भिड़ गए।

चिट्‌ठी नहीं मिली, नियम होगा तभी कार ली गई
राजस्थान डीजीपी ओम प्रकाश गल्होत्रा ने बताया कि मेरी जानकारी में नहीं है कि उन्होंने कोई चिट्‌ठी दी है। हो सकता है डाक से आई हो। सामने आएगी तब ही जानकारी मिलेगी। क्या लिखा है। वैसे, कोई नियम होगा तभी कार ली गई होगी। मुझे इसकी जानकारी नहीं है। क्योंकि, चिट्‌ठी मेरे सामने आई नहीं है।

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Web Title: is police afsr ka hai vivaadon se naataa, ab DGP ko kort mein le jaane ki di dhmki
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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