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बांग्लादेशियों ने उगला राज: 8 से 12 हजार टका लेकर दलाल कराते हैं भारत में घुसपैठ

47 लोग एक साथ सीमा में घुसे, भिवाड़ी में पकड़े गए बांग्लादेशियों ने स्वीकारा, अभी भी बड़ी संख्या में छुपे हैं बांग्लादेश

Danik Bhaskar | Dec 09, 2017, 04:07 AM IST

भिवाड़ी. पुलिस की पकड़ में आए बांग्लादेशियों ने राज उगले हैं कि भारतीय सीमा से लेकर उन्हें देश भर में बसाने और काम लेने वाला पूरा संगठित नेटवर्क काम करता है। इस काम की मोटी कीमत वसूली जाती है और वे ही निर्धारित कामकाज देकर उन्हें अलग-अलग शहरों में भेजते हैं। हर आदमी की घुसपैठ के एवज में 8 से 12 हजार बांग्लादेशी टका (करीब 6 से 10 हजार भारतीय रुपए) वसूले जाते हैं।

- उन्होंने यह भी बताया कि तमाम दावों के बावजूद खुफिया एजेंसियां और स्पेशल ब्रांच पूरी तरह उन तक नहीं पहुंच पाती।

- गौरतलब है कि पूर्व में पकड़े गए बांग्लादेशी सीमा पर सुरक्षा इंतजामों में सेंधमारी और दलालों के मार्फत घुसने की बात कहते रहे हैं।

- भिवाड़ी में पुलिस ने तीन दिसंबर को दो बांग्लादेशियों को पकड़ा था। पुलिस पूछताछ में उनसे कई खुलासे हो रहे हैं। ये दोनों शहर के कैप्टन चौक से आपस में झगड़ता करने के मामले में पकड़े गए और पूछताछ होने पर पुलिस को इनके बांग्लादेशी होने का पता चला।

- इनमें एक मोहम्मद मिजान पुत्र शाहिद ने स्वीकार किया कि वह दलाल के माध्यम से भारत में घुसा। इसके लिए दलाल को उसने बांग्लादेशी मुद्रा दस हजार टका चुकाए थे।

- मिजान ने बताया कि वह ऐसा अकेला नहीं था। उसके साथ 40 बांग्लादेशियों ने बॉर्डर के समीप कूचबिहार से भारत में प्रवेश किया था।

बांग्लादेशी का दावा, जांच एजेंसी नहीं पकड़ सकती

- बांग्लादेशी मोहम्मद वारीक निवासी अमुतली बांग्लादेश ने बताया कि वह भी दो माह पहले ही भिवाड़ी पहुंचा था। उसके साथ भारत की सीमा में सात और लोगों ने दलाल के माध्यम से प्रवेश किया था। वह भी भिवाड़ी में कचरा बीनने का कार्य करता था। दलालों के नेटवर्क में सेंधमारी बड़ी चुनौती जिस संगठित नेटवर्क के जरिए बांग्लादेश से बड़ी संख्या में लोग सुरक्षित रूप से भारत पहुंच रहे हैं और फिर यहां सुरक्षित ठिकानों पर रहकर काम कर रहे हैं, उससे यह साफ है कि इस नेटवर्क के तार काफी गहरे हैं।

दलालों की नहीं होती धरपकड़

- गौरतलब है कि अभी तक की कार्रवाईयों में हमेशा बांग्लादेशी ही पकड़े जाते रहे हैं कभी कोई दलाल या इनको संरक्षण देने वाले लोग पुलिस के हाथ नहीं लगे। इसमें सांठगांठ के खेल से भी इंकार नहीं किया जा सकता, वरना एजेंसियों और पुलिस के लंबे हाथों से उनका अब तक बचे रहना मुमकिन होता।

- सूत्रों ने बताया कि इन बांग्लादेशियों के रहने-सहने से लेकर काम की व्यवस्था का इंतजाम भी यह नेटवर्क बड़े ही व्यवस्थित तरीके से कराता है।

- मंगलवार को भिवाड़ी के मुण्डाना गांव के समीप से पकड़े गए पांचों बांग्लादेशी भी यहां कबाड के गोदाम में काम करते थे। इस नेटवर्क को तोडऩा पुलिस के लिए किसी चुनौती से कम नहीं।