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राजस्थान सरकार के 4 साल: मंत्रियों के विवाद और डैमेज कंट्रोल में उलझी रही सरकार

खान घोटाले से लेकर आनंदपाल, कर्मचारी व किसान आंदोलन और डॉक्टरों की हड़ताल रही हावी, एक मुद्दा शांत तो दूसरा उठा

Bhaskar News | Last Modified - Dec 13, 2017, 04:30 AM IST

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    एनकाउंटर से लेकर गौ तस्करों की हत्या के मुद्दों की रही गूंज, गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया कहते रहे- मैं खुद बन गया आनंदपाल

    जयपुर.राज्य में ठीक चार साल पहले भाजपा की सरकार ने कमान संभाली थी। अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। सरकार की अब तक की ओवरआॅल परफॉरमेंस के आधार पर ही चुनाव की दिशा तय होनी है। इस लिहाज से मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की अगुवाई वाली भाजपा सरकार के वरिष्ठ एवं प्रमुख मंत्रियों के काम-काज का दैनिक भास्कर ने लेखा-जोखा देखा तो सामने अाया कि बेशक हर मंत्री ने अपने महकमे में कुछ उपलब्धियां तो हासिल कीं लेकिन हर बार कोई न कोई मंत्री किसी न किसी विवाद में उलझता भी रहा। इसी कारण सरकार कई बार बचाव की मुद्रा में नजर आई। पेश है भास्कर रिपोर्ट-

    परफॉरमेंस

    - हत्या, अपहरण, लूट, डकैती एवं दुष्कर्म सहित गंभीर अपराधों में नौ प्रतिशत तक की कमी। निरोधात्मक कार्रवाइयों में 11%की बढ़ोतरी।
    - जयपुर के बाद कोटा व अजमेर में अभय कमांड सेंटर की स्थापना। अब उदयपुर की बारी।
    - सीसीटीएनएस से सभी थानों में ऑनलाइन एफआईआर एवं रोजनामचा दर्ज किया जा रहा है।
    - एसएसएल यूनिट में पोलीग्राफ टेस्ट की सुविधा शुरू। इससे अब गुजरात पर निर्भरता खत्म हुई। संगीन अपराधों को खोलने में मदद।
    - सरकार के ठोस प्रयासों से सरदार पटेल काउंटर टेरेरिज्म सेंटर की जयपुर में स्थापना।
    - 12,764 अधिकारी-कर्मचारियों को नौकरी दी, 14 हजार से ज्यादा को प्रमोशन दिया।

    लो-परफॉरमेंस

    - पुलिस पर हमलाकर आनंदपाल सिंह फरार। आनंदपाल एनकाउंटर पर उठे सवाल। मसला सीबीआई को सौंपा । जांच अभी तक शुरू नहीं।
    - गोवंश तस्करी की वारदातें बढ़ने से मेवात में तनावपूर्ण स्थिति। भीड़ ने पहलु खां की हत्या कर दी। बाद में एक अन्य की हत्या कर दी गई।
    - अफसर-नेताओं को बचाने के लिए नया कानून लाया गया। देश भर में सरकार की किरकिरी। हालांकि, कानून स्वतः: समाप्त हो गया।
    - एक दर्जन से ज्यादा साम्प्रदायिक घटनाएं हुईं अापसी संघर्ष के मामलों में प्रदेश टॉप पर रहा।
    - लव जिहाद के नाम पर राजसमंद में एक सिरफिरे ने एक दूसरे संप्रदाय के व्यक्ति को मार डाला। उसका वीडियो बनाकर वायरल किया।

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    किसानों की खुशहाली की अहम जिम्मेदारी के बावजूद कर्ज माफी पर खुद को बताया असहाय। (कृषि विभाग | प्रभुलाल सैनी )
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    सरकार के संकट मोचक कहलाने वाले मंत्री का सुर्खियों में रहा अफसरों से विवाद। (पंचायतीराज व ग्रामीण विकास|राजेंद्र राठौड़ )
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    डॉक्टरों-सरकार की लड़ाई में उलझा रहा विभाग, दवाएं कम होती रहीं, बीमारी बढ़ती रही। सराफ तैनाती के साथ ही विवादों में घिरे। (स्वास्थ्य विभाग | कालीचरण सराफ)

    परफॉरमेंस:-

    - ग्रीन कॉरिडोर बनाकर कैडेबर ट्रांसप्लांट करवाया, एसएमएस को सीधे दिल्ली से जोड़ा। लीवर ट्रांसप्लांट भी किया
    - पूरे प्रदेश में बालिकाओं के लिए सेनेटरी नेपकिन का मुफ्त वितरण
    - शिशुओं को मां के दूध के लिए 10 जिला अस्पतालों में आंचल मदर मिल्क सेंटर खोले गए, 7 नए मदर मिल्क सेंटर और खोलेंगे
    - चार साल में 5334 चिकित्सा अधिकारियों, 80 दंत चिकित्सकों की भर्ती । 20 हजार नर्सिंग कर्मियों की भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली
    - नि:शुल्क दवा योजना में 4 साल में 34 करोड़ 33 लाख रोगी लाभान्वित। नि:शुल्क जांच योजना में रोजाना एक लाख जांचें मुफ्त।

    लो-परफॉरमेंस:-

    - बांसवाड़ा, बीकानेर, कोटा सहित कई जगहों पर बच्चों की मौतें नहीं रुकीं। हाईकोर्ट में 30 हजार बच्चों की मौतों पर सरकार की रिपोर्ट से फजीहत। स्वाइन फ्लू-डेंगू की रोकथाम नहीं हुई, मरीजों और मौतों के आंकड़े बढ़ते रहे।
    - डॉक्टरों के साथ 7 दिन की हड़ताल के बाद वार्ता कर समझौता हुआ, लेकिन डॉक्टर्स फिर आंदोलन की राह पर। 10 हजार डॉक्टर्स की 2011 की मांगों का अब तक निस्तारण नहीं।
    - टाटा कंपनी को ज्यादातर प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पीपीपी मोड पर देने थे अभी तक बहुत कमजोर प्रगति
    - डॉक्टरों की 1100 भर्तियां हुईं लेकिन 502 एमबीबीएस डॉक्टर ज्वाइन करने ही नहीं पहुंचे।

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    यूआईटी चेयरमैन से सीधे मंत्री की कुर्सी तक पहुंचे कृपलानी, विभागीय अफसरों के बीच टकराव, कोर्टों में अटके डवलपमेंट के कई प्लान। (यूडीएच विभाग | श्रीचंद कृपलानी)

    परफॉरमेंस :-

    - चार शहरों का स्मार्ट सिटी और 29 शहरों का अमृत योजना के लिए चयन। अब तक 4100 करोड़ रु. दोनों योजनाओं में मिले अकेले जयपुर शहर के विकास पर 4 हजार करोड़ खर्च।
    - 191 निकायों में 8.45 लाख एल.ई.डी. लाइटें लगाई गई, 153 निकायों में कार्य लगभग पूरा, 832.99 लाख यूनिट विद्युत की बचत।
    - जयपुर के ज्यादातर वार्डों में डोर टू डोर कचरा संग्रहण शुरू हुआ, 77 नगरीय निकायों को खुले में शौच मुक्त घोषित किया गया।
    - 12 शहरों में अन्नपूर्णा रसोई योजना शुरू, 5 रु.में नाश्ता एवं 8-8 रु. में दोपहर एवं रात्रि भोजन
    - 19 सेवाएं निकायों में राज विकास कार्यक्रम के तहत ऑनलाइन शुरू की।

    लो-परफॉरमेंस:-

    - 2022 तक 17 लाख मकान बनाने हैं 4 साल में। 92 हजार ही सेंक्शन। 11,992 का आवंटन।

    - विभाग में कोई बड़ी भर्ती नहीं, पालिका और निगमों में भी सिर्फ 3 हजार पदों पर नियुक्ति।
    - स्टेच्यू सर्किल पर पलासिया प्रोजेक्ट मामले में सरकार को मुंह की खानी पडी़। सरकार सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी फिर गहलोत सरकार की शर्तों पर ही मंजूरी दे दी।
    - हाउसिंग बोर्ड में एक भी नई बड़ी आवासीय योजना नहीं ला पाए।
    - जेडीसी-मंत्री के बीच डेढ़ साल तक टकराव के कारण जयपुर के पूर्व राजपरिवार के राजमहल होटल प्रकरण से लेकर मंदिरों, चौराहों और बाजारों की तोड़फोड़ पर सरकार घिरी।

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    सरकार में नंबर 2 की हैसियत वाले मंत्री का पीछा करता रहा आनन्दपाल का नाम (सड़क-परिवहन विभाग: युनूस खान )

    परफॉरमेंस :-

    - 47 हजार 707 किमी सड़कों पर 15 हजार 487 करोड़ रुपए खर्च किए। प्रदेश में रोजाना 15 किमी सड़कों का निर्माण। {6,587 ग्राम पंचायतों में ग्रामीण गौरव पथ बनाने की स्वीकृतियां। अधिकांश पूर्ण।
    - प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना का प्रथम चरण में 11 हजार 363 किमी की सड़कों का निर्माण।
    - कोटा हैंगिंग ब्रिज जनता को समर्पित किया। सालों से अटके कोटा-दरा-झालावाड़ राजमार्ग के निर्माण का रास्ता खोला गया।

    लो-परफॉरमेंस

    -20000 किमी नई सड़कों को निर्माण पीपीपी मोड पर कराने की घोषणा, लेकिन नाकाम। {आनंदपाल को लेकर उनका नाम कई बार विवादों में रहा। विरोधियों ने डीडवाना में देश विरोधी नारे लगने की घटना को भी युनूस खान से जोड़ा।
    - रोडवेज की स्थिति में सुधार नहीं ला सके। निजी बसों को सिंधी कैंप सहित सरकारी बस अड्डों से शुरू करवाने को लेकर विवादों में रहे।
    - सिंधी कैंप बस अड्डे का आधुनिकीकरण आज तक नहीं किया जा सका।

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    शुरुआती दौर में लगा घोटालों का दाग नहीं धो पाया विभाग, चार साल में बदले दो मंत्री। (खान विभाग : सुरेन्द्रपाल सिंह टीटी)

    परफॉरमेंस :-

    - मेजर मिनरल के चार ब्लाकों का ई नीलामी से आवंटन।
    - राज्य सरकार की ओर से माइनर मिनरल के लिए नई पालिसी बनाई गई।
    - माइनर मिनरल के 100 से अधिक ब्लाकों की ई नीलामी।
    - डिस्ट्रिक मिनरल फाउंडेशन का गठन, 1100 करोड़ रुपये जमा। 800 करोड़ के प्रस्ताव का अनुमोदन।
    - आन लाइन ई रवन्ना से वाहनों की खान ब्लाकों से निकासी शुरू।
    - रायल्टी वसूलने के लिए आन लाइन ठेकों का आवंटन।

    लो-परफॉरमेंस:-

    - करीब 650 खानों के आवंटन में घोटाला, विवाद पर आवंटन निरस्त, जांच लोकायुक्त को ।
    - खान घूसकांड में तत्कालीन प्रमुख सचिव अशोक सिंघवी, अतिरिक्त निदेशक पंकज गहलोत सहित कई अफसर, ठेकेदार और दलाल गिरफ्तार
    - बजरी ब्लाकों का सरकार पर्यावरण प्रभाव का आंकलन नहीं करा पाई, जिससे सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी।
    - अवैध खनन सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है।
    - लोकायुक्त जांच दायरे में आधे से अधिक माइनिंग इंजीनियर।

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    पर्यटन विकास निगम पहले से घाटे में था और घाटे में चला गया, होटलें पहुंची निजी कंपनियों के हाथ, मंत्री रहीं ज्यादातर बीमार (पर्यटन विभाग| कृष्णेंद्र कौर दीपा)

    परफॉरमेंस:-

    - 2015 में राजस्थान पर्यटन इकाई नीति जारी। पर्यटन सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए नीति में टैक्स और जमीन समेत कई तरह की छूट।
    - पर्यटन स्थलों में इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट के लिए 900 करोड़ रुपए के काम शुरू।
    - प्रदेश के पर्यटन को नई पहचान देने के लिए नया लोगो “ जाने क्या दिख जाए” जारी किया। ब्रांडिंग के लिए अंतरराष्ट्रीय मेलों का आयोजन ।
    - पर्यटन में रोजगार बढ़ाने के लिए उदयपुर के फूड क्राफ्ट इंस्टिट्यूट को होटल प्रबंधन संस्थान में क्रमोन्नत किया।
    - हवाई पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के सभी जिलों में हवाई पट्टियों के निर्माण और विस्तार का काम किया।

    लो-परफॉरमेंस:-

    - पर्यटन विभाग के संस्थानों का घाटा लगातार बढ़ा। आरटीडीसी 10 सालों में पहली बार 1.42 करोड़ रुपए के ऑपरेशनल लॉस में ।
    - 3 सालों में आरटीडीसी की आय 88 करोड़ से घटकर 54 करोड़ रह गई। संचालन खर्च कम करने को स्टाफ घटाया लेकिन घाटा बढ़ता गया।
    - आरटीडीसी की 16 होटलों-मोटलों को बंद कर दिया, जो बंद नहीं हुई उनका मेंटिनेंस भी नहीं।
    - रिसर्जेंट राजस्थान में पर्यटन के सबसे ज्यादा एमओयू हुए और सबसे ज्यादा विफलता की दर भी इसी विभाग की रही।
    - खासाकोठी होटल और आनंद भवन जैसी संपत्तियों को पीपीपी के नाम पर निजी निवेशकों को देने की तैयारी।

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    स्कूलों में नामाकंन बढ़ा, लेकिन पाठ्यक्रम बदलाव को लेकर रहा विवाद (शिक्षा विभाग : वासुदेव देवनानी)

    परफॉरमेंस :-

    - नवाचारों से राष्ट्रीय सर्वे में प्रदेश 18वें स्थान से छलांग मार कर चौथे नंबर पर आ गया।
    - सरकारी स्कूलों में 4 साल पहले 60 लाख नामांकन था जो बढ़कर 80 लाख से अधिक।
    - एक लाख नौ हजार शिक्षक और अन्य कर्मचारियों की पदोन्नति की गई। इससे नई भर्ती की राह खुल सकी।
    - विभाग में तृतीय श्रेणी, द्वितीय श्रेणी और व्याख्याताओं की भर्ती प्रक्रिया शुरु की गई।
    -निजी स्कूलों से मुकाबले के लिए बीस साल बाद स्कूली यूनिफॉर्म में बदलाव किया।

    लो-परफॉरमेंस:-

    - तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले 2010 के बाद नहीं हुए।

    - विभाग ने प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा की तबादला नीतियों का ड्राफ्ट जारी करके उन पर आपत्ति तो ले ली। लेकिन इन तबादला नीतियों को आज तक लागू नहीं किया।
    - स्टाफिंग पैटर्न के कारण हजारों पद समाप्त कर दिए।
    - पाठ्यक्रम में दो सौ से अधिक महापुरुषों व वीरांगनाओं को शामिल किया। झांसी की रानी और सरफरोशी की तमन्ना जैसी देशभक्ति से जुड़ी कविताओं को हटाने पर विवाद हुए।

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