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क्लीन स्वीप: अजमेर-अलवर, मांडलगढ़ सीटें कांग्रेस ने बीजेपी से छीनीं

CM वसुंधरा के लिए ये हार खतरे की चेतावनी है। इस सरकार में ये आठवां उपचुनाव है, जिनमें छह में कांग्रेस ही जीती हैं।

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 04:37 AM IST
इस लोकसभा में 3 साल 9 माह बाद राजस्थान से कांग्रेस के 2 सांसद अब पहुंचेंगे। इस लोकसभा में 3 साल 9 माह बाद राजस्थान से कांग्रेस के 2 सांसद अब पहुंचेंगे।

जयपुर. राजस्थान में अजमेर, अलवर लोकसभा और मांडलगढ़ विधानसभा सीट के उपचुनाव में कांग्रेस ने रिकॉर्ड जीत दर्ज की है। ये तीनों सीटें पहले बीजेपी के पास थीं। कांग्रेस के लिए ये रिजल्ट संजीवनी की तरह हैं। इस जीत से कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट का कद और बढ़ गया, उनके नेतृत्व को भी ताकत मिली। उधर, मुख्यमंत्री वसुंधरा के लिए ये हार वॉर्निंग की तरह। ऐसा कहा जा रहा है कि कांग्रेस में नेताओं ने ये चुनाव एकजुटता और स्ट्रैटजी बनाकर लड़े।

हार-जीत की 3 बड़ी वजहें

# बीजेपी: अंदरूनी संघर्ष और जातीय समीकरणों ने बिगाड़ा खेल

1. एंटी-इनकमबेंसी: केन्द्र और राज्य की नीतियों के खिलाफ जनता नाराज है। इस वजह से शहरी वोटर भी बीजेपी से दूर हुए। जिन 17 विधानसभा सीटों पर पोलिंग हुई, वहां सभी जगह बीजेपी हारी।

- संघ ने भी इन चुनावों में प्रचार से खुद को दूर रखा। कर्मचारियों और डॉक्टरों की हड़ताल से लोग परेशान हुए। सरकार इन मुद्दों को नहीं सुलझा सकी। इससे सरकार के खिलाफ माहौल बना।

2. अंदरूनी संघर्ष: टिकटों को लेकर पार्टी में आखिर तक विवाद बना रहा। अलवर में कैबिनेट मंत्री जसवंत यादव को टिकट दिया। उनकी छवि अच्छी नहीं थी। पार्टी के विधायक नाराज थे।


3. राजपूतों की नाराजगी: आनंदपाल और पद्मावत फिल्म के मुद्दे पर राजपूतों की नाराजगी को सरकार नहीं भांप सकी। कांग्रेस ने इसे अपने वोट में कैश किया। सरकार के पास 24 राजपूत विधायक हैं।

# कांग्रेस: एकजुटता और हर सीट पर अलग स्ट्रैटजी ने दिलाई जीत

1. कांग्रेस नेताओं की एकजुटता: युवा प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट की राजनीितक सूझबूझ कमाल की रही। वे अशोक गहलोत और सीपी जोशी को एक साथ लेकर चले। यही नहीं अजमेर में रहकर उन्होंने मांडलगढ़ और अलवर पर भी निगाहें रखीं।


2. मेरा बूथ मेरा गौरव: पहली बार बूथ को मजबूत करने के लिए मेरा बूथ मेरा गौरव अभियान ने वोटरों और कार्यकर्ताओं को कनेक्ट िकया।


3. जीतने का जातीय समीकरण: कांग्रेस ने तीनों सीटों के लिए अलग-अलग रणनीति बनाई। अजमेर में कांग्रेस जाट बनाम अन्य जातियां करने में कामयाब रही। राजपूत और ब्राह्मण को अपने पक्ष में रखा। अलवर में यादवों के साथ-साथ कांग्रेस ने अन्य जातियों को अपने पक्ष में लिया। वहीं मांडलगढ़ में बागी उम्मीदवार के बावजूद भाजपा के वोट बैंंक में सेंध लगाई।

बीजेपी जहां पहले रिकॉर्ड मतों से जीती थी, अब रिकॉर्ड मतों से हारी
- चार साल में ही एंटीइनकमबेंसी इतनी बढ़ गई कि सारे समीकरण उल्टे हो गए। अलवर सीट पर 2014 में बीजेपी के महंत चांदनाथ ने कांग्रेस के भंवर जितेंद्र सिंह को दो लाख 83 हजार वोटों के रिकॉर्ड अंतर से हराया। वहीं अजमेर लोकसभा में बीजेपी के सांवरलाल जाट ने सचिन पायलट को और मांडलगढ़ विधानसभा में बीजेपी की कीर्ति कुमारी ने विवेक धाकड़ को हराया था।
- अब अजमेर में बीजेपी 84414 और अलवर में 196496 वोटों से हार गई।

बीजेपी के तीनों कैंडिडेट तो हारे ही, 15 मंत्री और 14 विधायकों की भी शिकस्त
- अलवर, अजमेर लोकसभा और मांडलगढ़ विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बीजेपी के तीनों कैंडिडेट ही नहीं हारे, 15 मंत्रियों और 14 विधायकों को भी शिकस्त मिली। वह इसलिए कि बीजेपी को जिताने का दारोमदार इन्हीं पर था।
- राज्य सरकार की एंटी इनकमबेंसी और केंद्र के जीएसटी-नोटबंदी जैसे फैसले भी हार की वजह रहे। तभी तो गांवों में ही नहीं, शहरों में भी बीजेपी पिछली बढ़त बरकरार नहीं रख सकी।

रोचक: एक की जमानत बची, 35 की जब्त हो गई

- उपचुनाव में दो लोकसभा और एक विधानसभा में भाजपा-कांग्रेस को छोड़कर निर्दलीय और 36 दूसरे कैंडिडेट्स मैदान में थे, जिनमें से सिर्फ एक मांडलगढ़ के कैंडिडेट उम्मीदवार गोपाल मालवीय की जमानत बची।

लोकसभा: 3 साल 9 माह बाद राजस्थान से संसद में कांग्रेस का खाता खुला

- इस लोकसभा में 3 साल 9 माह बाद राजस्थान से कांग्रेस के 2 सांसद पहुंचेंगे। मई, 2014 के चुनाव में कांग्रेस सभी 25 सीटें हार गई थी। अजमेर एवं अलवर की सीट जीतने से लोकसभा में कांग्रेस का खाता खुला।

राज्यसभा: अब होगा राज्यसभा में राज्य से कांग्रेस का खाता बंद

- मार्च में होने वाले राज्यसभा के चुनावों में राजस्थान से कांग्रेस का प्रतिनिधित्व खत्म हो जाएगा।

bjp clean sweep by congress in rajasthan
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इस लोकसभा में 3 साल 9 माह बाद राजस्थान से कांग्रेस के 2 सांसद अब पहुंचेंगे।इस लोकसभा में 3 साल 9 माह बाद राजस्थान से कांग्रेस के 2 सांसद अब पहुंचेंगे।
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