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रिमांड के दौरान विधायक के बेटे का ब्लड सैंपल बदला, डॉक्टर-पुलिसकर्मी जांच के घेरे में

हिट एंड रन केस: गृह विभाग की जांच के बाद सिद्धार्थ महरिया के ब्लड सैंपल बदलने के मामले में केस दर्ज

Bhaskar News| Last Modified - Jan 18, 2018, 03:45 AM IST

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blood sample of  MLAs son changed During remand

जयपुर. फतेहपुर (सीकर) से निर्दलीय विधायक नंदकिशोर महरिया के बेटे सिद्धार्थ महरिया द्वारा 1 जुलाई 2016 को सी स्कीम स्थित सेंट जेवियर चौराहे पर बीएमडब्ल्यू कार से 8 लोगों को रौंदने के मामले में नया मोड़ आ गया है। एफएसएल की जांच के लिए भेजे गए महरिया के ब्लड सैंपल को बदला गया था। सैंपल बदलने के लिए महरिया के ब्लड का दूसरा सैंपल उस समय लिया गया, जब वह पुलिस रिमांड पर था और सवाई मानसिंह अस्पताल में भर्ती था। महरिया के ब्लड की जांच 6 जुलाई को की गई थी और एफएसएल में 4 जुलाई को सैंपल भेजा गया था। 4 से 6 जुलाई के बीच महरिया के ब्लड का दूसरा नमूना लेकर बदला गया था और 7 जुलाई तक महरिया पुलिस रिमांड पर था। 

 

- गृह विभाग की ओर से की गई जांच में सैंपल बदलने के लिए एफएसएल के डॉ. विनोद जैन को आरोपी माना है। अस्पताल के डॉक्टर और निगरानी में लगे पुलिसकर्मियों की भूमिका को संदिग्ध मानी है। सैंपल बदलने का केस शास्त्री नगर थाने में मामला दर्ज कराया गया है।

- गृह विभाग के विशिष्ट सचिव देवेन्द्र दीक्षित की ओर से की गई जांच में सामने आया है कि हादसे के बाद जब पुलिस ने ब्रेथ एनलाइजर से जांच की तब महरिया के शराब पीने की बात सामने आई थी। इसके बाद सवाई मानसिंह अस्पताल में डॉ. शिव शंकर ने शराब की जांच के लिए महरिया के ब्लड के सैंपल लिए। जिस पर चपड़ी लगाने के बजाय टेप से सील किया।

- जांच में पता चला कि उस समय अस्पताल में चपड़ी उपलब्ध नहीं थी। इसलिए टेप लगाई गई। पुलिस ने 4 जुलाई को सैंपल एफएसएल में जमा करा दिया। नमूने की जांच 6 जुलाई को की गई, जिमसें एल्कॉहाल नहीं पाया गया।

- जांच में सामने आया कि वैज्ञानिक डॉ. विनोद जैन ने सैंपल को अपने केबिन में ही रखा। महरिया के ब्लड सैंपल को केस यूनिट के बाद सीधे विष खंड में बने एक विशेष कमरे में रखा जाना था। नमूने के फोटोग्राफ 4 जुलाई को कराए गए थे। जिन पर 6 जुलाई की तारीख लिखी गई।

 

 

ब्लड में एल्कोहॉल नहीं मिला तो डीएनए जांच की
- महरिया के ब्लड की जांच में जब एल्कोहॉल नहीं होने की बात सामने आई तो दूसरी बार जांच की गई। इस पर भी एल्कोहॉल नहीं मिला।

- इसके बाद खून की डीएनए जांच की गई, ताकि यह पता चल सके कि यह ब्लड सिद्धार्थ महरिया का ही है या नहीं। ब्लड महरिया का होने की पुष्टि हुई तब सैंपल के बदले जाने का शक हुआ।

- ब्लड जांच से एक दिन पहले 5 जुलाई को डॉ. विनोद जैन और डॉ. रितू चौधरी मालवीय नगर स्थित निजी लैब में ब्लड सैंपल की जांच कराने पहुंचे थे। महरिया के ब्लड की जांच 6 जुलाई को हुई थी।

- इस जांच के बाद ही पता चला था कि ब्लड में एल्कोहॉल नहीं है। ऐसे में दोनों वैज्ञानिक एक दिन पहले निजी लैब में ब्लड की जांच होने संबंधी पूछताछ करने क्यों गए?

- जांच में माना की नमूना बदलने में कुछ डॉक्टर व पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध रही है, क्योंकि महरिया के ब्लड का दूसरा नमूना तब लिया जब वह रिमांड पर था और एसएमएस अस्पताल में भर्ती था।

 

 

#गृह विभाग की जांच के बाद सिद्धार्थ महरिया के ब्लड सैंपल बदलने के मामले में केस दर्ज एफएसएल के डॉ. विनोद जैन को सैंपल बदलने के मामले में माना आरोपी, जांच में उठाया सवाल- 

- 1 जुलाई की रात महरिया के सैंपल लिए। 
- 4 जुलाई को एफएसएल भेजा। 
- 6 जुलाई की जांच में एल्कोहॉल नहीं मिला।
- रिमांड के दौरान दूसरा सैंपल लिया, क्योंकि एफएसएल जांच के दिन तक सिद्धार्थ महरिया पुलिस रिमांड पर था।

 

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