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यहां 400 साल से खेली जा रही है खूनी होली, भाभी कोड़ों से पीटती हैं अपने देवरों को

50 हजार लोगों की भीड़ बनी इस होली की गवाह, 4 घंटे तक बरसाए कोड़े।

Bhaskar News | Last Modified - Mar 04, 2018, 01:32 AM IST

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    खूनी होली में कोड़ों से पीटती हुई भाभीयां।

    टोडाभीम(करौली).गांव पावटा में होली के तीसरे दिन दूज को परंपरागत डोलची होली (कोड़े मार होली) पूरे जोश खरोश से खेली गई। 50 हजार की भीड़ में घंटों तक हदीरा बाबा चौक में डोलची होली का धमाल चलता रहा। चमड़े की कठोर डोलची के वार से चटाक की आवाज युवाओं को घायल करती रही लेकिन अपने आदर्श बल्लू शहीद के शौर्य और पराक्रम की प्रेरणा के चलते वे पीछे हटने का नाम नहीं ले रहे थे। घंटों चले इस संघर्ष को गांव के पंच-पटेलों ने अंगोछा लहराकर विराम दिया गया। भाभी देवरों को मारती हैं कोड़ों से...


    - गांव के मध्य हदीरा चौक पर यज्ञ के साथ डोलची होली का शुभारंभ हुआ।

    - मैदान के चारों तरफ बने पानी के टैंकों को भर कर उसमें रंग डालते नजर आए।

    - डोलची की मार को बर्दाश्त कर सकें इसके लिए हल्दी युक्त तेल मालिश की जा रही थी।

    - दोपहर बाद शुरू हुए इस धमाल में दो घंटे तक युवक एक-दूसरे पर और भाभी अपने देलरों पर डोलची का प्रहार कर घायल करते रहे।

    - अपने आदर्श बल्लू शहीद के शौर्य और पराक्रम की प्रेरणा के चलते खेल समाप्त होने तक मैदान में डटे रहे।

    आज भी जिंदा है चार सौ वर्ष पुरानी खूनी होली की परंपरा


    - पावटा में खेली जाने वाली खूनी डोलची होली की चार सौ वर्ष पुरानी परंपरा को ग्रामीण आज भी जिंदा रखे हुए हैं।

    - बल्लू शहीद की याद में खेली जाने वाली इस डोलची होली की परंपरा को लेकर ग्रामीणों का उत्साह आज भी उन पुरानी यादों को ताजा कर देते है।

    - ग्रामीण दीपावली की तरह अपने मकानों का सजाते है वहीं शहीद बल्लू के स्थान को साफ सुथरा कर उनके स्थानों पर बने सभी कुंडों की साफ सफाई कर सजाया जाता है।

    - डोलची की मार को लेकर एक माह पूर्व से ही इस डोलची खेल में शरीक होने वाले युवक अपनी खुराक शुरू कर देते है।

    - डोलची खेल का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जहां डोलची की मार से लहुलुहान होने के बावजूद युवा मैदान छोड़ कर नहीं भागते।

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    यहां पर महीनों पहले से शरीर की मालिश शुरू कर देते हैं।
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    ढोचली होली खेलते देवर-भाभी व दर्शकों की भीड़।
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    देवर-भाभियों में चार घंटे तक चला धमाल।
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Web Title: Blooded Holi Near Karoli Celebrating For 400 Years
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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